Dollar Vs INR : रुपया थोड़ी नरमी के साथ 90.43 पर खुला, जानिए क्या रही इसकी वजह

Dollar vs INR : भारतीय रुपया बुधवार 4 फरवरी को डॉलर के मुकाबले 90.43 पर कमजोर खुला, जो मंगलवार 3 फरवरी के 90.27 के क्लोजिंग भाव से 16 पैसे कम था,क्योंकि ट्रेड डील की वजह से आई इसकी तेज़ी 90 के अहम लेवल के पास रुक गई

अपडेटेड Feb 04, 2026 पर 10:50 AM
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Dollar vs Rupee : ब्रोकरेज को उम्मीद है कि अगर FPI इनफ्लो लगातार पॉजिटिव रहता है तो आने वाले हफ्तों में USD/INR 88.50–89 की ओर बढ़ सकता है

Dollar vs INR :  सात साल में सबसे बड़ी बढ़त के बाद भारतीय रुपया कमज़ोर होकर आज 90.43 रुपए प्रति डॉलर पर खुला है। US-भारत ट्रेड एग्रीमेंट के बाद इंपोर्टर्स ने डॉलर की डिमांड बढ़ा दी है और FPIs नेट खरीदार बन गए हैं।

मंगलवार 3 फरवरी को अमेरिका-भारत ट्रेड एग्रीमेंट के बाद भारतीय करेंसी में सात सालों में एक दिन में सबसे बड़ी तेज़ी आई थी, लेकिन बड़े इंपोर्टर्स की तरफ से डॉलर की डिमांड फिर से शुरू होने पर यह तेज़ी रुक गई। बैंकर्स का कहना है कि 90 रुपये प्रति डॉलर का लेवल कॉर्पोरेट हेजिंग और डॉलर खरीदने के लिए एक नेचुरल ट्रिगर का काम करता है।

इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान,रुपया थोड़े समय के लिए 90.0450 पर मज़बूत हुआ। यह रैली शुरू होने के बाद से इसका सबसे अच्छा लेवल था। लेकिन बाद में इसमें गिरावट आई। डीलरों का कहना है कि एक बड़ा भारतीय ग्रुप और दूसरी बड़ी कंपनियां डॉलर के एक्टिव खरीदार रहे जिससे इसकी डिमांड बढ़ गई।


अब क्या हैं रुपए के मेन ड्राइवर?

मार्केट के जानकारों का कहना है कि करेंसी का शॉर्ट-टर्म ट्रेंड रोज़ाना के उतार-चढ़ाव पर कम और कैपिटल फ्लो पर ज़्यादा निर्भर करता है। रुपए के लिए शुरुआती संकेत अच्छे रहे। हफ़्तों की बिकवाली के बाद,शुरुआती डेटा के मुताबिक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) मंगलवार को नेट खरीदार बन गए और उन्होंने भारतीय इक्विटी में लगभग 60 करोड़ डॉलर का निवेश किया। डॉश बैंक (Deutsche Bank) का कहना कि अगर ट्रेड डील और बेहतर ऑफशोर सेंटिमेंट की मदद से आने वाले महीनों में विदेशी निवेश में मज़बूती आती है तो रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) रुपये को और मज़बूत होने दे सकता है।

ग्लोबल संकेत मिले-जुले और वोलेटाइल

पूरे एशियाई बाजारों में ज़्यादातर करेंसीज एक सीमित दायरे में ट्रेड कर रही हैं। इससे रुपये के लिए कुछ ही साफ़ संकेत मिल रहे हैं। इस बीच,एक ईरानी ड्रोन के खिलाफ अमेरिकी मिलिट्री कार्रवाई के बाद तेल की कीमतें बढ़ गईं हैं और एक अहम जलमार्ग में अमेरिकी झंडे वाले जहाज़ें के पास हथियारबंद नावें आ गईं हैं। यह एक ऐसी घटना है जिससे एनर्जी की कीमतें बढ़ने पर भारत के चालू खाते पर दबाव बढ़ सकता है।

ट्रेडर्स अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा केविन वॉर्श को फेडरल रिज़र्व के चेयरमैन के तौर पर नॉमिनेट करने की खबर पर भी नजरें रखे हुए हैं। यह एक ऐसा चुनाव है जिसे मॉनेटरी पॉलिसी पर संभावित रूप से ज़्यादा सख्त रुख का संकेत माना जा रहा है।

ट्रेड डील का USD/INR पर क्या होगा असर

एलारा कैपिटल का कहना है कि भारतीय सामानों पर टैरिफ को घटाकर लगभग 18% करने का अमेरिकी फैसला भारत को मोटे तौर पर दूसरे देशों के बराबर लाता है और बांग्लादेश, वियतनाम और थाईलैंड जैसे प्रतिस्पर्धियों से थोड़ा बेहतर स्थिति में रखता है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि अगर FPI इनफ्लो लगातार पॉजिटिव रहता है तो आने वाले हफ्तों में USD/INR 88.50–89 की ओर बढ़ सकता है।

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इन्वेस्टर का मूड और मार्केट सप्लाई

आदित्य बिड़ला सन लाइफ AMC के CIO–इक्विटी, हरीश कृष्णन का कहना है कि वैल्यूएशन से ज़्यादा, रुपये की कमज़ोरी विदेशी इन्वेस्टर्स के लिए मुख्य रुकावट रही है। हालांकि वैल्यूएशन में सुधार हुआ है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि नए इक्विटी इश्यू की लगातार सप्लाई मार्केट के मूड के लिए चुनौती बनी हुई है।

 

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