Daily Voice : साल 2024 बाजार के लिए रहेगा अच्छा, अब केमिकल सेक्टर में नजर आ रहे निवेश के मौके

Daily Voice : अमेरिका में ब्याज दरों पर यूएस फेड के संभावित रुख पर बाजार को उम्मीद है कि जून 2024 से यूएस में रेट कटौती शुरू होगी और सॉफ्ट लैंडिंग होगी। लेकिन देवांग मेहता की राय है कि ये कटौती इससे पहले शुरू हो सकती है। उन्होंने आगे कहा कि ग्लोबल महंगाई,ब्याज दरों में बढ़त और ज्योपोलिटिकल मुद्दे बाजार के लिए जोखिम बने हुए हैं। इसके अलावा बाजार के नए सिरे से तेजी पकड़ने को लिए विदेशी निवेशकों के निवेश में तेजी आने की जरूरत है

अपडेटेड Nov 27, 2023 पर 12:27 PM
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Daily Voice : देवांग ने कहा कि भारतीय इक्विटी मार्केट कंपनियों के अच्छे प्रदर्शन और सुधरती ग्लोबल मैक्रो स्थितियों के दम पर मजबूत बना रहेगा। साल 2024 बाजार के लिए एक अच्छा साल रहेगा

Daily Voice : महंगाई घटने और ब्याज दरों में बढ़त के अंतिम दौर में होने के साथ ही कैलेंडर ईयर 2023 में ग्लोबल ग्रोथ में गिरावट थमने और कैलेंडर ईयर 2024 से इसके तेजी पकड़ने की उम्मीद दिख रही है। ये बातें स्पार्क कैपिटल प्राइवेट वेल्थ मैनेजमेंट देवांग मेहता ने मनीकंट्रोल के साथ हुए एक साक्षात्कार में कही हैं। मेहता का मानना है कि इक्विटी बाजार ये मानकर चल रहा है कि ब्याज दरों में गिरावट आएगी। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही इसकी पुष्टि हो जाएगी।

उन्होंने आगे कहा कि पिछले कुछ हफ़्तों में इक्विटी बाज़ार का रंग-ढ़ंग बदल गया है। दूसरी तिमाही में कंपनियों के मुनाफे और मार्जिन के आंकड़े काफी अच्छे रहे हैं। इसके अलावा कंपनियों के मैनेजमेंट की टप्पणियां भी अच्छी रही हैं। जिसका बाजार पर अच्छा असर देखने को मिला है। ऐसे में आगे बाजार नए हाई लगाने की कोशिश कर सकता है। इक्विटी और कैपिटल मार्केट का 23 सालों से ज्यादा का अनुभाव रखने वाले देवांग मेहता का कहना है कि घरेलू और विदेशी दोनों निवेशक इस बात को लेकर सहमत हैं कि भारतीय बाजार दूसरे उभरते बाजारों की तुलना में अच्छे लग रहे हैं।

अमेरिका में ब्याज दरों पर यूएस फेड के संभावित रुख पर बाजार को उम्मीद है कि जून 2024 से यूएस में रेट कटौती शुरू होगी और सॉफ्ट लैंडिंग होगी। लेकिन देवांग मेहता की राय है कि ये कटौती इससे पहले शुरू हो सकती है। उन्होंने आगे कहा कि ग्लोबल महंगाई,ब्याज दरों में बढ़त और ज्योपोलिटिकल मुद्दे बाजार के लिए जोखिम बने हुए हैं। इसके अलावा बाजार के नए सिरे से तेजी पकड़ने को लिए विदेशी निवेशकों के निवेश में तेजी आने की जरूरत है।


चुनिंदा केमिकल शेयर लंबे नजरिए से निवेश के लिए अच्छे

केमिकल शेयरों पर बात करते हुए देवांग ने कहा कि वित्त वर्ष 2019 से वित्त वर्ष 2022 तक केमिकल सेक्टर की सफलता का श्रेय मुख्य रूप से चीन+1 फैक्टर और स्पेशियलिटी केमिकल की मांग में तेजी को जाता है। हालांकि, पिछले एक साल में डीस्टॉकिंग और चीन की तरफ से होने वाली डंपिंग केमिकल शेयरों के लिए परेशानी का कारण बन गए हैं।

एग्रोकेमिकल्स में डीस्टॉकिंग अप्रैल-जून के दौरान शुरू हो गई थी। जबकि डाई, पिगमेंट और पॉलिमर जैसे सेक्टरों में कम मांग और उच्च ब्याज दरों के कारण जनवरी-मार्च में डीस्टॉकिंग शुरू हुई थी। पिछले साइकिलों को ध्यान में रखते हुए देखें तो अगले एक से दो तिमाहियों तक जेनेरिक एग्रोकेमिकल्स और फार्मास्यूटिकल्स में डीस्टॉकिंग जारी रहने की उम्मीद है। जबकि दूसरो एंड यूजर इंडस्ट्री का स्टॉक काफी घट गया है। अब इनकी तरफ से कंमिकल्स की मांग आने की उम्मीद दिख रही है।

जुलाई-सितंबर के दौरान एग्रो-केमिकल और फार्मा में नोवेल मॉलीक्यूल्स की मजबूत मांग देखने को मिली है। मैनेजमेंट के गाइडेंस से संकेत मिलता है कि इन सेक्टरों की डीस्टॉकिंग वित्त वर्ष 2024 की तीसरी तिमाही तक समाप्त हो सकती है। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2024 की चौथी तिमाही से बिक्री में बढ़त के शुरुआती संकेत मिल सकते हैं। केमिकल सेक्टर 3 साल के नजरिए से निवेश के लिए अच्छा लग रहा है लेकिन चुनिंदा क्वालिटी शेयरों पर ही दांव लगाने की सलाह होगी।

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क्या आपको उम्मीद है कि 2024 बाज़ार और अर्थव्यवस्था के लिए इस साल की तुलना में कहीं बेहतर साल रहेगा? इसके जवाब में देवांग ने कहा कि भारतीय इक्विटी मार्केट कंपनियों के अच्छे प्रदर्शन और सुधरती ग्लोबल मैक्रो स्थितियों के दम पर मजबूत बना रहेगा। साल 2024 बाजार के लिए एक अच्छा साल रहेगा।

अगले महीने होने वाली मॉनीटरी पॉलीसी कमेटी की बैठक पर बात करते हुए देवांग ने कहा कि अगली एमपीसी की बैठक 6-8 दिसंबर को होने वाली है। इसमें यथास्थिति बरकरार रहने की उम्मीद है। एमपीसी ने आखिरी बार फरवरी 2023 में अपनी बैठक में दरों को 25 बेसिस प्लाइंट बढ़ाकर 6.50 फीसदी कर दिया था। अक्टूबर की बैठक लगातार चौथी बैठक थी जिसमें एमपीसी ने रेपो दर पर यथास्थिति बनाए रखने का फैसला किया था। हालांकि, मध्य पूर्व की स्थिति और अमेरिका में महंगाई के कम होने की पृष्ठभूमि में आरबीआई गवर्नर के लहजे और टिप्पणी पर बाजार की नजरें रहेंगी।

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