फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग को लेकर एक बड़ी अपडेट है। खबर है कि वीकली एक्सपायरी वाले F&O कॉन्ट्रैक्ट्स को खत्म किया जा सकता है। CNBC आवाज को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, स्टॉक एक्सचेंजों ने SEBI को सुझाव दिया है कि F&O कॉन्ट्रैक्ट्स की वीकली एक्सपायरी खत्म कर दी जाए और केवल मंथली एक्सपायरी को ही रखा जाए। वैसे करीब दो हफ्ते पहले भी ऐसी ही एक खबर आई थी, लेकिन उस वक्त सेबी ने इसे महज अटकलबाजी बताते हुए खारिज कर दिया है। लेकिन अब खुद SEBI चीफ का इस मामले में जो बयान आया है, वह कुछ ऐसा ही संकेत दे रहा है। SEBI चीफ ने कहा कि मार्केट रेगुलेटर अब F&O कॉन्ट्रैक्ट की अवधि बदलने जैसे विकल्पों पर काम कर रहा है और इसके लिए जल्द ही एक कंसल्टेशन पेपर भी जारी किया जाएगा।
SEBI के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे के एक बयान से आज शेयर मार्केट में खलबली मच गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE), एंजल वन, मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्वसेज समेत कैपिटल मार्केट से जुड़ी तमाम कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट आई। BSE का शेयर प्राइस 7.65 फीसदी और एंजल वन का 6.42 फीसदी तक क्रैश कर गया।
SEBI के चेयरमैन ने कहा कि मार्केट रेगुलेटर F&O कॉन्ट्रैक्ट्स की अवधि को बढ़ाने पर विचार कर रहा है। हालांकि साथ में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल अभी सिर्फ इस पर विचार हो रहा है और SEBI कोई भी फैसला लेने से पहले एक कंसल्टेंशन जारी पेपर जारी करेगी।
इससे पहले खबर आई थी कि स्टॉक एक्सचेंजों ने भी वीकली एक्सपायरी को खत्म करने की सलाह दी है। एक्सचेंचों का कहना है कि वीकली एक्सपायरी से न तो लॉन्ग-टर्म हेजिंग का मकसद पूरा हो रहा है और न ही यह रिटेल निवेशकों के हित में है। वीकली एक्सपायरी में मैनिपुलेशन की संभावना अधिक होती है, जिसके चलते रिटेल निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ता है। इन्हीं खबरों के बाद आज कैपिटल मार्केट से जुड़े शेयरों में आज भारी हलचल देखी गई।
ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि BSE और एंजल वन जैसी कई कंपनियों की कमाई का एक बड़ा हिस्सा डेरिवेटिव ट्रेडिंग से ही आता है। एंजल वन के चेयरमैन दिनेश ठक्कर ने हाल ही में बताया था कि कंपनी के रेवेन्यू का करीब 45% हिस्सा F&O ट्रेडिंग से आता है। इसके अलावा कई डिस्काउंट ब्रोकिंग फर्मों की करीब 85% तक कमाई F&O ट्रेडिंग से आती है। ऐसे में अगर F&O ट्रेडिंग की अवधि बढ़ाई जाती है, तो इन कंपनियों के मुनाफे और ट्रेडिंग वॉल्यूम पर असर देखने को मिल सकता है।
फिलहाल मार्केट में वीकली एक्सपायरी वाले F&O कॉन्ट्रैक्ट्स का बोलबाला है। छोटे निवेशक यानी रिटेल निवेशक इसमें बड़ी तादाद में शामिल होते हैं। लेकिन इनमें से 90% से ज्यादा निवेशक घाटे में रहते हैं। सेबी की ही एक स्टडी में बताया वित्त वर्ष 2024 में रिटेल निवेशकों को 52,400 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। जबकि ठीक इसी दौरान प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स को 33,000 करोड़ रुपये और विदेशी निवेशकों को 28,000 करोड़ रुपये का ग्रॉस प्रॉफिट हुआ। यानी छोटे निवेशकों का पैसा बड़े निवेशकों के पास जा रहा है। लेकिन अब आगे चलकर इसमें बदलाव हो सकता है। SEBI का फोकस F&O ट्रेडिंग को लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टिंग और हेजिंग टूल बनाने पर है। इसी सख्ती के डर से ब्रोकरेज और कैपिटल मार्केट कंपनियों के शेयर आज गुरुवार को दबाव में आ गए।
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