शेयर बाजार में फिर लौटी अर्निंग्स ग्रोथ की चिंता, अमेरिकी टैरिफ तोड़ सकती है निवेशकों की उम्मीदें: जय कोठारी
Daily Voice: जय कोठारी के मुताबिक काफी अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में निवेशकों को अर्निंग में तुरंत किसी सुधार की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। अनुमान से अधिक अमेरिकी टैरिफ ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब अर्निंग अपग्रेड में और समय लग सकता है
सोना बढ़ती महंगाई, जीडीपी ग्रोथ में नरमी, भू-राजनीतिक तनाव और अनिश्चितता के दौरान अच्छा प्रदर्शन करता है। वर्तमान आर्थिक स्थितियां कुछ ऐसी ही हैं। इसलिए,वित्त वर्ष 2026 में सोने का प्रदर्शन अच्छा रहने की उम्मीद है
डीएसपी म्यूचुअल फंड के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट,ग्लोबल हेड इंटरनेशनल ट्रेड और चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट जय कोठारी ने मनीकंट्रोल को दिए एक साक्षात्कार में कहा है कि शुरुआत में अर्निंग्स में सुधार की उम्मीद थी,लेकिन ट्रंप के हालिया ऐलानों से इसमें देरी हो सकती है। अब अगर टैरिफ के संबंध में होने वाली बातचीत से कोई सकारात्म नतीजा आता है तभी बात बनेगी।
जय कोठारी के मुताबिक काफी अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में निवेशकों को अर्निंग में तुरंत किसी सुधार की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। अनुमान से अधिक अमेरिकी टैरिफ ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब अर्निंग अपग्रेड में और समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि एक रिपोर्ट से पता चलता है कि इस वर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी का जोखिम 40 फीसदी से बढ़कर 60 फीसदी हो गया है। अमेरिका इस ट्रेंड के लिए जिम्मेदार कारकों में से एक है।
उन्होंने कहा कि एक बड़ी चिंता यह है कि निरंतर प्रतिबंधात्मक व्यापार नीतियों और घटते बाहरी निवेश के कारण आपूर्ति लागत में स्थायी बढ़त हो सकती है, जिससे लॉन्ग टर्म में अमेरिकी विकास दर धीमी पड़ सकती है।
क्या आप मानते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ के प्रयोग से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नया स्वरूप देने में सफल होंगे?
टैरिफ़ का इस्तेमाल करने के पीछे का उद्देश्य निश्चित रूप से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है,लेकिन इन घोषणाओं से अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मंदी में जाने,उपभोग घटने और महंगाई बढ़ने का जोखिम हो सकता है। इस टैरिफ नीति से अमेरिका में आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ेगी। इसके साथ ही कम विकास के कारण महंगाई भी बढ़ सकती है। इससे अमेरिकी उपभोक्ता की क्रय शक्ति पर निगेटिव असर पड़ेगा। इस बात को ध्यान में रखते हुए हमे जल्दबाजी में प्रतिक्रिया करने की जरूरत नहीं। इसके बजाय स्थितियों को सेटल होने दें और फिर उसका बाद में विश्लेषण करें। टैरिफ पर बातचीत आगे बढ़ने पर स्थिति तेजी से बदल सकती है।
क्या आपको अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मंदी के बड़े संकेत दिख रहे हैं? दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में मंदी की क्या संभावना है?
ग्लोबल मीडिया में आई कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक इस वर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी का जोखिम 40% से बढ़कर 60% हो गया है। इस मंदी की मुख्य वजह अमेरिका ही है। उन्होंने आगे कहा कि एक बड़ी चिंता यह है कि निरंतर प्रतिबंधात्मक व्यापार नीतियों और घटते बाहरी निवेश के कारण आपूर्ति लागत में स्थायी बढ़त हो सकती है, जिससे लॉन्ग टर्म में अमेरिकी विकास दर धीमी पड़ सकती है। मोटे अनुमानों से पता चलता है कि अमेरिका में महंगाई 1.5 फीसदी बढ़ सकती है और जीडीपी में 0.50 से 1 फीसदी की गिरावट हो सकती है।
क्या आपको लगता है कि रियायती रिसीप्रोकल टैरिफ से भारत को नुकसान की बजाय फायदा होगा? क्या आपको आने वाले हफ़्तों में इन शुल्क दरों में किसी बदलाव की संभावना नज़र आती है?
सही रणनीति यही होगी कि भारत ख़ास तौर पर उन सेक्टरों में जहां उसे प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल है, टैरिफ डिफरेंशियल का फायदा उठाए। इसके साथ ही "चीन + 1" जैसी पहलों को और बढ़ावा देने की कोशिश करनी चाहिए। अगर इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाए तो अमेरिकी टैरिफ के चलते फैली अफरातफरी लंबी अवधि में भारत के लिए फायदेमंद हो सकती है। इसके अलावा,समय के साथ टैरिफ की दरों में बदलाव की संभावना है। इस बात को भी ध्यान में रखना चाहिए।
क्या आपको लगता है कि FY26 में निफ्टी 27,000 से ऊपर जाएगा?
बाजार का रिटर्न आम तौर पर नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ से जुड़ा होता है जिसके लगभग 11 फीसदी रहने की उम्मीद है। इस बात को ध्यान में रखते हुए चालू वित्तवर्ष में 16% रिटर्न की उम्मीद करना थोड़ा ज़्यादा हो सकता है। हालांकि,हमेशा की तरह निवेशकों को लंबी अवधि के निवेश पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह होगी। लंबी अवधि के निवेश आम तौर पर टैरिफ, COVID और भू-राजनीतिक मुद्दों जैसे शॉर्ट टर्म दबावों को कम करने में मदद करते हैं। बाजार से अच्छे पैसे बनाने के लिए कम से कम 3 साल का निवेश नजरिया रखें।
क्या आपको लगता है कि वित्त वर्ष 2026 में बैंकिंग सेक्टर में तेजी जारी रहेगी?
RBI द्वारा विभिन्न पहलुओं पर और अधिक छूट दिए जाने के बाद बैंक अब ग्रोथ पर फोकस कर सकते हैं,जो पहले इस सेक्टर के लिए सबसे बड़ा जोखिम था। अगरे अगले साल क्रेडिट ग्रोथ की दर 11% से 13-14% तक रहने पर बैंकिंग सेक्टर में तेजी देखने को मिल सकती है।
वित्त वर्ष 2026 में कौन से सेक्टर सबसे बेहतर प्रदर्शन करेंगे?
घरेलू अर्थव्यवस्था और बाजार पर ज्यादा निर्भर रहने वाले सेक्टरों में कम जोखिम नजर आ रहा है। खपत, घरेलू फार्मा, अस्पताल और डिस्क्रिशनरी खर्च जैसे सेक्टरों के अच्छा प्रदर्शन करने की संभावना है। लेकिन अंतिम सफलता की कुंजी बॉटम-अप स्टॉक सेलेक्शन में होगी,क्योंकि इन सेक्टरों की सभी कंपनियों एक तरफा तेजी नहीं होगी।
क्या आप वित्त वर्ष 2026 के लिए सोने पर बुलिश नजरिया रखते हैं?
सोना बढ़ती महंगाई, जीडीपी ग्रोथ में नरमी, भू-राजनीतिक तनाव और अनिश्चितता के दौरान अच्छा प्रदर्शन करता है। वर्तमान आर्थिक स्थितियां कुछ ऐसी ही हैं। इसलिए,वित्त वर्ष 2026 में सोने का प्रदर्शन अच्छा रहने की उम्मीद है।
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