डॉली खन्ना का इन तीन स्टॉक्स पर बड़ा दांव, जानिए आपको भी क्यों रखनी चाहिए नजर
Dolly Khanna Portfolio: डॉली खन्ना के पोर्टफोलियो में शामिल तीन स्टॉक्स साइक्लिकल सेक्टर्स में छिपे मौके दिखा रहे हैं। इनमें निवेशकों के लिए अहम संकेत हो सकते हैं। जानिए इन स्टॉक्स में क्या खास है और निवेशकों को इन पर क्यों नजर रखनी चाहिए।
रेन इंडस्ट्रीज एक ग्लोबल कंपनी है, जो कार्बन प्रोडक्ट्स और एडवांस्ड मटेरियल्स में काम करती है।
Dolly Khanna Portfolio: निवेशक अक्सर बड़े और अनुभवी इन्वेस्टर्स के पोर्टफोलियो को ट्रैक करते हैं ताकि बाजार में उभरते ट्रेंड्स को समय रहते समझा जा सके। इससे संकेत मिलता है कि किस तरह के सेक्टर और बिजनेस मॉडल धीरे-धीरे फोकस में आ रहे हैं। हालांकि, इन्हें सीधे निवेश सलाह की तरह नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि एक व्यापक दिशा के संकेत के तौर पर समझना ज्यादा सही है।
डॉली खन्ना (Dolly Khanna) के पोर्टफोलियो पर भी निवेशकों की बारी नजर रहती है। क्योंकि इसमें अक्सर ऐसे स्मॉलकैप और दमदार बिजनेस शामिल होते हैं जो अभी मेनस्ट्रीम में नहीं होते, लेकिन रियल इकॉनमी से गहराई से जुड़े होते हैं।
लेटेस्ट ट्रेंड यह दिखाता है कि डॉली का झुकाव साइक्लिकल और पुरानी अर्थव्यवस्था से जुड़े सेक्टर्स की ओर बना हुआ है। आइए जानते हैं डॉली खन्ना के पोर्टफोलियो में शामिल तीन स्टॉक्स के बारे में।
Chennai Petroleum Corporation
चेन्नई पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (CPCL) एक डाउनस्ट्रीम ऑयल रिफाइनिंग कंपनी है। यह Indian Oil ग्रुप का हिस्सा है। हालिया तिमाही में कंपनी ने मजबूत प्रदर्शन दिखाया है। Q3 FY26 में इसका रेवेन्यू करीब 20,134.8 करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर लगभग 27% की बढ़त दिखाता है। वहीं नेट प्रॉफिट 103% से ज्यादा बढ़कर 3,137.7 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
इस ग्रोथ के पीछे बेहतर ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन और ऑपरेशनल एफिशिएंसी का बड़ा रोल रहा है। कंपनी का बिजनेस साइक्लिकल है और इसका प्रदर्शन क्रूड ऑयल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन पर निर्भर करता है।
ग्रोथ के लिहाज से CPCL Nagapattinam में 9 MMTPA ग्रीनफील्ड रिफाइनरी प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। इसमें पेट्रोकेमिकल इंटीग्रेशन भी शामिल है। यह प्रोजेक्ट लॉन्ग टर्म में वैल्यू एडिशन और स्टेबिलिटी ला सकता है। साथ ही कंपनी क्लीन एनर्जी की दिशा में भी कदम बढ़ा रही है, जैसे RLNG का ज्यादा इस्तेमाल और रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी बढ़ाना।
हालांकि, रिटर्न मेट्रिक्स अभी कमजोर हैं। ROCE करीब 4.3% और ROE लगभग 2.5% है, जो बताता है कि कमाई की गुणवत्ता में सुधार अभी जरूरी है।
Rain Industries
रेन इंडस्ट्रीज एक ग्लोबल कंपनी है, जो कार्बन प्रोडक्ट्स और एडवांस्ड मटेरियल्स में काम करती है। इसका बिजनेस एल्यूमिनियम और एनर्जी वैल्यू चेन से जुड़ा है, इसलिए यह भी साइक्लिकल है।
Q3 FY26 में कंपनी का रेवेन्यू करीब 4,301 करोड़ रुपये रहा, जिसमें सालाना आधार पर 17% की बढ़त दिखी। सबसे बड़ा बदलाव प्रॉफिटेबिलिटी में आया। कंपनी 134 करोड़ रुपये के नुकसान से निकलकर 38 करोड़ रुपये के मुनाफे में पहुंच गई। यह सुधार मुख्य रूप से बेहतर कॉस्ट कंट्रोल और रॉ मटेरियल व फिनिश्ड प्रोडक्ट के बीच स्प्रेड मैनेजमेंट के कारण हुआ।
Rain Industries अब अपने पारंपरिक कार्बन बिजनेस से आगे बढ़कर बैटरी मटेरियल्स में भी एंट्री कर रही है। कंपनी spherical purified graphite पर काम कर रही है। यह लिथियम आयन बैटरियों के लिए अहम कच्चा माल है। Ontario में इसका डेमो प्लांट 2026 में शुरू होने की उम्मीद है।
कंपनी का ग्लोबल नेटवर्क इसे सप्लाई चेन रिस्क से कुछ हद तक बचाता है, लेकिन इनपुट कॉस्ट में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल अनिश्चितताएं अभी भी चुनौती बनी हुई हैं।
Prakash Industries
प्रकाश इंडस्ट्रीज इंटीग्रेटेड स्टील कंपनी है, जो स्टील मैन्युफैक्चरिंग और पावर जनरेशन में काम करती है। इसका बिजनेस सीधे तौर पर कमोडिटी साइकिल और इंफ्रास्ट्रक्चर डिमांड से जुड़ा है।
Q3 FY26 में कंपनी का रेवेन्यू 798.6 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल से कम है, लेकिन नेट प्रॉफिट 86.9 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो थोड़ा सुधार दिखाता है। यह दिखाता है कि कंपनी लागत नियंत्रण और ऑपरेटिंग एफिशिएंसी पर फोकस कर रही है।
कंपनी की सबसे बड़ी स्ट्रैटेजी बैकवर्ड इंटीग्रेशन है। Bhaskarpara कोल माइंस से कोयला निकालना शुरू हो गया है, जिसे FY26 में करीब 1 मिलियन टन तक बढ़ाने की योजना है। इससे इनपुट कॉस्ट घटेगी और मार्जिन बेहतर होंगे।
साथ ही स्टील प्रोडक्शन भी 1 मिलियन टन के आसपास पहुंचने की उम्मीद है, जिससे कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर डिमांड के उछाल का फायदा उठा सकती है। रिटर्न के लिहाज से यह कंपनी बाकी दोनों से बेहतर दिखती है। ROCE और ROE दोनों करीब 11.2% हैं, जो इसे तुलनात्मक रूप से मजबूत बनाते हैं।
निवेशकों को क्यों रखनी चाहिए नजर
निवेशकों को ऐसे पोर्टफोलियो पर नजर इसलिए रखनी चाहिए क्योंकि ये अक्सर बाजार में आने वाले ट्रेंड्स का शुरुआती संकेत देते हैं। अनुभवी निवेशक आमतौर पर उन सेक्टर्स और कंपनियों में पहले पोजिशन लेते हैं, जहां वैल्यूएशन कम होता है और भविष्य में ग्रोथ की संभावना बन रही होती है।
इससे रिटेल निवेशकों को यह समझने में मदद मिलती है कि बाजार का फोकस किस दिशा में शिफ्ट हो रहा है, किन साइक्लिकल सेक्टर्स में अपसाइड बन सकता है और कहां रिस्क-रिवार्ड बेहतर दिख रहा है। हालांकि, इसे सीधे निवेश निर्णय की बजाय एक रेफरेंस पॉइंट की तरह ही देखना चाहिए।
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