कार्नेलियन एसेट मैनेजमेंट एंड एडवाइजर्स की स्वाति खेमानी का मानना है कि निवेशकों को अगले 3-6 महीनों में बाजार के कंसोलीडेट होने या उसमें करेक्शन आने के दौरान हाई क्वालिटी वाला पोर्टफोलियो बनाने पर फोकस करना चाहिए। उन्होंने मनीकंट्रोल के साथ हुए एक बातचीत में कहा,"बाजार 22,000-25,000 के दायरे में कंसोलीडेट हो सकता है। उम्मीद है कि यह कंसोलीडेशन अगले कुछ महीनों तक जारी रहेगा।"
कार्नेलियन के फाउंडर स्वाति खेमानी को उम्मीद है कि ऑटो एंसिलरी, मजबूत लाइबिलिटी फ्रेंचाइजी वाले क्रेडिट प्लेयर, बीमा, आईटी (ईआरएंडडी/एसएएएस), फार्मा (सीडीएमओ/सीआरओ) जैसे सेक्टर आगे अच्छा प्रदर्शन करेंगे। उनका मानना है कि नए साल में स्टॉक पिकर मार्केट देखने को मिलेगा यानी चुनिंदा क्वालिट शेयर ही अच्छा करते दिखेंगे। इक्विटी और कैपिटल मार्केट का 21 सालों से अधिक का अनुभव रखने वाली अनुभवी फाइनेंशियल एक्सपर्ट ने कहा, "हमारा यह भी मानना है कि केमिकल सेक्टर साल के अंतिम हिस्से में अच्छा प्रदर्शन करेगा।"
करेक्शन के दौरान हाई क्वालिटी पोर्टफोलियो बनाने पर रहे फोकस
इस बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि मीडियम से लेकर लॉन्ग टर्म नजरिए बाजार का मौजूदा करेक्शन अच्छा और हेल्दी है। किसी भी बुल रन में ऐसे करेक्शन जरूरी और स्वागत योग्य होते हैं क्योंकि ऐसे करेक्शन अनुशासित निवेश के महत्व और निवेश सिद्धांत की मजबूती को स्पष्ट करते हैं। स्वाति का मानना है कि निवेशकों को अगले 3-6 महीनों में बाजार के कंसोलीडेशन/करेक्शन के दौरान हाई क्वालिटी वाला पोर्टफोलियो बनाने पर फोकस करना चाहिए। इस समय सही सेक्टर की मजबूत प्रबंधन और फेयर वैल्यूएशन वाली कंपनी खोजने पर फोकस करें।
माइक्रोफाइनेंस कंपनिया पसंद नहीं
स्वाति ने बताया कि निवेश के नजरिए से उन्हे माइक्रोफाइनेंस कंपनिया पसंद नहीं हैं। वे आम तौर पर माइक्रोफाइनेंस, छोटे बैंकों से दूर रहती हैं। उनको बड़े बैंक और बड़े एनबीएफसी पसंद हैं।
कैपिटल मार्केट से जुड़े स्टॉक अच्छे
स्वाति मानना है कि इस साल ब्रॉडर मार्केट सिंगल से लेकर मिड-टीन्स (12-13 फीसदी) तक का रिटर्न दे सकता है, लेकिन चुनिंदा, स्टॉक स्पेसिफिक मौके हमेशा मौजूद रहेंगे। निफ्टी 22,000-25,000 के बीच कंसोलीडेट हो सकता है। उनको उम्मीद है कि यह कंसोलीडेशन अगले कुछ महीनों तक जारी रहेगा। स्वाति को कैपिटल मार्केट से जुड़े स्टॉक अच्छे लग रहे हैं। उनका मानना है कि मिड से लॉन्ग टर्म में शेयर अच्छा प्रदर्शन करते रहेंगे और यहां से इनमें काफी अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है।
ट्रंप की जीत भारत के लिए न्यूट्रल से पॉजिटिव
उनका मानना है कि भारतीय बाजार के लिए कोई बड़ा जोखिम नहीं है। जियो पोलिटिक्स, कैपिटल फ्लो और माइक्रोफाइनेंस असेट क्वालिटी से जुड़ी कुछ शॉर्ट टर्म दिक्कतें हो सकती हैं। लेकिन लंबे समय में इनसे इंडियन ग्रोथ स्टोरी के पटरी से उतरने की संभावना नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की जीत से जियो-पोलिटिक्स, ग्लोबल ट्रेड और अमेरिकी इकोनॉमी पर प्रभाव पड़ेगा। उन्हें लगता है कि अतीत में भारत के साथ ट्रंप के संबंधों को देखते हुए ट्रंप की जीत भारत के लिए न्यूट्रल से पॉजिटिव रह सकती है।
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