अमेरिकी कंपनी Yum Brands, पिज्जा हट को बेच रही है। इसके लिए 2 डील हो रही हैं। लगभग 1.5 अरब डॉलर की एक डील प्राइवेट इक्विटी फर्म लॉन्ग रेंज कैपिटल (LongRange Capital) के साथ होगी। इसके दायरे में मेनलैंड चाइना के पिज्जा हट आउटलेट नहीं आएंगे। उन्हें Yum China एक अलग डील में लगभग 1.2 अरब डॉलर में खरीदेगी। पिज्जा हट बिजनेस काफी टाइम से संघर्ष कर रहा है। इसकी वजह से Yum Brands की फाइनेंशियल परफॉर्मेंस प्रभावित हुई है। पिज्जा हट की प्रतिद्वंद्वी Domino’s Pizza ने मार्केट शेयर हथिया लिया है।
पिज्जा हट के बिकने की खबर आने के बाद भारत में देवयानी इंटरनेशनल लिमिटेड और सफायर फूड्स इंडिया लिमिटेड के शेयरों में गिरावट आई। ये दोनों कंपनियां भारत में KFC और पिज्जा हट का बिजनेस फ्रेंचाइजी बेस्ड मॉडल पर चलाती हैं। दोनों का शेयर दिन में BSE पर पिछली क्लोजिंग से लगभग 2 प्रतिशत तक टूटा। बाद में देवयानी इंटरनेशनल का शेयर 0.61 प्रतिशत गिरावट के साथ 113.45 रुपये पर सेटल हुआ। वहीं सफायर फूड्स का शेयर मामूली बढ़त के साथ 181.90 रुपये पर सेटल हुआ।
डैन और फ्रैंक कार्नी भाइयों ने 1958 में विचिटा, कंसास में पिज्जा हट की शुरुआत की थी। एक साल बाद, वे इस कॉन्सेप्ट की फ्रेंचाइजिंग करने लगे। 1969 में पिज्जा हट पब्लिक हो गई। इसके बाद सिर्फ दो साल में यह दुनिया की सबसे बड़ी पिज्जा चेन बन गई। हालांकि 2017 में Domino’s ने उससे यह खिताब छीन लिया।
Devyani International ओर Sapphire Foods का मर्जर
सफायर फूड्स इंडिया, देवयानी इंटरनेशनल में विलय करने वाली है। दोनों कंपनियों के बोर्ड ने एक स्कीम ऑफ अरेंजमेंट को मंजूरी दे दी है। इस विलय के बाद KFC और पिज्जा हट के लिए एक सिंगल यूनिफाइड Yum! India फ्रेंचाइजी क्रिएट होने की बात कही गई। अभी इस विलय पर सभी जरूरी रेगुलेटरी और कानूनी मंजूरियां लिया जाना बाकी है। हालांकि इस विलय की घोषणा पिज्जा हट की बिक्री की घोषणा से पहले हुई थी। ऐसे में देखना यह है कि पिज्जा हट पर Yum Brands के नए फैसले से देवयानी इंटरनेशनल और सफायर फूड्स इंडिया के KFC और पिज्जा हट फ्रेंचाइजी बिजनेस के लिए कुछ बदलता है या नहीं।
स्कीम ऑफ अरेंजमेंट के तहत शेयरहोल्डर्स को सफायर फूड्स इंडिया के हर 100 इक्विटी शेयरों के बदले देवयानी इंटरनेशनल के 177 इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। इसके अलावा देवयानी इंटरनेशनल ग्रुप की कंपनी आर्कटिक इंटरनेशनल, सफायर फूड्स के मौजूदा प्रमोटरों से कंपनी की पेड-अप इक्विटी शेयर कैपिटल का लगभग 18.5 प्रतिशत हिस्सा खरीदेगी। साथ ही, उसके पास इसे आपसी सहमति वाले फाइनेंशियल इनवेस्टर को सौंपने का विकल्प भी होगा।
पिज्जा हट की बिक्री से Yum Brands को 2.3 अरब डॉलर की शुद्ध कमाई
सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर 2025 में Yum Brands ने कहा था कि वह पिज्जा हट के लिए रणनीतिक विकल्पों पर विचार कर रही है। अब घोषित हुईं दोनों डील्स से यम ब्रांड्स को टैक्स, क्लोजिंग एडजस्टमेंट और फीस के बाद लगभग 2.3 अरब डॉलर की शुद्ध कमाई होने की उम्मीद है। इसमें LongRange से 2030 तक संभावित 7.5 करोड़ डॉलर का अर्नआउट शामिल नहीं है। यम ब्रांड्स को बाकी बचे 2026 में इन डील्स से जुड़े एकमुश्त खर्च लगभग 8.5 करोड़ डॉलर रहने का अनुमान है।
कंपनी का मैनेजमेंट 30 जुलाई को Yum की दूसरी तिमाही की कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान डील के वित्तीय असर के बारे में और जानकारी देगा। Yum को उम्मीद है कि रेगुलेटरी मंजूरी मिलने के बाद तीसरी तिमाही में बिक्री पूरी हो जाएगी। यम की रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार, 2025 के आखिर में पिज्जा हट के 108 देशों और टेरिटेरीज में लगभग 20,000 आउटलेट थे और इसकी सालाना सिस्टम सेल्स 12.8 अरब डॉलर थी। अमेरिका पिज्जा हट का सबसे बड़ा मार्केट है। इसके बाद चीन का नंबर आता है।
Taco Bell और KFC से टूटा Pizza Hut का नाता
इस डील से पिज्जा हट के Taco Bell और KFC के साथ दशकों पुराने संबंध भी खत्म हो जाते हैं, जो Yum के पोर्टफोलियो में पिज्जा हट के सिस्टर ब्रांड हैं। पेप्सिको ने 1977 में पिज्जा हट को खरीदा था। 1986 तक इसके पास टैको बेल और KFC भी आ गए। उसके बाद जब पेप्सिको ने 1997 में अपनी रेस्टोरेंट यूनिट को अलग कर दिया, तो होल्डिंग कंपनी का नाम 'ट्रिकॉन ग्लोबल रेस्टोरेंट्स' रखा गया। इसे बाद में बदलकर Yum Brands कर दिया गया।
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