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FII outflows : 2026 के सिर्फ 4 महीनों में ही सेकेंडरी मार्केट में FIIs की बिकवाली 2 लाख करोड़ रुपये के पार

FII outflows : विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 2026 में अब तक भारत के सेकेंडरी मार्केट में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की है। सेकेंडरी मार्केट से होने वाली निकासी की यह मात्रा,पूरे साल 2025 के 2.4 लाख करोड़ रुपये और 2024 के 1.29 लाख करोड़ रुपये की तुलना में काफी ज्यादा है

Edited By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड May 05, 2026 पर 7:39 AM
FII outflows : 2026 के सिर्फ 4 महीनों में ही सेकेंडरी मार्केट में FIIs की बिकवाली 2 लाख करोड़ रुपये के पार
FII Selling : एनालिस्ट्स का कहना है कि हालांकि बिकवाली का दबाव बना रहेगा,लेकिन अभी यह पक्के तौर पर कहना जल्दबाजी होगी कि बाजार की दिशा में कोई स्थायी बदलाव आया है

FII outflows : विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 2026 के पहले चार महीनों में ही भारत के सेकेंडरी मार्केट से 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे हैं, जबकि साल के अभी भी आठ महीने बाकी हैं। यह बाजार में बने लगातार बिकवाली के दबाव को दिखाता है। ग्लोबल फंड दूसरे ऐसे एशियाई बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं जहां वैल्यूएशन ज्यादा आकर्षक नजर आ रहे हैं।

NSDL के ताजे आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी से 30 अप्रैल के बीच FIIs ने सेकेंडरी मार्केट में लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की है। जबकि, NSE के शुरुआती आंकड़ों से पता चलता है कि 4 मई तक लगभग 4,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बिक्री हुई है। सेकेंडरी मार्केट से हुई निकासी की यह मात्रा पूरे साल 2025 के 2.4 लाख करोड़ रुपये और 2024 के 1.29 लाख करोड़ रुपये की तुलना में काफी ज्यादा है।

2024 के मध्य से लगातार हो रही इस बिकवाली की मुख्य वजहें हैं, ऊंचे वैल्यूएशन, सुस्त अर्निंग ग्रोथ और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं। IT और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली तेज हो गई है। इसकी वजहें हैं, IT सेक्टर की कमाई पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के असर को लेकर बनीचिंताएं और चीन,ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाज़ारों की तुलना में भारत में AI से जुड़े सीमित अवसर।

कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर बनी चिंताओं,ट्रेजरी आय पर असर डालने वाली बढ़ती बॉन्ड यील्ड और हालिया प्रोविजनिंग नियमों में बदलाव के चलते बैंकिंग शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला है।

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