Defence Stocks: वैश्विक इंवेस्टमेंट बैंकिंग फर्म गोल्डमैन सैक्स ने जहाज बनाने वाली दो कंपनियों मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (Mazagon Dock Shipbuilders) और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स (Garden Reach Shipbuilders) की कवरेज शुरू की है। ब्रोकरेज फर्म ने तीन वजहों से इन दोनों स्टॉक्स को सेल रेटिंग दी है। इसका आज दोनों के शेयरों पर भी दिखा। फिलहाल बीएसई पर मझगांव डॉक के शेयर 3.29% की गिरावट के साथ ₹1931.75 और गार्डन रीच के शेयर 2.95% की फिसलन के साथ ₹1962.90 पर हैं। गोल्डमैन के मुताबिक मझगांव डॉक के शेयर ₹1,855 और गार्डन रीच ₹1,515 तक टूट सकते हैं।
ओवरऑल बात करें तो गार्डन रीच को कवर करने वाले 11 एनालिस्ट्स में से 7 ने इसे खरीदारी, 2 ने होल्ड और 2 ने सेल रेटिंग दी है। वहीं मझगांव डॉक को कवर करने वाले 16 एनालिस्ट्स में से 8 ने खरीदारी. 3 ने होल्ड और 5 ने सेल रेटिंग दी है।
Defence Stocks: 3 वजहों से Mazagon Dock और Garden Reach पर बेयरेश गोल्डमैन
गोल्डमैन के मुताबिक पहली वजह तो ये है कि मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स की व्हाइट स्पेसेज में अहम मौजूदगी नहीं है यानी कि गोल्डमैन की अहम चिंता ये है कि दोनों कंपनियों के पास भविष्य में तेजी से बढ़ने के लिए नए कारोबार के पर्याप्त मौके नहीं दिख रहे हैं।
दूसरी वजह गोल्डमैन सैक्स का यह अनुमान है कि दोनों कंपनियों का ईबीआईटीडीए वित्त वर्ष 2029 तक लगभग 19.3% CAGR की दर से घट सकता है, जबकि ब्रोकरेज फर्म ऐरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर की जिन दूसरी कंपनियों को कवर कर रही है, उसके लिए अनुमान 26% सीएजीआर का है।
तीसरी वजह गोल्डमैन के मुताबिक दोनों कंपनियों का वैल्यूएशन शेयरों के मौजूदा भाव की तुलना में अधिक है और इनका ऑर्डर बुक भी कम है तो वैश्विक शिपबिल्डर्स की तुलना में इनके ग्रोथ की संभावना कमजोर है।
क्या है देश के शिपबिल्डिंग सेक्टर की दिक्कत
गोल्डमैन की रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक शिपबिल्डिंग मार्केट में भारत की हिस्सेदारी 1% से भी कम है। वहीं घरेलू मार्केट में बात करें तो डिफेंस और मिलिट्री जहाजों की 75% हिस्सेदारी है, जबकि वैश्विक मार्केट में इनकी हिस्सेदारी 22% है। ऐसे में गोल्डमैन के मुताबिक घरेलू शिपबिल्डिंग सेक्टर में उठा-पटक दिखती है। सरकारी बजट और नए ऑर्डर बढ़े तो सेक्टर को सपोर्ट मिलता है तो घरेलू शिपबिल्डिंग कंपनियों की दिक्कत कुछ ही ग्राहकों पर अधिक निर्भरता है। इसके अलावा काम पूरा करने में लगने वाले लंबे समय से भी कमाई पर असर पड़ता है।
इसके अलावा गोल्डमैन का कहना है कि डिफेंस ऑर्डर्स ग्राहकों से एडवांस लेकर फिक्स्ड प्राइस और कॉस्ट-प्लस मॉडल पर काम करते हैं, जिससे लागत में उछाल से इनके मार्जिन को झटका लगने की आशंका रहती है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि मझगांव डॉक और गार्डन रीच के बड़े प्रोजेक्ट्स अब पूरे होने की कगार पर हैं, जिसके साथ ही इसका ट्रेलिंग बुक-टू-बिल निचले स्तर पर आ गए।
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