मीडियम टर्म में इंडिया के लिए अच्छी संभावना दिख रही है। इकोनॉमी में स्ट्रक्चरल चेंज का फायदा मिलना शुरू हो गया है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को PLI स्कीम और चाइना प्लस वन (China Plus one) फैक्टर का लाभ मिल रहा है। इससे पूंजीगत खर्च बढ़ा है। प्राइवेट सेक्टर में भी इनवेस्टमेंट सायकिल शुरू हुआ है। यह कहना है CapGrow Capital Adivsors के अरुण मल्होत्रा का। उन्हें इंडियन कैपिटल मार्केट का 28 साल से ज्यादा का अनुभव है। मनीकंट्रोल से बातचीत में उन्होंने शेयर बाजार और निवेश के बारे में खुलकर चर्च की। उन्होंने कहा कि इस फाइनेंशियल ईयर के बाकी पीरियड में बैंकिंग सेक्टर का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहेगा। इसकी वजह यह है कि लंबे समय बाद बैंकिंग सेक्टर (Banking Sector) की सेहत अच्छी दिख रही है। बैंकों का एनपीए (NPA) घट रहा है। उनकी बैलेंशीट में इम्प्रूवमेंट है। क्रेडिट डिमांट की तस्वीर बेहतर दिख रही है।
विदेशी निवेशकों के पोर्टफोलियो में फाइनेंशियल सर्विसेज की हिस्सेदारी बढ़ी
मल्होत्रा ने कहा कि पिछला दशक बैंकिंग सेक्टर खासकर सरकारी बैंकों के लिए अच्छा नहीं था। बढ़ते एनपीए, लोअर क्रेडिट ग्रोथ और हाई क्रेडिट कॉस्ट्स से बैंकिंग सेक्टर बेहाल था। कोरोना की महामारी के बाद आर्थिक गितिविधियां फिर से बढ़ने लगी हैं। लोगों ने खर्च करना शुरू कर दिया है। इसका असर बैंकिंग सेक्टर पर पड़ रहा है। इस वित्त वर्ष के बाकी महीनों में यह सेक्टर बहुत अच्छा परफॉर्म करेगा। इस वित्त वर्ष में एनपीए में इम्प्रूवमेंट जारी रहेगा। फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर के पोर्टफोलियो में फाइनेंशियल सर्विसेज की हिस्सेदारी 32.28 फीसदी पहुंच गई है। यह पिछले 18 महीने में सबसे ज्यादा है। FPI के लिए फाइनेंशियल सर्विसेज सबसे ज्यादा वेटेज वाला सेक्टर है। कुछ प्राइवेट और सरकारी बैंकों को लेकर हमारा नजरियां पॉजिटिव है।
अमेरिका और यूरोप से बिजनेस हासिल करने वाली आईटी कंपनियों पर असर पड़ेगा
IT सेक्टर में संभावनाओं के बारे में पूछने पर मल्होत्रा ने कहा कि आईटी सेक्टर को दुनियाभर में हाई इनफ्लेशन की वजह से मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, इंडियन आईटी कंपनियों की आर्थिक सेहत ठीक है। इस फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही में रेवेन्यू में आईटी कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़ी है। दूसरी तिमाही में ज्यादातर आईटी कंपनियों का प्रदर्शन अच्छा रहा है। अमेरिका और यूरोपीय मार्केट से ज्यादा बिजनेस हासिल करने वाली इंडियन आईटी कंपनियों के प्रदर्शन पर असर दिख सकता है। इसकी वजह यह है कि दोनों इकोनॉमी में ग्रोथ कमजोर रहने के आसार हैं। अमेरिका में हाई इनप्लेशन को काबू में करने के लिए फेडरल रिजर्व ने इंटरेस्ट रेट बढ़ाया है। इसका असर ग्रोथ पर पड़ा है।
मीडियम टर्म में ग्रोथ की बेहतर संभावना
उन्होंने कहा कि मीडियम टर्म में इंडिया के लिए ऑउटलुक अपेक्षाकृत बेहतर दिखाई देता है। इकोनॉमी में स्ट्रक्चरल बदलाव के नतीजे दिख रहे हैं। उधर, रूस-यूक्रेन लड़ाई का असर ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ रहा है। एनर्जी क्राइसिस ने यूरोप में लोकल कंपनियों को बहुत नुकसान पहुंचाया है। यूरोपीय संघ में इनफ्लेशन बहुत हाई लेवल पर पहुंच गया है। इन वजहों से फिर से कमोडिटी की कीमतों में तेजी दिख रही है। ऑयल की बढ़ती कीमतें भी सेंटिमेंट को खराब कर सकती हैं। मल्होत्रा ने कहा कि दुनिया चीन का विकल्प तलाश रही है। इंडिया में केंद्र और राज्य सरकारें कंपनियों को इंडिया में इनवेस्ट करने के लिए आमंत्रित कर रही हैं। इंडिया में फिर से ग्रोथ साइकिल शुरू हो रही है। नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ पर इसका असर दिख रहा है।