अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने इंटरेस्ट रेट में कमी को लेकर अपना रुख साफ कर दिया। उन्होंने 11 फरवरी को संकेत दे दिया कि वह इंटरेस्ट रेट घटाने की जल्दबाजी में नहीं हैं। इसका सीधा असर बॉन्ड यील्ड पर पड़ा। 12 फरवरी को एशियाई बाजारों में बॉन्ड यील्ड में उछाल देखने को मिला। इंडियन स्टॉक मार्केट्स में बड़ी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी भारी दबाव में हैं। स्मॉलकैप और मिडकैप स्टॉक्स में बड़ी गिरावट दिख रही है।
आज आएगा अमेरिका में इनफ्लेशन का डेटा
पॉवेल (Jerome Powell) ने अमेरिकी कांग्रेस को बताया कि फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) को इंटरेस्ट रेट में कमी करने की जल्दबाजी नहीं है। जनवरी में भी उन्होंने इसी तरह का संकेत दिया था। 2024 में लगातार तीन बार इंटरेस्ट रेट में कमी करने के बाद जेरोम पॉवेल इनफ्लेशन और घटने का इंतजार करना चाहते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि फेडरल रिजर्व नए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इकोनॉमिक पॉलिसी को लेकर तस्वीर साफ होने का भी इंतजार करना चाहता है। इस बीच, नजरें अमेरिका में इनफ्लेशन के डेटा पर लगी हैं। 12 फरवरी को इनफ्लेशन का डेटा आने वाला है।
बॉन्ड्स में निवेश का आकर्षण बढ़ सकता है
फेडरल रिजर्व के चेयरमैन के बयान के बाद अमेरिका में भी बॉन्ड्स (ट्रेजरी) की यील्ड में उछाल आया है। इसका मतलब है कि बॉन्ड्स में निवेश पर अच्छी कमाई होगी। इससे अमेरिकी इनवेस्टर्स बॉन्ड्स में निवेश बढ़ा सकते हैं। उन्हें इंडिया जैसे स्टॉक मार्केट्स में निवेश करने की जगह अमेरिकी बॉन्ड्स में निवेश करना फायदेमंद लग सकता है। फॉरेन इनवेस्टर्स पहले से इंडियन स्टॉक मार्केट्स में लगातार बिकवाली कर रहे हैं। अगर अमेरिकी ट्रेजरी में निवेश बढ़ाने के लिए इंडियन मार्केट्स में वे बिकवाली बढ़ाते हैं तो Sensex और Nifty में बड़ी गिरावट आ सकती है।
12 फरवरी को इंडियन स्टॉक मार्केट्स में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। मार्केट्स खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी ने गिरना शुरू कर दिया। 10 बजे दिन में निफ्टी 1 फीसदी यानी 241 प्वाइंट्स गिरकर 22,832 पर आ गया। Sensex भी 1 फीसदी यानी 800 प्वाइंट्स क्रैश करने के बाद 75,350 प्वाइंट्स पर चल रहा था। बैंक निफ्टी 1.11 फीसदी से ज्यादा क्रैश कर गया। यह इंडियन मार्केट्स पर दबाव बढ़ने का संकेत है। इस हफ्ते यह लागातर तीसरे दिन की गिरावट है। 11 फरवरी को इंडियन मार्केट्स में बड़ी गिरावट आई थी।
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स्मॉलकैप और मिडकैप स्टॉक्स में ज्यादा गिरावट
स्मॉलकैप और मिडकैप स्टॉक्स पर ज्यादा दबाव दिख रहा है। BSE Midcap और BSE Smallcap सूचकांक 2-3 फीसदी से ज्यादा दबाव में दिख रहे हैं। यह चिंता की बात है, क्योंकि ज्यादातर रिटेल इनवेस्टर्स के पोर्टफोलियो में मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स की हिस्सेदारी ज्यादा है। उन्होंने ज्यादा रिटर्न के लिए मिडकैप और स्मॉलकैप में जरूरत से ज्यादा निवेश किया था। मिडकैप इंडेक्स पिछले साल सितंबर के अपने हाई से 18 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है। निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स दिसंबर 2024 के अपने पीक से 20 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है।