Tata Sons IPO: क्या अब नहीं आएगा टाटा संस का आईपीओ? नोएल टाटा ने लिस्टिंग के खिलाफ RBI को लिखी चिट्ठी

Tata Sons IPO: टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने Tata Sons की संभावित लिस्टिंग का विरोध करते हुए RBI को पत्र लिखा है। उनका मानना है कि लिस्टिंग से कंपनी की रणनीति और टाटा ट्रस्ट्स के परोपकारी उद्देश्यों पर असर पड़ सकता है। अब सबकी नजर जून की अहम बैठकों पर है। समझिए पूरा मामला।

अपडेटेड Jun 01, 2026 पर 5:45 PM
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नोएल टाटा स्पष्ट रूप से टाटा संस की लिस्टिंग के खिलाफ हैं।

Tata Sons IPO: टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को पत्र लिखकर Tata Sons की संभावित लिस्टिंग का विरोध किया है। उनका कहना है कि अगर Tata Sons शेयर बाजार में लिस्ट होती है, तो इससे कंपनी का मूल चरित्र बदल सकता है। इसका असर टाटा ट्रस्ट्स के सामाजिक और परोपकारी उद्देश्यों पर असर पड़ सकता है।

लिस्टिंग का विरोध क्यों?

नोएल टाटा ने RBI और सरकार के अन्य संबंधित पक्षों को बताया है कि Tata Sons हमेशा से लंबी अवधि के नजरिए के साथ काम करती रही है। कंपनी का फोकस सिर्फ मुनाफा कमाने पर नहीं, बल्कि नए कारोबार खड़े करने और रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश करने पर भी रहा है।


टाटा ट्रस्ट्स का मानना है कि अगर कंपनी शेयर बाजार में लिस्ट हो जाती है, तो उस पर हर तिमाही बेहतर नतीजे दिखाने और सार्वजनिक निवेशकों की अपेक्षाएं पूरी करने का दबाव बढ़ जाएगा। इससे कंपनी की लॉन्ग टर्म नजरिया प्रभावित हो सकता है।

मुनाफे का बढ़ सकता है दबाव

इस मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक ट्रस्ट्स ने यह भी तर्क दिया है कि सार्वजनिक शेयरधारक आमतौर पर ज्यादा मुनाफे और तेज रिटर्न की उम्मीद करते हैं।

ऐसे में Tata Sons जैसी होल्डिंग कंपनी के लिए लंबी अवधि की रणनीति पर टिके रहना मुश्किल हो सकता है। क्योंकि यह कई बार वर्षों तक इंतजार करके बड़े निवेश करती है।

बड़े प्रोजेक्ट्स पर पड़ सकता है असर

यह बहस ऐसे समय हो रही है जब टाटा ग्रुप एयरलाइन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी, डिजिटल कॉमर्स और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश कर रहा है। इनमें से कई कारोबार ऐसे हैं जिनमें मुनाफा आने में कई साल लग सकते हैं। टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि लिस्टिंग के बाद शेयरधारक शॉर्ट टर्म रिटर्न को प्राथमिकता दे सकते हैं। इससे ऐसे लॉन्ग टर्म इनवेस्टमेंट प्रभावित हो सकते हैं।

Air India और सेमीकंडक्टर का भी जिक्र

टाटा ट्रस्ट्स से जुड़े लोगों का कहना है कि एयर इंडिया और सेमीकंडक्टर जैसे कारोबारों में शुरुआती वर्षों में भारी निवेश और नुकसान हो सकता है। उनका मानना है कि मौजूदा स्ट्रक्चर Tata Sons को ऐसे फैसले लेने की आजादी देती है। वहीं, लिस्टिंग के बाद निवेशकों का दबाव बढ़ सकता है।

परोपकारी कामों को लेकर भी चिंता

टाटा ट्रस्ट्स ने यह भी कहा है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, आजीविका और अन्य सामाजिक परियोजनाओं के लिए मिलने वाले संसाधनों का बड़ा हिस्सा Tata Sons से आने वाले डिविडेंड और इनकम पर निर्भर करता है। अगर कंपनी के मालिकाना हक वाले स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव होता है, तो इससे इन सामाजिक गतिविधियों की फंडिंग पर असर पड़ सकता है।

RBI के नियमों से जुड़ा है मामला

Tata Sons की लिस्टिंग का मुद्दा RBI के NBFC नियमों से जुड़ा हुआ है। RBI के स्केल-बेस्ड रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत कुछ बड़े अपर-लेयर NBFCs को तय समयसीमा के भीतर लिस्ट होना होता है, जब तक उन्हें विशेष छूट न मिल जाए। Tata Sons को अपर-लेयर कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में क्लासिफाइड किया गया है। इसके बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।

टाटा ट्रस्ट्स के भीतर भी अलग-अलग राय

रिपोर्ट के मुताबिक नोएल टाटा लिस्टिंग के स्पष्ट रूप से खिलाफ हैं। पिछले साल टाटा ट्रस्ट्स के बोर्ड ने भी Tata Sons की लिस्टिंग का विरोध करने वाला प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया था। हालांकि कुछ ट्रस्टी मानते हैं कि लिस्टिंग से कंपनी की पारदर्शिता बढ़ेगी, Tata Sons का वास्तविक बाजार मूल्य सामने आएगा और माइनोरिटी शेयरहोल्डर्स को भी फायदा मिलेगा।

जून में होंगी अहम बैठकें

इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में और चर्चा हो सकती है। 8 जून को Tata Trusts और 12 जून को Tata Sons बोर्ड की महत्वपूर्ण बैठकें होने वाली हैं। इन बैठकों में कई प्रशासनिक और नेतृत्व से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। माना जा रहा है कि Tata Sons की संभावित लिस्टिंग भी प्रमुख विषयों में शामिल रहेगी।

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