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FIIs ने सिर्फ 16 कारोबारी सत्रों में की 1 लाख करोड़ रुपये बिकवाली, हर घंटे बेचे 1000 करोड़ रुपये के शेयर

15 मार्च तक,FII की कस्टडी में मौजूद एसेट्स 13 महीने के निचले स्तर 65.63 लाख करोड़ रुपये पर आ गए हैं। यह आंकड़ा एक महीने पहले के 71.77 लाख करोड़ रुपये और दिसंबर 2025 के आखिर के 74.27 लाख करोड़ रुपये से कम है

Edited By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Mar 23, 2026 पर 8:49 AM
FIIs ने सिर्फ 16 कारोबारी सत्रों में की 1 लाख करोड़ रुपये बिकवाली, हर घंटे बेचे 1000 करोड़ रुपये के शेयर
FIIs की भारी बिकवाली के बावजूद,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने काफी सहारा दिया है। इसी दौरान इनकी तरफ से रिकॉर्ड 1,16,586 करोड़ रुपये की खरीदारी हुई है

अमेरिका-ईरान-इज़राइल संघर्ष बढ़ने के बाद से विदेशी निवेशकों ने भारत के सेकेंडरी बाज़ारों से 1 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा की रकम निकाल ली है। तेल की कीमतें बढ़ने और मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता को लेकर बढ़ी चिंताएंओं ने विदेशी निवेशकों का मूड खराब किया है। ताजे आंकड़ों के मुताबिक FIIs ने 26 फरवरी से 20 मार्च के बीच भारत के सेकेंडरी मार्केट में 1,00,040 करोड़ रुपये की बिकवाली की है। लगभग 16 कारोबारी सत्रों दिनों में (जिनमें से हर दिन छह घंटे का था) यह आउटफ्लो मोटे तौर पर हर ट्रेडिंग घंटे में 1,000 करोड़ रुपये के आसपास रहा। 2026 में अब तक कुल 50 ट्रेडिंग सेशन में से 33 में FII की बिकवाली देखने को मिली है।

हाल के वर्षों में FIIs लगातार बिकवाली करते रहे हैं। 2025 में भारत के सेकेंडरी मार्केट से 2.4 लाख करोड़ रुपये की निकासी हुई। 241 ट्रेडिंग सेशंस में से 156 सेशंस में FIIs ने बिकवाली की। इसका मतलब है कि हर घंटे लगभग 166 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई। 2024 में, FIIs ने सेकेंडरी मार्केट में 1.29 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की। इस साल के 238 सेशंस में से 134 सेशंस में बिकवाली देखने को मिली,जिसका औसत लगभग 90 करोड़ रुपये प्रति घंटा रहा था।

बाज़ार में आई हालिया बिकवाली के दबाव का कारण ग्लोबल और घरेलू कारकों मिलाजुला असर रहा है। तेल की बढ़ती कीमतें,रुपये का अवमूल्यन और ग्लोबल पूंजी प्रवाह में बदलाव इस बिकवली की मुख्य वजह रहे हैं।

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स (Finrex Treasury Advisors LLP) के ट्रेजरी हेड और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर,अनिल कुमार भंसाली का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्रिप्टोकरेंसी जैसे उभरते सेक्टरों पर ग्लोबल फोकस बढ़ने के साथ ही बाज़ार के मोमेंटम में बदलाव आया है। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील जैसे नीतिगत उपायों में देरी और IT सेक्टर में AI से जुड़ी चिंताओं जैसी अनिश्चितताओं के कारण निवेशकों के कॉन्फिडेंस पर बुरा असर पड़ा है,जिससे विदेशी निवेशकों की बिकवाली लगातार जारी है।

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