FII Investment Tax Exempt: भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये को वैश्विक संकट से बचाने के लिए केंद्र सरकार FII को इतिहास का सबसे बड़ा टैक्स रिलीफ देने की तैयारी कर रही है। सीएनबीसी-टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs/FPIs) को भारतीय सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश करने पर टैक्स से पूरी तरह छूट देने पर विचार कर रही है।
इस बड़े फैसले को अमलीजामा पहनाने के लिए सरकार एक विशेष अध्यादेश ला सकती है। इस ऐतिहासिक राहत की खबर के सामने आते ही गुरुवार सुबह के शुरुआती कारोबार में भारत के बेंचमार्क 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड घटकर 7.01 फीसदी पर आ गई।
कौन से दो बड़े टैक्स होंगे खत्म?
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, इस अध्यादेश के जरिए विदेशी निवेशकों पर लगने वाले दो सबसे भारी टैक्स को पूरी तरह हटाया जा सकता है:
LTCG टैक्स से मुक्ति: चुनिंदा सरकारी प्रतिभूतियों पर लगने वाले 12.5 फीसदी के लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।
विद्होल्डिंग टैक्स जीरो: सरकारी बॉन्ड्स से होने वाली ब्याज आय पर FIIs को जो 20 फीसदी का भारी-भरकम विद्होल्डिंग टैक्स (Withholding Tax) देना पड़ता था, उसे भी पूरी तरह हटाया जा सकता है।
इस कदम के पीछे क्या है सरकार की रणनीति?
मिडिल ईस्ट में जारी ईरान युद्ध और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के कारण भारतीय रुपया इस साल अब तक 5 फीसदी से ज्यादा कमजोर हो चुका है। इसके साथ ही भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक लगातार अपना पैसा बाहर निकाल रहे हैं।
ऐसे दौर में इस टैक्स बोझ को हटाकर सरकार का लक्ष्य भारत के डेट मार्केट में विदेशी पूंजी को तेजी से आकर्षित करना है, ताकि रुपये की गिरावट को थामा जा सके और बॉन्ड मार्केट में डॉलर का इनफ्लो बढ़ाया जा सके।
मार्केट एक्सपर्ट्स ने क्या कहा?
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की चीफ इकोनॉमिस्ट माधवी अरोड़ा ने कहा, 'यह प्रस्ताव विदेशी फंड्स के इनफ्लो को बढ़ाने में काफी मददगार साबित हो सकता है। हालांकि मौजूदा वैश्विक माहौल को देखते हुए इसे कोई जादुई छड़ी नहीं कहा जा सकता, लेकिन मीडियम-टर्म में इसके बेहद सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेंगे'।
आरओ फंड मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के फाउंडर और सीआईओ रोहित अग्रवाल ने इस फैसले पर कहा, 'हम सरकार के इस कदम का तहे दिल से स्वागत करते हैं। उम्मीद है कि विदेशी पूंजी को आकर्षित करने और भारत के डेट मार्केट को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में यह कई और बड़े सुधारों का पहला कदम साबित होगा'।