₹200 करोड़ का फ्रंट-रनिंग घोटाला! Axis Mutual Fund के पूर्व फंड मैनेजर को ED ने किया गिरफ्तार

ED ने 200 करोड़ के फ्रंट-रनिंग घोटाले में Axis Mutual Fund के पूर्व फंड मैनेजर वीरेश जोशी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी ने देशभर में छापे मारे और 17.4 करोड़ की संपत्ति फ्रीज की है। इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। जानिए पूरी डिटेल।

अपडेटेड Aug 03, 2025 पर 8:04 PM
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फ्रंट-रनिंग बाजार में एक गंभीर अपराध माना जाता है।

Axis Mutual Fund: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रविवार को बताया कि उसने एक्सिस म्यूचुअल फंड के पूर्व चीफ ट्रेडर और सीनियर फंड मैनेजर वीरेश जोशी ( Viresh Joshi) को 200 करोड़ रुपये के फ्रंट-रनिंग घोटाले में गिरफ्तार किया है। जोशी को 3 अगस्त को हिरासत में लिया गया और मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत एक विशेष अदालत ने उन्हें 8 अगस्त तक ईडी की कस्टडी में भेज दिया है।

क्या है फ्रंट-रनिंग?

फ्रंट-रनिंग बाजार में एक गंभीर अपराध माना जाता है। इसमें ट्रेडर्स या ब्रोकर्स किसी संस्था द्वारा होने वाले बड़े सौदों की गोपनीय जानकारी पहले ही हासिल कर लेते हैं। फिर उस जानकारी का इस्तेमाल करके खुद के लिए सौदे करते हैं। इसका मकसद उस संस्थागत सौदे से पहले ही लाभ कमाना होता है, जिससे संबंधित क्लाइंट को नुकसान और बाजार में असमानता पैदा होती है। यह सेबी नियमों के अनुसार स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित और दंडनीय है।


ED के मुताबिक, जोशी ने एक्सिस म्यूचुअल फंड के भीतर होने वाले खरीद-बिक्री सौदों की पूर्व सूचना का इस्तेमाल निजी लाभ के लिए किया और अन्य ट्रेडर्स को भी इसका फायदा पहुंचाया। एजेंसी का दावा है कि इससे निवेशकों के साथ धोखा हुआ और बाजार की निष्पक्षता प्रभावित हुई।

देशभर में छापे

ED ने 1 अगस्त से देश के कई शहरों में छापेमारी की, जिनमें दिल्ली, मुंबई, गुरुग्राम, लुधियाना, अहमदाबाद, भावनगर, भुज और कोलकाता शामिल हैं। छापों के दौरान एजेंसी को फ्रंट-रनिंग में इस्तेमाल किए गए ब्रोकर्स, म्यूल अकाउंट्स और शेल कंपनियों का जटिल नेटवर्क मिला।

ईडी ने बताया कि इस कार्रवाई में कुल 17.4 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को फ्रीज किया गया है, जिनमें शेयर, म्यूचुअल फंड यूनिट्स और बैंक खातों में जमा राशि शामिल हैं। ये संपत्तियां इस घोटाले से हुई अवैध कमाई का हिस्सा मानी जा रही हैं।

कैसे घुमाया गया पैसा

जांच एजेंसी का दावा है कि जोशी और उसके सहयोगियों ने इस फ्रंट-रनिंग से मिली अवैध कमाई को शेल कंपनियों, रिश्तेदारों के बैंक खातों और विदेशों के जरिए रूट किया। खासकर, दुबई स्थित ट्रेडिंग टर्मिनल के जरिए। कई म्यूल अकाउंट्स भी ब्रोकर्स से जुटाए गए, जिनका इस्तेमाल एक्सिस म्यूचुअल फंड के आधिकारिक सौदों से पहले निजी लेन-देन करने में हुआ।

ED के मुताबिक, यह अवैध कमाई शुरुआती अनुमान से कहीं अधिक हो सकती है, जो फिलहाल 200 करोड़ रुपये से ऊपर आंकी जा रही है।

2018-2021 के बीच हुआ घोटाला

ED की मौजूदा कार्रवाई मुंबई पुलिस द्वारा दिसंबर 2024 में दर्ज एक FIR पर आधारित है। इसके अलावा, 2022 में इनकम टैक्स विभाग ने भी जोशी से जुड़े सौदों की जांच की थी। तब ईडी इस मामले की जांच विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत कर रहा था, लेकिन अब इसे मनी लॉन्ड्रिंग के तहत दर्ज किया गया है।

2022 में हटाए गए थे जोशी

घोटाले के दौरान एक्सिस म्यूचुअल फंड देश के प्रमुख फंड हाउस में शामिल था और इसका AUM (एसेट अंडर मैनेजमेंट) ₹2 लाख करोड़ से अधिक था। जोशी को मई 2022 में उस वक्त हटाया गया था, जब फंड हाउस ने खुद ही अपनी ट्रेडिंग गतिविधियों की आंतरिक समीक्षा शुरू की थी।

समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, ईडी को ऐसे सबूत मिले हैं जो बताते हैं कि कई अन्य ट्रेडर्स और ब्रोकर्स को भी इस अंदरूनी जानकारी का लाभ मिला। इससे यह घोटाला एक संगठित सांठगांठ की ओर इशारा करता है।

और गिरफ्तारियां संभव

एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि यह सिर्फ शुरुआती कार्रवाई है और आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। ED अब इस बात की जांच कर रही है कि इस नेटवर्क में कितने लोग, संस्थाएं और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म शामिल थे और क्या इनकी मिलीभगत से किसी नियामक को गुमराह किया गया।

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