दिवाली सिर्फ दीपों और पटाखों का उत्सव नहीं है,ये उम्मीदों का भी त्योहार है। इस दिवाली शेयर बाजार के निवेशकों के मन में तेजी का दिया थोड़ी मुश्किल से टिमटिमा रहा है। पिछला एक साल मुश्किलों से भरा रहा। वेस्ट एशिया के शोले, क्रूड , FIIs की लगातार बेरुखी ने बाजार और पोर्टफोलियो दोनों का चैन छीना। हलांकि दिवाली से ठीक पहले बाजार में उम्मीद की लौ जगी है। LTCG टैक्स कट की सुगबुगाहट में बुल्स का सेलिब्रेशन चल रहा है।
सवाल ये है कि क्या इस दिवाली बाजार की हर निराशा दूर होगी? बाजार के दो दिग्गज और सबसे चहेते चेहरे केडिया सिक्योरिटीज के एमडी विजय केडिया और अबाकस एसेट मैनेजर एलएलपी (Abakkus Asset Manager LLP) के फाउंडर सुनील सिंधानिया एक मंच पर हमारे साथ जुड़ रहे हैं। इन दोनों की खासियत है कि ये हर चुनौती को नए अवसर में बदलना जानते हैं। बाजार कैसा भी हो इनके चेहरे की मुस्कान कम नहीं होती, इनकी पॉजिटिव सोच भरोसा जताती है। आइए इनसे जानते हैं कि बाजार के लिए संवत 2083 कैसा रह सकता है।
विजय केडिया का कहना है कि बाजार का खराब दौर खत्म हो चुका है। जियोपॉलिटिक्स के चलते थोड़ा उतार-चढ़ाव संभव है। अगला संवत बाजार के लिए अच्छा रहेगा। रिटेल ज्यादा निवेश मिडकैप-स्मॉलकैप में करते हैं। बुल मार्केट कमजोर निवेशक पैदा करता है।
उन्होंने आगे कहा कि LTCG में कुछ छूट मिल सकती है। विदेशी निवेशकों LTCG टैक्स में छूट मिल सकती है। घरेलू निवेशकों को LTCG टैक्स में छूट शायद ना मिले। LTCG में कुछ छूट से बाजार का सेंटिमेंट सुधरेगा। खराब दौरा खत्म हुआ, अब अच्छा समय आने वाला है। इंडेक्स पर नया हाई लगने में समय लगेगा। शायद इंडेक्स एक साल तक नया हाई ना दिखाए। 2008 के बाद भी नया हाई लगने में 5-6 साल लगे थे। इस समय हमें स्मॉलकैप और मिडकैप के अच्छे शेयरों पर फोकस करना चाहिए।
अच्छे शेयर चुनेंगे तो पैसा बनेगा। राइजिंग सेक्टर पर फोकस करना चाहिए। रिन्यूएबल एनर्जी सनराइज सेक्टर है। इंफ्रास्ट्रक्चर शेयर भी अच्छे लगते हैं। साइबर सिक्योरिटी और AI जैसी थीम बेहतर हैं। इमर्जिंग थीम पर फोकस करेंगे तो इनमें मल्टीबैगर मिलेंगे।
ग्लोबल कारणों से बाजार की चुनौतियां बढ़ीं हैं। 2024 में वैल्युएशन ज्यादा बढ़ गए थे। यहां का पैसा कोरिया जैसे बाजारों में गया। सरकार ने जब जरुरत पड़ी बड़ेृ-बड़े रिफॉर्म किए हैं। GST और नतीजों से बाजार के लिए पॉजिटिव संकेत हैं। इमर्जिंग मार्केट में भारत का वेटेज 20% से 11% पहुंच गया है। US मिडटर्म चुनाव नतीजे के बाद ट्रंप की शक्तियों में कमी आएगी। बाजार में पॉजिटिव माहौल है। अगली दिवाली तक बाजार के लिए चीजें अच्छी रहेंगी।
सितंबर-अक्टूबर में क्रूड के चलते बाजार पर दबाव बढ़ा है। MSCI इंडेक्स की नवंबर समीक्षा में भारत का वेटेज बढ़कर 13% संभव है। LTCG में कुछ छूट मिलती है तो बाजार के लिए अच्छा है। डॉलर कमजोर होता है इमर्जिंग मार्केट में पैसा आता है। टैक्स पॉलिसी में निरंतरता होनी चाहिए।
कॉरपोरेट ग्रोथ और अर्निंग के लिए इन्फ्लेशन अच्छा होता है। महंगाई कम होने से रेवेन्यू को उतना बूस्ट नहीं मिलता है। FCNR डिपॉजिट के चलते रुपया संभला है। ज्यादातर मैक्रो सही दिशा में हैं, कच्चा तेल $70 के पास होना चाहिए। कच्चा तेल के नीचे आने से इकोनॉमी को बूस्ट मिलेगा।
आगे निफ्टी की कंपनियों की ग्रोथ स्लो रहेगी। फाइनेंशियल पर पॉजिटिव नजरिया है। बैंक, कैपिटल मार्केट, फार्मा, मेटल पर भी पॉजिटिव नजरिया है। इंजीनियरिंग कंपनिायां भी अच्छा कर रही हैं। अगली दिवाली तक इक्ंविटी में दूसरे एसेट से अच्छे रिटर्न संभव हैं। जल्द ही चुनौतियों के बादल छंटेंगे।
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