
साल 2023 की शुरुआत से ही भारतीय बाजारों में लगातार बिकवाली कर रहे विदेशी संस्थागत निवेशक एक बार फिर भारतीय बाजारों का रूख करते नजर आ रहे हैं। पिछले सिर्फ 6 कारोबारी दिनों में इन्होंने 87.6 करोड़ डॉलर की खरीदारी की है। गौरतलब है कि बढ़ती महंगाई और उससे निपटने के लिए ग्लोबल सेंट्रल बैंकों द्वारा ब्याज दरों की जा रही बढ़ोतरी के चलते विदेशी निवेशक अभी तक भारतीय बाजार से बेरूखी दिखा रहे थे। NSDL के आंकड़ों के मुताबिक, 9 फरवरी से 15 फरवरी के बीच FIIs ने भारतीय बाजारों में 68.55 करोड़ डॉलर की खरीदारी की है।
साल 2022 में भी FIIs नेट सेलर रहे थे
FIIs ने 16 फरवरी को भारतीय इक्विटी बाजार में 1577.27 करोड़ रुपये की खरीदारी की है। बतातें चलें कि इस साल के शुरुआत से अब तक FIIs ने भारतीय इक्विटी बाजार में 3.59 अरब डॉलर की बिकवाली की है। साल 2022 में भी FIIs नेट सेलर रहे थे। इन्होंने 17.21 अरब डॉलर की बिकवाली की थी।
बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों के बावजूद लौटी FIIs की खरीदारी
गौरतलब है कि हाल के दिनों में भारतीय बाजार में FIIs की तरफ से लौटती खरीदारी भारत और पूरी दुनिया में एक बार फिर महंगाई बढ़ने और केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों की बढ़ोत्तरी पर कोई रोक न लगाने की संभावनाओं के बावजूद आई है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि देश में महंगाई दर उम्मीद से ज्यादा रहने के बाद RBI ब्याज दरों में बढ़ोतरी की नीति पर कायम रह सकता है। अमेरिका में भी जनवरी महीने में रिटेल महंगाई दर उम्मीद से ज्यादा रही है। जिससे अमेरिकी इकोनॉमी पर महंगाई का दबाव बने रहने की संभावना दिख रही है। ऐसे में जानकारों का मानना है कि यूएसफेड ब्याज दरों में आक्रामक तरीके से बढ़ोतरी जारी रख सकता है।
वित्त 2023 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7 फीसदी रहने की संभावना
बाजार जानकारों का कहना है कि दूसरे बाजारों की तुलना में भारत के मैक्रो इकोनॉमिक इंडीकेटर मजबूत बने हुए हैं। वित्त 2023 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7 फीसदी रहने की संभावना है जो कि दूसरे उभरते बाजारों की तुलना में सबसे ज्यादा है।
भारत में आगे भी बनी रहेगी विदेशी निवेशकों की रुचि
रिलायंस सिक्योरिटीज के मितुल शाह का कहना है कि विदेशी निवेशक अक्सर वैल्यूएशन की तुलना में ग्रोथ को ज्यादा पसंद करते हैं। ऐसे में विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों को ज्यादा तरजीह देते नजर आ सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि हायर ग्रोथ के नजरिए से भारत तमाम दूसरे देशों की तुलना में ज्यादा बेहतर स्थिति में है। भारत के मैक्रो इकोनॉमिक इंडीकेटर काफी मजबूत दिख रहे हैं। सरकार की नीतियों में ग्रोथ पर लगातार फोकस बना हुआ है। इसके अलावा अगले दशक में चाइना प्लन वन पॉलिसी भी भारत के पक्ष में काम करती नजर आएगी। ऐसे में उम्मीद है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों की रुचि भारतीय बाजारों में बनी रहेगी और भारतीय बाजार आगे हमें डबल डिजिट रिटर्न देते नजर आएंगे।
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