Daily Voice:बाजार के लिए महंगाई करेगी सबसे बड़ा खेल बिगाड़ने वाला काम- शैलेंद्र कुमार

शैलेंद्र कुमार ने आगे कहा कि मेटल सेक्टर में आई हालिया गिरावट की अहम वजह ग्लोबल मेटल प्राइस में आई भारी गिरावट थी। अगर वर्तमान लेवल के आसपास ग्लोबल मेटल प्राइस स्थिर होते नजर आते हैं तो फिर हमें मेटल कंपनियों में कैश फ्लो बढ़ता दिखेगा और मेटल स्टॉक में हमें एक बार फिर रैली आती दिखेगी।

अपडेटेड Dec 14, 2021 पर 11:41 AM
शैलेंद्र कुमार ने कहा कि अक्टूबर में रिकॉर्ड हाई छूने के बाद बाजार में करेक्शन का दौर शुरु हुआ है और यह अगले कुछ महीनों तक जारी रह सकता है। इस करेक्शन के बाद बाजार एक बार फिर अगली तेजी के लिए तैयार होगा।

बाजार की आगे की दशा और दिशा पर Narnolia Financial Advisors के शैलेंद्र कुमार ने मनीकंट्रोल से खास बातचीत की। इस बातचीत में उन्होंने कहा कि अक्टूबर में रिकॉर्ड हाई छूने के बाद भारतीय इक्विटी बाजार करेक्शन के दौर चला गया है और यह जब तक रैली के अगले चरण की शुरुआत नहीं होती कुछ महीनों तक इसी मोड में रहेगा।

शैलेंद्र कुमार महंगाई में तेजी के ट्रेन्ड को लेकर चितिंत नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाजार के लिए महंगाई आगे सबसे निगेटिव फैक्टर साबित होगी। उन्होंने कहा 2022 में महंगाई ही हमारी सबसे बड़ी चिंता बनी रहेगी। अगर इसमें इसी तरह की बढ़ोतरी जारी रहती है तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी जिससे बाजार के वैल्यूएशन में भी गिरावट आएगी।

जब शैलेंद्र कुमार से पूछा गया कि क्या यूनियन बजट के पहले बाजार रिकॉर्ड छुएगा तब उन्होंने कहा कि बाजार के प्राइस स्ट्रक्चर में कुछ थकावट के संकेत दिख रहे हैं। पिछले अधिकांश तेजी के दौर में 6 से 7 ऐसे करेक्शन के दौर देखने को मिले थे जब बाजार 10-20 फीसदी टूटा था। 2002-2008 और 2013-2018 के तेजी के दौर इसके उदाहरण है। इसलिए वर्तमान के बुल मार्केट में बीच-बीच में आनेवाले इस तरह के प्राइस करेक्शन स्वाभाविक हैं।


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बाजार में 2020 के मध्य से शुरु हुआ वर्तमान तेजी का दौर एक नजरिए से खास रहा है और वह यह है कि अब तक इस बुल मार्केट में कोई बहुत बड़ा करेक्शन नहीं आया है जबकि इस अवधि में निफ्टी ने 100 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न दिया है।

उन्होंने आगे कहा कि अक्टूबर में रिकॉर्ड हाई छूने के बाद बाजार में करेक्शन का दौर शुरु हुआ है और यह अगले कुछ महीनों तक जारी रह सकता है। इस करेक्शन के बाद बाजार एक बार फिर अगली तेजी के लिए तैयार होगा।

कोरोना के नए वेरिएंट ओमीक्रोन के बाजार पर प्रभाव पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि जिन देशों में ओमीक्रोन के बड़े मामले मिले है वहां भी इकोनॉमी में बहुत ज्यादा उथल-पुथल नहीं देखने मिला है। इसको ध्यान में रखते हुए हम कह सकते हैं कि कोरोना के किसी नए वेरिएंट का अब इकोनॉमी पर सीमित प्रभाव होगा।

किन सेक्टर्स पर रहें नजर ? इस पर बात करते हुए शैलेंद्र कुमार ने आगे कहा कि मेटल सेक्टर में आई हालिया गिरावट की अहम वजह ग्लोबल मेटल प्राइस में आई भारी गिरावट थी। अगर वर्तमान लेवल के आसपास ग्लोबल मेटल प्राइस स्थिर होते नजर आते हैं तो फिर हमें मेटल कंपनियों में कैश फ्लो बढ़ता दिखेगा और मेटल स्टॉक में हमें एक बार फिर रैली आती दिखेगी। लेकिन उन्होंने इस बातचीत में आगे कहा कि वह बैंकिंग शेयरों को लेकर ज्यादा आशावादी हैं। बैंकिंग सेक्टर,एसेट क्वालिटी की चिंता से काफी हद तक मुक्त हो चुका है। डिजिटलीकरण से फोकस से इनकी लागत में भी कमी आई है। इंडिया इंक के कैपिटलाइजेशन में बढ़त के साथ ही बैंकिंग सेक्टर में हमें और मजबूती आती दिखेगी और अगले 6-12 महीने में बैंकिंग स्टॉक जोरदार प्रदर्शन करते नजर आएंगे।

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