Demat Account : जरूरी है ट्रेडिंग और डीमैट अकाउंट में नॉमिनेशन की जानकारी देना, जानिए क्यों

अभी ऐसे हजारों डीमैट अकाउंट हैं, जिनमें रखे शेयरों का कोई लीगल ओनर नहीं है। इसकी वजह यह है कि इन डीमैट अकाउंट में नॉमिनेशन नहीं किया गया है। अकाउंट होल्डर के निधन के बाद उन शेयरों का कोई लीगल ओनर नहीं है।

अपडेटेड Apr 01, 2022 पर 12:22 PM
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सेबी ने 24 फरवरी को अपने सर्कुलर में कहा था कि अलग-अलग पक्षों के प्रतिनिधिमंडल ने इस बारे में अपनी राय बताई थी। इसके बाद नॉमिनेशन करने की अंतिम तारीख 31 मार्च, 2022 से बढ़ाकर 31 मार्च, 2022 कर दी गई है।

क्या अगर आपने ट्रेडिंग और डीमैट अकाउंट में नॉमिनी का नाम दिया है? अगर नहीं दिया है तो आपको जल्द यह काम कर देना चाहिए। अब तो सेबी ने ऐसा करना अनिवार्य कर दिया है। अब डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट रखने वाले को नॉमिनी बनाना होगा। अगर वह किसी वजह से नॉमिनेशन नहीं करना चाहता है तो इसकी भी जानकारी देनी होगी।

पहले नॉमिनेशन की अंतिम तारीख 31 मार्च, 2022 थी

पहले डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट में नॉमिनेशन करने की अंतिम तारीख 31 मार्च, 2022 थी। अब सेबी ने इसे बढ़ाकर 31 मार्च, 2023 कर दी है। सेबी ने इस बारे में 24 फरवरी को सर्कुलर जारी किया था। इससे पहले सेबी ने जुलाई 2021 में डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट रखने वाले को 31 मार्च, 2022 तक नॉमिनेशन करने को कहा था।


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नॉमिनेशन की अंतिम तारीख बढ़ाकर 31 मार्च, 2023 की गई

सेबी ने 24 फरवरी को अपने सर्कुलर में कहा था कि अलग-अलग पक्षों के प्रतिनिधिमंडल ने इस बारे में अपनी राय बताई थी। इसके बाद  नॉमिनेशन करने की अंतिम तारीख 31 मार्च, 2022 से बढ़ाकर 31 मार्च, 2022 कर दी गई है। इस तारीख तक नॉमिनेशन नहीं करने वाले इनवेस्टर के डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट को फ्रीज कर दिया जाएगा।

सेबी ने क्यों इसे अनिवार्य बनाया है?

सेबी ने यह फैसला इनवेस्टर के हक में लिया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सेबी को यह काम बहुत पहले करना चाहिए था। दरअसल, डीमैट अकाउंट में नॉमिनेशन नहीं होने से तब बहुत दिक्कत आती है, जब अकाउंट होल्डर का निधन हो जाता है। ऐसी स्थिति में उसके डीमैट अकाउंट में रखे शेयरों को उसके परिवार के लोगों के नाम से ट्रांसफर करना मुश्किल होता है।

नॉमिनेशन के क्या हैं फायदें?

अगर डीमैट अकाउंट में पहले से नॉमिनी का नाम है तो फिर शेयरों के ओनरशिप को लेकर किसी तरह की दिक्कत नहीं आती है। उन शेयरों का लीगल ओनर वह व्यक्ति होता है जिसका नाम नॉमिनेशन में दिया होता है। आम तौर पर व्यक्ति अपनी पत्नी या बच्चों को नॉमिनी बनाता है।

अभी ऐसे हजारों डीमैट अकाउंट हैं, जिनमें रखे शेयरों का कोई लीगल ओनर नहीं है। इसकी वजह यह है कि इन डीमैट अकाउंट में नॉमिनेशन नहीं किया गया है। फिर, अकाउंट होल्डर के निधन के बाद उन शेयरों का कोई लीगल ओनर नहीं है। अकाउंट होल्डर के परिवार के सदस्यों के लिए इन शेयरों को अपने नाम से ट्रांसफर करना मुमकिन है। लेकिन इसकी प्रक्रिया जटिल है।

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