Rays of Belief IPO Listing: डिसऑर्डर्स वाले बच्चों के इलाज और उनकी ग्रोथ में मदद करने वाली रेज ऑफ बिलीफ के शेयरों की आज घरेलू मार्केट में एनएसई पर फ्लैट और बीएसई पर डेढ़ फीसदी से अधिक प्रीमियम पर एंट्री हुई। इसके आईपीओ को निवेशकों का शानदार रिस्पांस मिला था और ओवरऑल इसे 107 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹239 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE पर इसकी ₹243.00 और NSE पर ₹239.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को करीब डेढ़ फीसदी तक का लिस्टिंग गेन (Rays of Belief Listing Gain) मिला। हालांकि लिस्टिंग के बाद टूटकर BSE पर यह ₹234.00 (Rays of Belief Share Price) पर आ गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 2.09% मुनाफे में हैं।
Rays of Belief IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च
रेज ऑफ बिलीफ का ₹125.00 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 1-3 सितंबर तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का धमाकेदार रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 107.71 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 9.01 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 279.11 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 195.86 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 52.30 लाख नए शेयर जारी हुए हैं।
Rays of Belief के बारे में
रेज ऑफ बिलीफ न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर्स (NDDs) यानी बच्चों के विकास से जुड़ी दिक्कतों जैसे कि ऑटिज्म, एडीएचडी, डाउन सिंड्रोम, सेरेब्रल पल्सी, इंटेलेक्चुअल डिजेबिलिटी, लर्निंग डिजेबिलिटी और ग्लोबल डेवलपमेंटल डिलेज से प्रभावित बच्चों के लिए इलाज, थेरेपी और विकास से जुड़ी मदद देती है। कंपनी ने अपना सेंटर गुड़गांव में साल 2018 में खोला था और तेजी से विस्तार किया। वित्त वर्ष 2023 में 71 स्टोर से अब वित्त वर्ष 2026 के आखिरी तक देश के 57 शहरों और 20 राज्यों/यूनियन टेरिटरीज में 136 सेंटर्स तक यह पहुंच गई। इसके 136 सेंटरों में 42 टियर-1 शहरों में, 77 टियर-2 शहरों में और 17 टियर-3 शहरों में है।
कंपनी मुख्य रूप से 18 महीने से 12 साल तक के बच्चों पर ध्यान देती है तो कुछ खास प्रोग्राम 15 साल तक के बच्चों के लिए भी उपलब्ध हैं। कंपनी के सेंटर्स में 150 से ज्यादा टीचिंग टूल्स उपलब्ध हैं। इसके अलावा घर पर बच्चों के साथ प्रैक्टिस करने के लिए 2,000 से ज्यादा टीचिंग टूल्स वाले होम-लर्निंग किट्स भी उपलब्ध हैं।
जून 2025 में कंपनी ने अमेरिका में दो कंपनियों का अधिग्रहण किया जिसमें से मॉम्स बिलीफ यूएफ (Mom's Belief US) को पूर्ण मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी और एलर्जी एंड इम्यूनोलॉजी वर्जीनिया, एलएलसी को स्टेप-डाउन सब्सिडरी के तौर पर। इस अधिग्रहण के साथ कंपनी को अमेरिका के वर्जीनिया के Salem, Lynchburg और Roanoke में 3 सेंटर्स मिले हैं।
कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना करीब 142% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹4.96 करोड़ और टोटल इनकम 63% से अधिक के सीएजीआर से ₹82.06 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹3.61 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹15.22 करोड़ पड़े थे।
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।