इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) कंपनी Dixon Technologies ने ताइवान की कंपनी Gemtek Technology के साथ बड़ा समझौता किया है। दोनों कंपनियां अब भारत में मिलकर ऑप्टिकल ट्रांसीवर और दूसरे टेलीकॉम प्रोडक्ट बनाएंगी।
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) कंपनी Dixon Technologies ने ताइवान की कंपनी Gemtek Technology के साथ बड़ा समझौता किया है। दोनों कंपनियां अब भारत में मिलकर ऑप्टिकल ट्रांसीवर और दूसरे टेलीकॉम प्रोडक्ट बनाएंगी।
इस काम के लिए Dixon की कंपनी Dixon Electroconnect को जॉइंट वेंचर में बदला जाएगा। इसमें Dixon की हिस्सेदारी 60% होगी। Gemtek के पास बाकी 40% हिस्सेदारी रहेगी।
दोनों कंपनियों ने 7 अक्टूबर को समझौते पर साइन किए हैं। इससे पहले 9 जून को दोनों के बीच एक बाध्यकारी टर्म शीट साइन हुई थी।
क्या बनाएगी नई कंपनी?
जॉइंट वेंचर में Optical Transceiver-SFP और BOSA बनाए जाएंगे। इसके अलावा दोनों कंपनियों की सहमति से दूसरे टेलीकॉम प्रोडक्ट भी बनाए जा सकते हैं। Optical Transceiver का इस्तेमाल हाई-स्पीड डेटा कम्युनिकेशन में होता है। वहीं BOSA भी ऑप्टिकल कम्युनिकेशन से जुड़ा प्रोडक्ट है।
यह सौदा नए इक्विटी शेयर जारी करके पूरा होगा। Dixon और Gemtek दोनों Dixon Electroconnect के नए शेयर खरीदेंगे। कितने शेयर मिलेंगे, यह वैल्यूएशन रिपोर्ट और लागू नियमों के हिसाब से तय होगा।
बोर्ड में Dixon का दबदबा रहेगा
नई कंपनी के बोर्ड में Dixon तीन डायरेक्टर नियुक्त कर सकेगी। Gemtek दो डायरेक्टर नियुक्त करेगी। इसके अलावा जॉइंट वेंचर का चेयरमैन नियुक्त करने का अधिकार भी Dixon के पास रहेगा। यह सौदा जरूरी शर्तें पूरी होने के बाद 3 फरवरी 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है।
डेटा सेंटर और AI से बढ़ेगी उम्मीद
Dixon के लिए यह जॉइंट वेंचर काफी अहम है। कंपनी अब डेटा सेंटर, टेलीकॉम और ऑप्टिकल कनेक्टिविटी के कारोबार में उतरना चाहती है। इसके लिए Dixon अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का इस्तेमाल करेगी। वहीं Gemtek हाई-स्पीड ऑप्टिकल मॉड्यूल और नेटवर्किंग टेक्नोलॉजी का अनुभव लेकर आएगी।
कंपनी को AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और एज कंप्यूटिंग से इस कारोबार में मांग बढ़ने की उम्मीद है। हाइपरस्केल डेटा सेंटर और हाई-स्पीड नेटवर्किंग भी इसके बड़े बाजार हो सकते हैं।
Dixon को मार्जिन बढ़ने की उम्मीद
Dixon को आने वाले कुछ साल में अपने मार्जिन में सुधार की उम्मीद है। कंपनी ज्यादा वैल्यू वाले कंपोनेंट बनाने पर जोर दे रही है। इसके अलावा अप्लायंसेज और लाइटिंग कारोबार में भी कंपनी विस्तार कर रही है। इससे कुल मार्जिन बेहतर होने की उम्मीद है।
कंपनी हर साल करीब 800-1,000 करोड़ रुपये का कैपेक्स करने की योजना बना रही है। यह पैसा मोबाइल और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता बढ़ाने में लगाया जाएगा।
डिक्सन के मैनेजमेंट की राय
Dixon के वाइस चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर अतुल लाल ने कहा कि मोबाइल कारोबार में भारतीय EMS इंडस्ट्री का मार्जिन ग्लोबल कंपनियों के मुकाबले करीब समान है।
उनके मुताबिक, कंपोनेंट कारोबार से कंपनी को फायदा होगा। इसके अलावा अप्लायंसेज और लाइटिंग में ज्यादा मार्जिन वाला ODM कारोबार भी कुल मार्जिन सुधार सकता है।
7 अक्टूबर को Dixon Technologies का शेयर 0.54% गिरकर 12,945 रुपये पर बंद हुआ।
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