Defence Stocks: ईरान युद्ध गहराया, फिर भी नहीं बढ़ रहे डिफेंस स्टॉक; जानिए तीन बड़े कारण
Defence Stocks: अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के बावजूद डिफेंस शेयरों में तेजी नहीं दिख रही। निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स दो दिनों में 2 प्रतिशत से ज्यादा गिरा है। एक्सपर्ट्स से जानिए किन तीन बड़े कारणों से डिफेंस स्टॉक्स में तेजी नहीं दिख रही।
डिफेंस शेयरों में यह सुस्ती ऐसे समय में दिख रही है जब भारत का रक्षा निर्यात लगातार बढ़ रहा है।
Defence Stocks: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद गुरुवार को डिफेंस शेयरों में खास तेजी देखने को नहीं मिली। निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स लगातार दूसरे सत्र में गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। पिछले दो ट्रेडिंग सेशंस में यह इंडेक्स 2 प्रतिशत से ज्यादा टूट चुका है।
गुरुवार के कारोबार में इंडेक्स के 18 में से सिर्फ 5 शेयर ही हरे निशान में थे, जबकि बाकी शेयर गिरावट में ट्रेड कर रहे थे। Dynamatic Technologies और Paras Defence and Space Technologies जैसे शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी दिखी।
निर्यात बढ़ा, फिर भी शेयर ठंडे क्यों
दिलचस्प बात यह है कि डिफेंस शेयरों में यह सुस्ती ऐसे समय में दिख रही है जब भारत का रक्षा निर्यात लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2025 में भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर 23,600 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। सरकार ने वित्त वर्ष 2029 तक इसे 50,000 करोड़ रुपये तक ले जाने का टारगेट रखा है। इससे साफ है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय रक्षा उपकरणों की मांग बढ़ रही है।
मध्य पूर्व के कई देश जैसे सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और बहरीन आम तौर पर भू राजनीतिक तनाव के समय अपना रक्षा बजट बढ़ा देते हैं। एनालिस्टों का अनुमान है कि अगर इन देशों के रक्षा बजट में 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है, तो भारत जैसे उभरते सप्लायर्स के लिए 25,000 से 40,000 करोड़ रुपये तक के अतिरिक्त निर्यात अवसर बन सकते हैं।
पहले जैसे क्यों नहीं भाग रहे डिफेंस शेयर
रूस यूक्रेन युद्ध या ऑपरेशन सिंदूर जैसे पिछले संघर्षों के दौरान डिफेंस शेयरों में तेज तेजी देखने को मिली थी। लेकिन इस बार अब तक ऐसा नहीं हुआ है। इसके पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं।
1. तेजी से बदल रही युद्ध की तकनीक
अमेरिका, इजरायल और ईरान से जुड़े मौजूदा संघर्ष में युद्ध का तरीका काफी बदल चुका है। अब कम कीमत वाले हथियार भी युद्ध में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। Choice Institutional Equities की रिपोर्ट के मुताबिक, Shahed जैसे लोइटरिंग म्यूनिशन ड्रोन की कीमत करीब 20,000 डॉलर होती है। लेकिन इन्हें रोकने के लिए कई बार ऐसे एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल करना पड़ता है जिनकी कीमत लाखों डॉलर तक हो सकती है।
यही वजह है कि अब किफायती काउंटर ड्रोन सिस्टम, मल्टी लेयर एयर डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम की मांग तेजी से बढ़ रही है। एनालिस्टों के मुताबिक, Bharat Electronics (रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर), Bharat Dynamics (मिसाइल सिस्टम), Data Patterns (मिशन क्रिटिकल इलेक्ट्रॉनिक्स) और Zen Technologies (काउंटर ड्रोन सिस्टम) जैसी भारतीय कंपनियां भविष्य में निर्यात के अवसरों से फायदा उठा सकती हैं।
2. अब निवेशकों का फोकस एक्जीक्यूशन पर
एक्सपर्ट्स का कहना है कि डिफेंस कंपनियों के पास ऑर्डर बुक मजबूत है और नए ऑर्डर मिलने की संभावना भी अच्छी है। लेकिन अब निवेशकों का ध्यान सिर्फ ऑर्डर पर नहीं, बल्कि उन्हें पूरा करने की क्षमता पर है।
Fisdom के हेड ऑफ रिसर्च निरव आर करकेरा के मुताबिक पहले के संघर्षों के दौरान डिफेंस शेयरों में तेजी का बड़ा कारण लिक्विडिटी और मोमेंटम था। अब बाजार पहले ही ऑर्डर बुक और मांग को कीमतों में शामिल कर चुका है। इसलिए निवेशक अब कंपनियों से मजबूत एक्जीक्यूशन और बेहतर मुनाफे के साथ डिलीवरी देखना चाहते हैं।
3. सप्लाई चेन की समस्या भी चिंता
ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal का मानना है कि सप्लाई चेन से जुड़ी समस्याएं भी डिफेंस शेयरों पर दबाव डाल सकती हैं। कई रक्षा प्लेटफॉर्म के लिए जरूरी खास कंपोनेंट्स और आयातित सब सिस्टम की उपलब्धता में दिक्कत आने से प्रोजेक्ट्स की टाइमलाइन प्रभावित हो सकती है।
लंबी अवधि में सेक्टर पर भरोसा
मौजूदा कमजोरी के बावजूद एनालिस्ट लंबे समय के लिए डिफेंस सेक्टर को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं। Religare Broking के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्रा का कहना है कि डिफेंस शेयरों की लंबी अवधि की तस्वीर अभी भी मजबूत बनी हुई है।
उनके मुताबिक सेक्टर में अगली तेजी की नींव तैयार हो चुकी है। फिलहाल नकारात्मक सेंटिमेंट की वजह से तेजी सीमित दिखाई दे रही है। उन्होंने निवेशकों को सलाह दी है कि इस दौर का इस्तेमाल मजबूत कमाई क्षमता और सही वैल्यूएशन वाले अच्छे डिफेंस शेयरों को धीरे धीरे जमा करने के लिए किया जा सकता है।
Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।