BFSI, कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी, फार्मास्यूटिकल्स, कमोडिटीज और पावर (विशेष रूप से रिन्यूएबल एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर) ऐसे माइक्रो सेक्टर हैं जिनमें आगे ग्रोथ की उम्मीद है। निवेश के नजरिए से इन पर विचार किया जाना चाहिए। हमें अगले कुछ सालों के जरिए के साथ पोर्टफोलियो का निर्माण करना चाहिए। ये बातें इक्वेंटिस वेल्थ एडवाइजरी सर्विसेज के सीआईओ जसप्रीत सिंह अरोड़ा ने मनीकंट्रोल को दिए गए एक साक्षात्कार में कही हैं।
2025 के लिए कॉन्ट्रेरियन बेट्स पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि मेटल,सीमेंट,केमिकल और एनबीएफसी जैसे सेक्टर जिन्होंने हाल के वर्षों में कमजोर प्रदर्शन किया है,अब अच्छे प्रदर्शन के लिए तैयार हैं। अच्छे खासे करेक्शन के बाद इनका वैल्यूशन काफी अच्छा हो गया है। आगे इन सेक्टरों में तेजी देखने को मिल सकती है। जसप्रीत की राय है हमारे इक्विटी बाजारों को अमेरिकी टैरिफ की बहुत ज्यादा चिंता नहीं है।
क्या आपको लगता है कि अगर वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही के नतीजे निराश करते हैं तो मौजूदा रैली खत्म हो सकती है?
इसके जवाब में जसप्रीत ने कहा कि मौजूदा रैली को सिर्फ़ आय ही नहीं चला रही है। वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही के लिए बेहतर उम्मीद जैसे कई कारक इसमें भूमिका निभाएंगे,लेकिन यह इस पहेली का एक हिस्सा है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में गिरावट, इमर्जिंग मार्केट के शेयरों और कमोडिटीज में जोश भर सकती है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से महंगाई का दबाव कम हो सकता है। इससे लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टरों को लाभ हो सकता है।
केंद्रीय बैंकों द्वारा आगे में ब्याज दरों में कटौती की बढ़ती उम्मीदें क्रेडिट ग्रोथ और निवेश के लिए ज्यादा बेहतर माहौल तैयार करेंगी, जिससे आर्थिक विकास और कॉर्पोरेट आय में बढ़त देखने को मिल सकती है। इस रैली से पहले स्टॉक्स की कीमतों में आई भारी गिरावट के कारण कई स्टॉक अच्छे भाव पर मिल रहे हैं। जिसके कारण बाजार में तेजी आई है।
अगर आप अभी कुछ सालों के नजरिए से पोर्टफोलियो बना रहे हैं, तो आप कहां दांव लगाएंगे?
अगर हम कुछ सालों के नजरिए से पोर्टफोलियो बना रहे हैं तो आपको मजबूत फाइनेंशियल और उच्च विकास क्षमता वाली कंपनियों को प्राथमिकता देने का सुझाव होगा। BFSI, कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी, फार्मास्यूटिकल्स, कमोडिटीज और पावर (विशेष रूप से रिन्यूएबल एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर) ऐसे माइक्रो सेक्टर हैं जिनमें आगे ग्रोथ की उम्मीद है। निवेश के नजरिए से इन पर विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, निवेश में हमेशा जोखिम शामिल होता है,इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले गहन शोध और वित्तीय सलाह जरूरी है।
क्या भारतीय बाजार इस समय अमेरिकी टैरिफ को लेकर चिंतित हैं?
इस पर जसप्रीत ने कहा कि भारतीय बाजार अमेरिकी टैरिफ को लेकर कम चिंतित हैं। पिछले छह महीनों में सबसे बड़ी चिंताएं अर्निंग ग्रोथ में गिरावट, रुपये में कमजोरी,हाई वैल्यूएशन और विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा की जाने वाली लगातार बिकवाली रही है। इन आंतरिक कारणों ने मार्केट सेंटीमेंट को अमेरिकी टैरिफ जैसे बाहरी खतरे से कहीं ज़्यादा प्रभावित किया है। अमेरिकी टैरिफ कुछ खास सेक्टरो और इंडस्ट्री को हीप्रभावित कर सकते हैं। बाज़ार की चाल पर घरेलू आर्थिक स्थितियों और भारतीय कंपनियों के प्रदर्शन का ज्यादा असर होगा।
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