FII selling effect: विदेशी निवेशकों की बिकवाली 'नो टेंशन', इस कारण रमेश दमानी का मानना है ऐसा

FII selling effect: विदेशी निवेशक ताबड़तोड़ भारतीय बाजारों से पैसे निकाल रहे हैं। ऐसे में घरेलू निवेशकों के बीच घबराहट बढ़ी है। वहीं दिग्गज निवेशक रमेश दमानी का मानना है कि यह घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह लॉन्ग टर्म के लिए निवेश का मौका है। जानिए विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ बिकवाली के बाद उनके इस पॉजिटिव रुझान की वजह

अपडेटेड May 10, 2026 पर 8:02 AM
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रमेश दमानी का कहना है कि जब भी कोई शेयर बेचा जाता है, कोई न कोई उसे खरीद ही रहा होता है। शेयर किसी ब्लैक होल में गायब नहीं हो जाते।

FII selling effect: दिग्गज निवेशक रमेश दमानी ने विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ बिकवाली और भारतीय मार्केट की सुस्ती से जुड़ी चिंताओं को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि वैश्विक स्तर पर अस्थिरता और बाकी देशों में एआई से जुड़ी तेजी के बावजूद भारत अब भी लॉन्ग टर्म यानी लंबे समय के लिए निवेश के सबसे मौकों में से एक है। उन्होंने ये बातें शनिवार 09 मई को मुंबई में आयोजित ग्रो इंवेस्टर फेस्टिवल में सुनील सिंघानिया के साथ एक पैनल में चर्चा के दौरान कही। उनका कहना है कि घरेलू निवेशक अब इतने मजबूत हो चुके हैं कि वे विदेशी निवेशकों की बिकवाली को संभाल सकते हैं।

बिक रहा शेयर, तो कोई-न-कोई खरीद ही रहा

रमेश दमानी का कहना है कि कुछ भी टूटा नहीं है, जब भी कोई शेयर बेचा जाता है, कोई न कोई उसे खरीद ही रहा होता है। शेयर किसी ब्लैक होल में गायब नहीं हो जाते। उनका कहना है कि स्थानीय निवेशक भारतीय कंपनियों को विदेशी फंड्स की तुलना में बेहतर समझते हैं और बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान अच्छी कंपनियों में निवेश करने के लिए अधिक तैयार रहते हैं।


एआई के चलते विदेश जा रहा निवेश!

मार्केट में अभी इस बात पर काफी चर्चा हो रही है कि AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के इस दौर में विदेशी निवेशक ताइवान और कोरिया जैसे टेक-हैवी मार्केट में जा रहे हैं। रमेश दमानी का मानना है कि कुछ एडवांस्ड टेक्नोलॉजी में भारत पीछे है, लेकिन मार्केट में लीडरशिप लगातार बदलती रहती यानी कि कुछ समय पहले भारत में मार्केट सबसे तेज स्पीड से बढ़ रहा है, संभवत: अब दुनिया के बाकी हिस्से आगे बढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि कोरोना महामारी के बाद भारत कंसालिडेशन के हेल्दी फेज से गुजर रहा है। उनका कहना है कि कोविड के बाद हमें दो अंकों वाले रिटर्न की आदत हो गई थी तो निवेशकों को लगता है कि बाजार हर साल 15-20% बढ़ना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं होता।

एबेकस म्यूचुअल फंड के सुनील सिंघानिया का भी कहनना है कि भारत सेमीकंडक्टर्स और डीप-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर में पीछे है, लेकिन निवेशकों को देश के लॉन्ग टर्म स्ट्रक्चरल स्ट्रेंथ को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियों का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें काफी पूंजी की जरूरत पड़ती है और यहां ताबड़तोड़ रिटर्न की गुंजाइश हमेशा नहीं रह सकती है। उनका कहना है कि भारत की असली ताकत कंजम्प्शन, डेमोग्राफीज और डिजिटलीकरण में है, न कि हर वैश्विक टेक्नोलॉजी ट्रेंड का तुरंत पीछा करने में। सुनील सिंघानिया का कहना है कि भारत दुनिया की उन गिनी-चुनी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है जहां जनसंख्या प्रोफाइल अनुकूल है और घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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