US Stock markets: ट्रंप सरकार खुद ही अमेरिकी स्टॉक मार्केट्स में गिरावट चाहती है, वजह जानकार चौंक जाएंगे आप

अमेरिकी मार्केट का प्रमुख सूचकांक Nasdaq Composite बीते एक महीने में करीब 3.5 फीसदी गिरा है। Dow Jones करीब 2 फीसदी गिरा है, जबकि S&P 500 ढाई फीसदी से ज्यादा गिरा है। ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से अमेरिकी मार्केट की चाल हैरान करने वाली है

अपडेटेड Mar 27, 2025 पर 11:44 AM
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बीते एक महीने में अमेरिकी स्टॉक मार्केट्स में शेयरों की कीमतें 8 फीसदी तक गिरी हैं। इससे इनवेस्टर्स को 4 लाख करोड़ (ट्रिलियन) डॉलर का लॉस हुआ है।

अमेरिकी सरकार खुद ही अपने स्टॉक मार्केट्स को गिराना चाहती है। यह सुनने में आपको अटपटा लग सकता है। स्टॉक मार्केट्स में तेजी आम तौर पर इकोनॉमी में मजबूती के संकेत के रूप में देखा जाता है। लेकिन, हाल के घटनाक्रम से ऐसा लगता है कि अमेरिका में कुछ असामान्य हो रहा है। बीते एक महीने में अमेरिकी स्टॉक मार्केट्स में शेयरों की कीमतें 8 फीसदी तक गिरी हैं। इससे इनवेस्टर्स को 4 लाख करोड़ (ट्रिलियन) डॉलर का लॉस हुआ है। इस गिरावट को लेकर ट्रंप सरकार को किसी तरह की चिंता नहीं है। कुछ जानकारों का तो यहां तक कहना है कि इस गिरावट के पीछे सरकार का कुछ मकसद हो सकता है।

चीन के साथ अमेरिका का व्यापार

कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि विदेशी इवेस्टर्स खासकर चीन का इस गिरावट में हाथ है। चीन से अमेरिका का आयात ज्यादा है और निर्यात कम है। चीन के पास पर्याप्त अमेरिकी डॉलर है। वह इसका इस्तेमाल अमेरिकी सरकार के बॉन्ड्स (US Government Bonds) खरीदने के लिए करता है। अमेरिकी इकोनॉमी में स्थिरता को इससे मदद मिलती है। अगर अमेरिका चीन के साथ अपने व्यापार घाटे (Trade Deficit) को कम करता है तो इससे चीन के पास डॉलर (Dollar) की उपलब्धता घटेगी। इसका मतलब है कि उसके पास निवेश के लिए कम डॉलर होंगे। इससे अमेरिकी बैंकों और कंपनियों के लिए फंड की उपलब्धता घटेगी।


मौजूदा आर्थिक व्यवस्था में अमीरों को फायदा

एक दूसरी थ्योरी यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सलाहकारों का मानना है कि मौजूदा आर्थिक व्यवस्था से सिर्फ अमीर लोगों को फायदा हो रहा है, जबकि अमेरिका की आधा से ज्यादा आबादी को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राष्ट्रपति और उनके सलाहकार इस व्यवस्था को बदलना चाहते हैं। इसके लिए वे थोड़े समय के लिए मुश्किल वक्त का सामना करने को भी तैयार हैं। दरअसल, सालों से अमेरिकी इकोनॉमी ऐसे लोगों पर निर्भर रही है, जो घर, कार खरीदने और मनोरंजन पर पैसे खर्च करते हैं। इससे इकोनॉमी की ग्रोथ को तो सपोर्ट मिलता है, लेकिन कर्ज और इनफ्लेशन बढ़ जाता है। अभी अमेरिका पर कर्ज का बोझ बढ़कर 34 लाख करोड़ (ट्रिलियन) डॉलर हो गया है। इसमें से 7 लाख करोड़ डॉलर की रिफाइनेंसिंग जल्द करनी पड़ेगी। इसका इंटरेस्ट रेट भी ज्यादा है।

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अमेरिका को कर्ज के जाल से बाहर निकालने पर फोकस

ट्रंप और उनकी टीम अमेरिकी को कर्ज के इस जाल से बाहर निकालना चाहती है। इसके लिए वे स्टॉक मार्केट्स में गिरावट चाहते हैं। इससे निवेशकों में घबराहट की स्थिति बनेगी। वे शेयरों से पैसे निकालेंगे और उसे सुरक्षित माने जाने वाले अमेरिकी सरकार के बॉन्ड्स में लगाएंगे। इससे कम इंटरेस्ट रेट पर बॉन्ड्स में निवेश बढ़ेगा। इंटरेस्ट रेट घटने से अमेरिकी सरकार के लिए अपने कर्ज को संभालना आसान हो जाएगा। ऐसा होता दिख रहा है। 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड्स का इंटरेस्ट रेट जनवरी में 4.8 फीसदी से घटकर अब 4.25 फीसदी पर आ गया है। इंटरेस्ट रेट में थोड़ी सी कमी से भी अरबों डॉलर की बचत होती है।

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