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Dalal Street Week Ahead: तेजी या गिरावट? किस ओर बढ़ेगा बाजार; RBI MPC मिनट्स, तेल कीमत, FII Flow समेत 10 अहम फैक्टर्स से होगा तय

बीते सप्ताह में BSE Sensex 2.37 प्रतिशत बढ़ा और 71,605 के रिकॉर्ड उच्च स्तर को छूने के बाद 71,483 पर बंद हुआ। दलाल स्ट्रीट में आम सहमति यह है कि विदेशी निवेशक जोरदार वापसी कर रहे हैं। आगे चलकर उनकी ओर से भारतीय शेयरों की खरीदारी बढ़ने की उम्मीद है। सकारात्मक वैश्विक और घरेलू संकेत, इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि शेयर बाजार की रैली जारी रह सकती है

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Dec 17, 2023 पर 4:27 PM
Dalal Street Week Ahead: तेजी या गिरावट? किस ओर बढ़ेगा बाजार; RBI MPC मिनट्स, तेल कीमत, FII Flow समेत 10 अहम फैक्टर्स से होगा तय
बीता सप्ताह मुख्य रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व के पॉलिसी रेट्स पर रुख से प्रभावित था।

Dalal Street Week Ahead: भारतीय बाजारों में लगातार सात सप्ताह तक तेजी देखी गई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि क्या यह तेजी आने वाले सप्ताह में भी बरकरार रहेगी। विशेषज्ञों के अनुसार सकारात्मक वैश्विक और घरेलू संकेत, इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि रैली जारी रह सकती है। इन संकेतों में अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व का नरम रुख, FII की ओर से शेयर खरीदारी, बेहतर मैक्रो डेटा शामिल हैं। हालांकि कुछ कंसोलिडेशन से इनकार नहीं किया जा सकता है। बीते सप्ताह में बीएसई सेंसेक्स 2.37 प्रतिशत बढ़ा और 71,605 के रिकॉर्ड उच्च स्तर को छूने के बाद 71,483 पर बंद हुआ।

निफ्टी 50 2.32 प्रतिशत बढ़ा और 21,492.30 के नए ​रिकॉर्ड हाई को छूने के बाद 21,456 पर बंद हुआ। अब 18 दिसंबर से शुरू हो रहे नए सप्ताह में कौन से फैक्टर्स शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे, आइए जानते हैं...

बैंक ऑफ जापान मॉनेटरी पॉलिसी

बीता सप्ताह मुख्य रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व के पॉलिसी रेट्स पर रुख से प्रभावित था। कहा जा रहा कि अब ध्यान 19 दिसंबर को बैंक ऑफ जापान के नीतिगत फैसले पर रहेगा। स्वास्तिका इनवेस्टमार्ट के रिसर्च हेड संतोष मीणा का कहना है कि यह विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जापानी येन मजबूत हो रहा है। बैंक ऑफ जापान की ओर से किसी भी तरह की सख्ती से येन कैरी ट्रेड खत्म होने का जोखिम पैदा हो सकता है। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जापान का केंद्रीय बैंक इस साल का अंत दुनिया के सबसे नरम बैंकों में से एक के रूप में कर सकता है। कमजोर खपत जैसे फैक्टर्स के चलते, बैंक ऑफ जापान से व्यापक रूप से अपनी बेहद ढीली मौद्रिक नीति बरकरार रखने की उम्मीद है।

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