Daily Voice : सरकार की अनुकूल नीतियां, पूंजीगत व्यय, टैक्स और श्रम कानूनों में सुधार, मैन्यूफैक्चरिंग और बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदम से मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं। जैसे-जैसे कमोडिटी की कीमतें कम हो रही है और दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ रही है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की रुचि बढ़ रही है। ये बातें राइट होराइजन्स के अनिल रेगो ने मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में कही हैं। इक्विटी और कैपिटल मार्केट का 3 दशकों से ज्यादा का अनुभव रखने वाले अनिल रेगो ने आगे कहा कि मजबूत अर्निंग ग्रोथ और घरेलू इकोनॉमी की मजबूती से भारतीय इक्विटी मार्केट को सपोर्ट मिल रहा है।
24 अगस्त को होने वाले जैक्सन होल सिम्पोजियम में फेड चेयरमैन के भाषण से आप क्या उम्मीद करते हैं? इस सवाल के जवाब में अनिल ने कहा कि यूएस फेडरल रिजर्व ने महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए आक्रामक रुख अपनाते हुए ब्याज दरों को 5.25-5.50 फीसदी तक बढ़ा दिया है जो पिछले दो दशकों का उच्चतम स्तर है। हालांकि अमेरिका में महंगाई अभी भी लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। इस सिम्पोजियम में भविष्य में दरों में बढ़ोतरी का संकेत मिल सकता है। इस के अलावा निवेशकों की नजर इसमें मिलने वाले गाइडेंस पर लगी रहेगी।
क्या आपको लगता है कि बाजार में यहां से और और ज्यादा करेक्शन आएगा क्योंकि लंबी अवधि तक ब्याज दरों के ऊपर बने रहने की संभावना है?
वित्त वर्ष 20 24 में ब्याज दरें आरबीआई की उम्मीदों से ऊपर बनी रहने की उम्मीद है, जिससे दरों में कटौती में देरी हो सकती है। ब्याज दर, लागत और कच्चे माल के भाव में बढ़त का यह माहौल हर सेक्टर के लिए चुनौतियां लेकर आता है। हालांकि उम्मीद है कि ऐसी कंपनियों को खास परेशानी नहीं जिनकी लागत संरचना और प्रबंधन क्षमता अच्छी है। हालांकि दरों में कटौती से बाजार को सपोर्ट मिलेगी। लेकिन ये बाजार में तेजी भरने वाला अकेला कारण नहीं है। घरेलू इक्विटी मार्केट को इस समय मजबूत अर्निंग ग्रोथ और घरेलू इकोनॉमी की मजबूती से सपोर्ट मिल रहा है।
ग्लोबल ग्रोथ में उम्मीद से ज्यादा मंदी से हो सकती है परेशानी
आगे बाजार को कहां से परेशानी हो सकती है? इस पर बात करते हुए अनिल रेगो ने कहा कि ग्लोबल ग्रोथ में उम्मीद से ज्यादा मंदी, लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई महंगाई, बढ़ती ब्याज दरें और जियोपोलिटिकल उथल-पुथल ऐसे कारण हैं जो इक्विटी मार्केट के लिए आगे मुश्किलें पैदा कर सकते हैं। लेकिन व्यापक आधार वाली अर्निंग ग्रोथ, दरों में कटौती, मजबूत क्रेडिट ग्रोथ, एक्सपोर्ट मार्केट में रिकवरी और ग्रामीण मांग में सुधार बाजार और इकोनॉमी दोनों के लिए शुभ संकेत हैं।
फार्मा सेक्टर पर न्यूट्रल नजरिया
क्या आपको फार्मा सेक्टर का वैल्यूएशन सही लग रहा है? इस पर अनिल ने कहा कि पहली तिमाही में फार्मा कंपनियों की टॉपलाइन (आय) उम्मीद के मुताबिक रही। जबकि इनकी बॉटमलाइन (मुनाफा) उम्मीद से बेहतर रही। अमेरिका में जेनेरिक दवाओं का कारोबार करने वाली अच्छी प्रोडक्ट पाइपलाइन वाली कंपनियां कीमत में गिरावट के असर से निपटते हुए विकास की गति को भी बनाए रख सकती हैं। अमेरिकी कारोबार में कोई बड़ी मंदी या कीमत में गिरावट फार्मा कंपनियों के लिए बड़ा खतरा। फर्मा सेक्टर पर अनिल का न्यूट्रल नजरिया है। लेकिन उनका ये भी कहना है कि इस सेक्टर के चुनिंदा शेयरों में निवेश के अच्छे मौके हैं।
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