Drone Stocks: ड्रोन सेक्टर अगला बड़ा मौका? कंपनियों के मुनाफे और ऑर्डर बुक में जोरदार उछाल, मगर जोखिम भी हैं
Drone Stocks: ड्रोन सेक्टर में कमाई और ऑर्डर बुक तेजी से बढ़ रही है, लेकिन क्या हर ड्रोन शेयर निवेश के लायक है? कुछ कंपनियों के वैल्यूएशन पहले ही आसमान छू चुके हैं। जानिए इस तेजी के पीछे की असली कहानी और बड़े जोखिम।
ड्रोन सेक्टर की तेजी का फायदा सिर्फ IdeaForge तक सीमित नहीं रहा।
Drone Stocks: मार्च तिमाही के नतीजों में भारत का ड्रोन इंडस्ट्री डिफेंस सेक्टर के सबसे तेजी से बढ़ने वाले सेक्टर में शामिल रहा है। कई कंपनियों ने रेवेन्यू, ऑर्डर बुक और मुनाफे में शानदार बढ़ोतरी दर्ज की है। इसकी बड़ी वजह यह है कि सेना और सुरक्षा एजेंसियों से मिले ऑर्डर अब तेजी से डिलीवरी में बदल रहे हैं। हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि निवेशकों को सिर्फ तेजी देखकर उत्साहित होने के बजाय जोखिमों को भी समझना चाहिए।
IdeaForge ने दिखाया दम
भारत की एकमात्र लिस्टेड प्योर-प्ले ड्रोन कंपनी IdeaForge Technology ने मार्च तिमाही में 60 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को 26 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। वहीं EBITDA मार्जिन बढ़कर 52.6% पर पहुंच गया।
कंपनी के मुताबिक उसने तिमाही के दौरान अपनी ओपन ऑर्डर बुक का करीब 40% पूरा किया। इसमें ऐसे ड्रोन सिस्टम भी शामिल हैं जो इलेक्ट्रॉनिक जामिंग के बीच काम कर सकते हैं। ये भारतीय सेना के परीक्षण को पास कर चुके हैं। FY26 में कंपनी को मिले नए ऑर्डर लगभग 10 गुना बढ़कर 530 करोड़ रुपये तक पहुंच गए। इसके साथ ही ऑर्डर बुक बढ़कर करीब 310 करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले सिर्फ 14 करोड़ रुपये थी।
दूसरी कंपनियों को भी मिला फायदा
ड्रोन सेक्टर की तेजी का फायदा सिर्फ IdeaForge तक सीमित नहीं रहा। Apollo Micro Systems का रेवेन्यू 81% बढ़ा और उसका शुद्ध मुनाफा 164% बढ़कर 37 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं Paras Defence and Space Technologies का रेवेन्यू 58% और मुनाफा 87% बढ़ा।
विश्लेषकों का मानना है कि वित्त वर्ष के अंत से पहले भारतीय सेना द्वारा मंजूर किए गए आपातकालीन खरीद कार्यक्रमों का फायदा पूरे ड्रोन इकोसिस्टम को मिला है। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने वर्ष के दौरान 2.38 लाख करोड़ रुपये के खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी थी, जिनमें कई ड्रोन और मानवरहित विमान परियोजनाएं शामिल थीं।
क्या ड्रोन टेक अगला बड़ा मौका है?
ड्रोन सेक्टर की कंपनियों में तेज ग्रोथ जरूर दिख रही है, लेकिन बाजार पहले से ही इन कंपनियों के लिए काफी ऊंची उम्मीदें लगा चुका है। कई सूचीबद्ध कंपनियों के वैल्यूएशन ऐसे स्तर पर पहुंच चुके हैं, जहां आने वाले कई सालों की ग्रोथ पहले से कीमतों में शामिल मानी जा रही है।
OmniScience Capital के अश्विनी शमी का कहना है कि ड्रोन उद्योग में अवसर बहुत बड़ा है, लेकिन अवसर का आकार और उसे हासिल करने की संभावना अलग-अलग बातें हैं। निवेशकों को इन दोनों के बीच फर्क समझना चाहिए। उन्होंने बताया कि IdeaForge का एक साल का फॉरवर्ड P/E 77.8 गुना और Paras Defence का 56.6 गुना है, जो काफी ऊंचा माना जाता है।
लंबी अवधि में मजबूत संभावनाएं
फिलहाल कई ब्रोकरेज हाउस IdeaForge, Paras Defence और Apollo Micro Systems को लेकर पॉजिटिव बने हुए हैं। उनका मानना है कि इस सेक्टर में अभी भी लंबी अवधि की ग्रोथ की बड़ी संभावना मौजूद है।
JM Financial का अनुमान है कि भारत का ड्रोन बाजार 2025 के 32,600 करोड़ रुपये से बढ़कर 2030 तक 1.77 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इस ग्रोथ को रक्षा खरीद, आंतरिक सुरक्षा, कारोबारी इस्तेमाल और निर्यात से सहारा मिलने की उम्मीद है।
आधुनिक युद्ध में ड्रोन का अहमियत
PL Capital के अमित अनवानी के मुताबिक हाल के युद्धों ने साफ दिखाया है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन, निगरानी प्रणाली, रडार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
भारत सरकार भी घरेलू स्तर पर ड्रोन निर्माण को बढ़ावा दे रही है, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो और देश में ही उन्नत रक्षा तकनीक विकसित की जा सके।
सिर्फ ऑर्डर नहीं, तकनीक भी जरूरी
एनालिस्टों का कहना है कि केवल ऑर्डर बुक और रेवेन्यू ग्रोथ देखकर भविष्य के विजेता तय नहीं किए जा सकते। असली फर्क तकनीक, रिसर्च और प्रोडक्ट डेवलपमेंट कैपेसिटी से पड़ेगा।
अमित अनवानी के मुताबिक IdeaForge के अलावा Paras Defence, Zen Technologies, Solar Industries, Bharat Forge, HAL, L&T और Apollo Micro Systems भी ड्रोन, UAV और एंटी-ड्रोन तकनीकों पर काम कर रही हैं। इसलिए सिर्फ किसी थीम पर दांव लगाने के बजाय सही कंपनी चुनना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
उनका कहना है कि निवेशकों को यह देखना चाहिए कि कंपनी अपने उत्पाद का कितना हिस्सा खुद डिजाइन और विकसित करती है, कितने पुर्जे आयात करती है और क्या उसके पास अपनी खुद की तकनीक है या वह केवल असेंबली का काम कर रही है। आने वाले वर्षों में यही बातें तय करेंगी कि इस तेजी से बढ़ते सेक्टर का असली विजेता कौन बनता है।
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