FIIs Dump: भारतीय शेयर बाजार के लिए मार्च का महीना पिछले कुछ वर्षों में सबसे खराब साबित हुआ है। इस महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FIIs) ने भारतीय इक्विटी मार्केट से ₹1.17 लाख करोड़ से ज्यादा की भारी-भरकम बिकवाली की है। इसमें सबसे बड़ी मार बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर पर पड़ी है, जहां से विदेशी निवेशकों ने करीब ₹60,000 करोड़ निकाल लिए। इस बिकवाली से बैंकिंग सेक्टर में FIIs की संपत्ति 22 महीने के निचले स्तर ₹19.04 लाख करोड़ पर आ गई।
बैंकिंग सेक्टर में क्यों दिखी इतनी बड़ी गिरावट?
मार्च के महीने में निफ्टी बैंक इंडेक्स में 17% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जो मार्च, 2020 में कोविड काल के बाद की सबसे बड़ी मासिक गिरावट है। इसकी प्रमुख वजहें ये रहीं:
HDFC बैंक को झटका: दिग्गज HDFC बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे ने निवेशकों को चौंका दिया, जिससे शेयर 18% तक टूट गया।
बॉन्ड यील्ड में उछाल: भारत की 10 साल की बॉन्ड यील्ड एक साल के उच्चतम स्तर 7% के पार पहुंच गया। इससे बैंकों के सरकारी सिक्योरिटीज पोर्टफोलियो में घाटे की आशंका बढ़ गई है।
RBI की सख्ती: रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद रिजर्व बैंक ने करेंसी मार्केट में जो कदम उठाए, उससे बाजार में लिक्विडिटी कम हो गई है। इससे आने वाली तिमाहियों में बैंकों के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है।
युद्ध और महंगाई का दोहरा मार
बाजार में इस कोहराम के पीछे ग्लोबल कारण भी जिम्मेदार रहे। अमेरिका-इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई की चिंता फिर से बढ़ा दी है। वहीं मार्च में रुपया 4.24% टूटा, जो पिछले छह साल की सबसे बड़ी मासिक गिरावट है। जेफरीज के अनुसार, बैंकों को इस करेंसी उतार-चढ़ाव के कारण ₹4,000–5,000 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
केवल बैंक ही नहीं, ऑटो और मेटल में भी बिकवाली
विदेशी निवेशकों ने लगभग हर सेक्टर से अपना पैसा निकाला है। ऑटो सेक्टर में FIIs फ्लो की बात करें तो फरवरी में खरीदारी करने वाले FIIs ने मार्च में ₹12,500 करोड़ के ऑटो शेयर बेचे। इसकी पीछे की बड़ी वजह है इनपुट कॉस्ट का बढ़ना है जिसके डर से यह सेक्टर 16% गिरा। वहीं कंस्ट्रक्शन सेक्टर में ₹9,154 करोड़, टेलीकॉम में ₹5,603 करोड़, FMCG में ₹5,419 करोड़ और रियल्टी सेक्टर में ₹4,693 करोड़ की भारी बिकवाली देखी गई।
FIIs की इस अंधाधुंध बिकवाली का असर पूरे शेयर बाजार पर दिखा। Sensex और Nifty दोनों प्रमुख इंडेक्स मार्च में 11.5% से ज्यादा गिरे। मिडकैप 150 और स्मॉलकैप 250 इंडेक्स में भी लगभग 11% की गिरावट आई। वहीं भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी घटकर 15.14% रह गई है, जो फरवरी में 15.5% थी।