Farm Peace IPO Listing: लिस्ट होते ही लोअर सर्किट, फिर भी निवेशक तगड़े फायदे में, हर लॉट पर ₹95000 का मुनाफा

Farm Peace IPO Listing: फार्म पीस एक कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कंपनी है, जो किसानों से चिप्स और फ्रेंच फ्राई के आलू उगवाती है। इसके आईपीओ को निवेशकों का खास रिस्पांस नहीं मिला था लेकिन लिस्टिंग धमाकेदार हुई है। इसके आईपीओ के तहत सिर्फ नए शेयर जारी हुए हैं। नई खरीदारी से पहले चेक करें कंपनी की कारोबारी सेहत कैसी है और आईपीओ के जरिए जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कंपनी कैसे करेगी

अपडेटेड Sep 08, 2026 पर 10:43 AM
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Farm Peace IPO Listing: फार्म पीस का ₹32 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 1-3 सितंबर तक खुला था। आज इसके शेयरों की लिस्टिंग हुई है।

Farm Peace IPO Listing: किसानों से चिप्स और फ्रेंच फ्राई के लिए आलू उगवाने वाली कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कंपनी फार्म पीस के शेयरों की आज BSE SME पर धांसू एंट्री हुई। इसके आईपीओ को निवेशकों का मिला-जुला रिस्पांस मिला था और खुदरा निवेशकों का हिस्सा तो पूरा भर भी नहीं पाया। इस आईपीओ के तहत ₹59 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE SME पर इसकी ₹112.10 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 90% का लिस्टिंग गेन (Farm Peace Listing Gain) मिला। हालांकि आईपीओ निवेशकों की खुशी थोड़ी ही देर में फीकी हो गई जब शेयर टूट गए।

टूटकर यह ₹106.50 (Farm Peace Share Price) के लोअर सर्किट पर आ गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 80.51% मुनाफे में हैं। चूंकि लॉट साइज 2000 शेयरों का था तो लोअर सर्किट के बावजूद आईपीओ निवेशक हर लॉट पर ₹95000 के मुनाफे में हैं।

Farm Peace IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च


फार्म पीस का ₹32 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 1-3 सितंबर तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का मिला-जुला रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 1.16 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 1.73 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 0.59 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 54.24 लाख नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹23.00 करोड़ वर्किंग कैपिटल की बढ़ी हुई जरूरतों, ₹4.80 करोड़ आम कॉरपोरेट उद्देश्यों और ₹4.20 करोड़ आईपीओ से जुड़े एक्सपेंसेज पर खर्च होंगे।

Farm Peace के बारे में

फार्म पीस एक कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कंपनी है। यह किसानों के साथ मिलकर उनसे खास किस्म के आलू उगवाती है और फिर उन आलुओं को प्रोसेसिंग कंपनियों को बेचती है। इन आलू का इस्तेमाल फ्रेंच फ्राई, पोटेटो चिप्स या दूसरे प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स बनाने में होता है। 'फार्म पीस' ब्रांड के तहत गुजरात में किसानों के साथ 100% बायबैक मॉडल पर काम करती है। यह कंपनी किसानों को पहले से तय कीमत पर आलू खरीदने का भरोसा देती है। कंपनी किसानों को बीज, खाद, पेस्टिसाइड्स और स्टोरेज से लेकर सभी जरूरी मदद भी करती है। अगस्त 2026 तक कंपनी के नेटवर्क में 5660 एकड़ से अधिक जमीन है, जिसमें सालाना करीब 61.680 टन आलू पैदा हो रहा है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना करीब 11% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹7.53 करोड़ और टोटल इनकम 20% से अधिक के सीएजीआर से ₹90.84 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹11.28 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹28.32 करोड़ पड़े थे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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