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LTCG टैक्स घटाने से लौटेंगे विदेशी निवेशक? Morgan Stanley का क्या है कैलकुलेशन

LTCG Tax Cut: एक अरसे से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) पर टैक्स को लेकर चर्चा हो रही है और कुछ का यह भी मानना है कि इसी के चलते विदेशी निवेशकों की पूंजी यहां से निकल रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस टैक्स में कटौती की जाए तो विदेशी निवेशकों धड़ाधड़ यहां पैसे डालने लगेंगे, जानिए इसे लेकर मॉर्गन स्टैनले इंडिया का क्या कहना है

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Oct 29, 2026 पर 2:20 PM
LTCG टैक्स घटाने से लौटेंगे विदेशी निवेशक? Morgan Stanley का क्या है कैलकुलेशन
LTCG Tax Cut: मॉर्गन स्टेनले इंडिया (Morgan Stanley India) के एमडी का कहना है कि वैश्विक निवेशकों के लिए असली सवाल सिर्फ टैक्स की दर नहीं, बल्कि भारतीय शेयरों से मिलने वाला संभावित रिटर्न है।

LTCG Tax Cut: मॉर्गन स्टेनले इंडिया के एमडी रिधम देसाई (Ridham Desai) ने इस धारणा पर सवाल उठाया है कि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स में कटौती से भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी अपने आप बढ़ जाएगी। राइजिंग भारत समिट-वेस्ट एडिशन में उन्होंने इससे इनकार किया। उन्होंने कहा टैक्स नीति निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकती है, लेकिन यह भारतीय बाजार से मिलने वाले बेहतर रिटर्न की जगह नहीं ले सकती।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार वित्त वर्ष 2027-28 के बजट से पहले इक्विटी एलटीसीजी टैक्स में बदलाव पर विचार कर रही है। इसमें टैक्स की मौजूदा 12.5% दर को घटाने का विकल्प भी है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच कुछ लोगों ने सरकार से STT (सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स) में राहत की मांग भी की है।

टैक्स कटौती से ज्यादा जरूरी निवेश पर मिलने वाला रिटर्न

मॉर्गन स्टेनले इंडिया के एमडी का कहना है कि वैश्विक निवेशकों के लिए असली सवाल सिर्फ टैक्स की दर नहीं, बल्कि भारतीय शेयरों से मिलने वाला संभावित रिटर्न है। उनका कहना है कि निवेशक पैसे लगाने से पहले भारत में निवेश करने से दूसरे बाजारों और एसेट क्लास की तुलना में कितना फायदा मिल सकता है और वे वहीं निवेश करेंगे, जहां बेहतर रिटर्न मिले। इसका मतलब है कि एलटीसीजी टैक्स में कटौती से भारत में निवेश की लागत कुछ कम हो तो सकती है, लेकिन इससे अपने आप कंपनियों की कमाई या शेयरों का रिटर्न नहीं बढ़ता। उनका कहना है कि विदेशी निवेशक निवेश का फैसला लेते समय कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ, शेयरों के वैल्यूएशन, रुपये की चाल और दूसरे देशों में निवेश के मौकों की तुलना करते हैं।

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