FIIs की ताबड़तोड़ बिकवाली के बीच इन 20 शेयरों पर बरसा पैसा, विदेशी निवेशक 1 साल से लगातार बढ़ा रहे हिस्सेदारी
FII Buying: भले ही सेंसेक्स और निफ्टी में इस साल 8-9% की गिरावट आई हो, लेकिन FIIs ने पूरी तरह बाजार से किनारा नहीं किया है। वे अब 'कैलिब्रेटेड अप्रोच' अपना रहे हैं, यानी चुनिंदा सेक्टर और स्टॉक्स पर भरोसा जता रहे हैं
2026 में FIIs का रुझान खास तौर पर डिजिटल, एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों में दिखा है
FII Inflows In Indian Equities: भारतीय शेयर बाजार में हाई वैल्यूएशन, कमजोर अर्निंग और भू-राजनीतिक तनाव के कारण विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं। साल 2026 में अब तक FIIs करीब 18 अरब डॉलर के शेयर बेच चुके हैं। लेकिन इस भारी बिकवाली के बीच एक दिलचस्प ट्रेंड सामने आया है। मार्च 2026 तिमाही के शेयरहोल्डिंग डेटा के अनुसार, FIIs ने 20 चुनिंदा कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी पिछले चार तिमाहियों से लगातार बढ़ाई है।
बिकवाली के बीच FIIs का 'सेलेक्टिव' दांव
भले ही सेंसेक्स और निफ्टी में इस साल 8-9% की गिरावट आई हो, लेकिन FIIs ने पूरी तरह बाजार से किनारा नहीं किया है। वे अब 'कैलिब्रेटेड अप्रोच' अपना रहे हैं, यानी चुनिंदा सेक्टर और स्टॉक्स पर भरोसा जता रहे हैं। 2026 में विदेशी निवेशकों का रुझान खास तौर पर डिजिटल, एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों में दिखा है।
इन शेयरों में दिखी सबसे बड़ी खरीदारी
FIIs ने जिन 20 स्टॉक्स में लगातार चार तिमाहियों से स्टेक बढ़ाया है, उनमें BlackBuck टॉप पर है।
BlackBuck: इसमें FII की हिस्सेदारी 11.6% से बढ़कर सीधे 32.5% हो गई है।
Vishal Mega Mart: विदेशी निवेशकों का स्टेक 7% से बढ़कर 22% पर पहुंच गया है।
South Indian Bank: इसमें भी हिस्सेदारी 12% से दोगुनी होकर 24.2% हो गई है।
इन कंपनियों में FIIs ने बढ़ाई 6% से 10% तक हिस्सेदारी
टेक्नोलॉजी और फाइनेंस: MTAR Technologies, Home First Finance, Abans Enterprises.
एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग: GE Vernova T&D India, Hitachi Energy India, Waaree Energies, Polycab India.
सरकारी और अन्य कंपनियां: BPCL, HPCL, GMR Airports, UPL, Kalpataru.
FIIs क्यों बेच रहे हैं भारतीय शेयर?
विदेशी निवेशकों की निकासी के पीछे चार मुख्य कारण हैं:
वैल्यूएशन: भारतीय बाजार अन्य उभरते बाजारों की तुलना में काफी महंगे हैं।
AI के अवसर: ग्लोबल कैपिटल अब उन बाजारों की ओर जा रहा है जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े बड़े अवसर दिख रहे हैं।
ईरान-इजरायल युद्ध: तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।
ब्रोकरेज रेटिंग: HSBC और JPMorgan जैसी ग्लोबल ब्रोकरेज फर्मों ने भारतीय बाजार की रेटिंग घटा दी है।
क्या है बाजार का हाल?
भारी बिकवाली के बावजूद बड़े इंडेक्स के मुकाबले छोटे और मझोले शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। Sensex/Nifty 2026 में अब तक करीब 8-9% की गिरावट देखने को मिली है। वहीं दूसरी तरफ BSE MidCap/SmallCap में केवल 0.5% से 1% तक की मामूली गिरावट देखी गई है। यह आंकड़ा दिखाता है कि FIIs की बिकवाली के बीच घरेलू निवेशक (DIIs) बाजार को सहारा दे रहे हैं।
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