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Daily Voice: महंगा वैल्यूएशन बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता, घरेलू खपत से जुड़े शेयरों पर लगाएं दांव- अजय त्यागी

ऑटो सेक्टर पिछले 5 सालों से अंडरपरफॉर्मर रहा है। ऑटो सेक्टर एक साइक्लिकल सेक्टर है। ऐसे में 5 साल की गिरावट के बाद अब इसमें अच्छी तेजी की उम्मीद नजर आ रही है। मीडियम टर्म के नजरिए से देखें तो अगले कुछ सालों तक इस सेक्टर में पेंटअप डिमांड के कारण अच्छी ग्रोथ देखने को मिल सकती है

Edited By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Oct 08, 2022 पर 2:05 AM
Daily Voice: महंगा वैल्यूएशन बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता, घरेलू खपत से जुड़े शेयरों पर लगाएं दांव- अजय त्यागी
आईटी सेक्टर पर बात करते हुए अजय त्यागी ने कहा कि वर्तमान समय में टेक्नोलॉजी का महत्व बढ़ गया है। आईटी सेक्टर पर होने वाला खर्च कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए अनिवार्य हो गया है

UTI AMC के हेड ऑफ इक्विटी और फंड मैनेजर अजय त्यागी ( Ajay Tyagi) ने देश की अर्थव्यवस्था और बाजार की संभावनाओं पर मनीकंट्रोल के साथ लंबी बातचीत की। इस बातचीत में उन्होंने कहा कि UTI AMC ऐसे सेक्टरों को लेकर बुलिश हैं जो घरेलू खपत पर आधारित हैं और जिनको देश की बढ़ती प्रति व्यक्ति आय से फायदा मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने इस बातचीत में आगे कहा कि UTI AMC कंज्यूमर स्टेपल्स, कंज्यूमर डिस्क्रीशनरी और कंज्यूमर ड्युरेबल्स शेयरों पर लंबे नजरिए से बुलिश है। कैपिटल मार्केट का दो दशकों से ज्यादा का अनुभव रखने वाले अजय त्यागी का मानना है कि बाजार अपने 1 ईयर फॉरवर्ड वैल्यूएशन के के लॉन्ग टर्म एवरेज से 10 से 15 फीसदी प्रीमियम पर कारोबार कर रहा है। यही वह कारण है कि जो बाजार में किसी गिरावट के लिए ट्रिगर का काम कर सकता है और बाजार एक बार फिर जून के निचले स्तर पर आ सकता है। इसके अलावा ग्लोबल जियोपॉलिटिकल स्थितियों से जुड़े जोखिम और पयार्वरण से जुड़ी मुश्किलों का असर भी भारत सहित तमाम उभरते बाजार पर देखने को मिल सकता है।

इस बातचीत में अजय त्यागी ने आगे कहा कि घरेलू डिमांड की स्थिति काफी मजबूत बनी हुई है। लेकिन धीमी पड़ती ग्लोबल ग्रोथ के कारण इस पर कुछ प्रभाव पड़ सकता है। आने वाली तिमाहियों में अमेरिका की मौद्रिक नीतियों में और कड़ाई आने की संभावना के चलते हमारे एक्सपोर्ट पर कुछ निगेटिव असर देखने को मिल सकता है। जिससे जीडीपी में गिरावट मुमकिन है।

ब्याज दर पर आरबीआई की नीति से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए अजय त्यागी ने कहा कि आरबीआई अपनी नीति दरों को 6.5 फीसदी के आसपास ला सकता है। हालांकि इसका अंदाजा लगाने के लिए हमने यूएस फेड के कदम और रुपये पर पड़ने वाले इसके प्रभाव पर नजर रखनी होगी।

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