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FIIs ने बेचे 3,450 करोड़ के शेयर, DIIs ने खरीदी 2,885 करोड़ की इक्विटी, जानें किस सेक्टर में नहीं है टैरिफ और FII बिक्री का खतरा

FII/FPI ने शुक्रवार 21 फरवरी को 3,450 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक लगभग 2,885 करोड़ रुपये के शेयरों की खरीदारी की। 21 फरवरी के कारोबारी सत्र के दौरान, DIIs ने शुद्ध रूप से 12,889 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और 10,004 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। एफआईआई ने 10,144 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और 13,593 करोड़ रुपये के शेयर बेचे

Edited By: Sunil Guptaअपडेटेड Feb 22, 2025 पर 10:53 AM
FIIs ने बेचे 3,450 करोड़ के शेयर, DIIs ने खरीदी 2,885 करोड़ की इक्विटी, जानें किस सेक्टर में नहीं है टैरिफ और FII बिक्री का खतरा
Geojit Financial Services के वी के विजयकुमार ने कहा कि डिफेंस सेक्टर जैसे चुनिंदा मिडकैप शेयरों में खरीदारी देखी जा सकती है। इस सेक्टर में FII की बिकवाली का खतरा नहीं है

शुक्रवार 21 फरवरी को विदेशी संस्थागत निवेशक (FII/FPI) 3,450 करोड़ रुपये के शेयरों को बेच कर शुद्ध विक्रेता बने, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) लगभग 2,885 करोड़ रुपये के शेयरों की खरीदारी करके शुद्ध खरीदार बने। प्रोविजनल डेटा के अनुसार ये जानकारी मिली है। 21 फरवरी के कारोबारी सत्र के दौरान, DIIs ने शुद्ध रूप से 12,889 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और 10,004 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। एफआईआई ने 10,144 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और 13,593 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इस साल अब तक, एफआईआई 1,24,262 करोड़ रुपये के शेयरों की बिक्री की है। जबकि डीआईआई ने 1,29,290 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं।

बाजार का प्रदर्शन

निफ्टी और सेंसेक्स ने कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुए। दोनों कल 0.65 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स जहां 75,247.39 अंक पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी 22,763.20 अंक पर नजर आया। सेक्टोरल इंडेक्सेस में, केवल निफ्टी मेटल हरे निशान में कारोबार कर रहा था जबकि निफ्टी ऑटो का प्रदर्शन सबसे खराब रहा।

बाजार के प्रदर्शन पर Geojit Financial Services के वी के विजयकुमार ने कहा "ट्रंप के टैरिफ चेतावनियों के संदर्भ में बाजार ऑटो और फार्मास्यूटिकल्स जैसे संभावित टैरिफ टारगेट्स पर निगेटिव रिस्पॉन्स दे रहा है और डोमेस्टिक कंजम्प्शन में अवसरों की तलाश कर रहा है। ये टैरिफ चेतावनियों से प्रभावित नहीं होंगे। यह एक शॉर्ट टर्म रुझान होने की संभावना है क्योंकि ट्रंप की रणनीति टैरिफ की धमकी देना और फिर अमेरिकी निर्यात पर टैरिफ कटौती के लिए बातचीत करना है। इसे लागू होने में समय लगेगा।"

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