FPI लगातार कर रहे बिकवाली, मार्च में अब तक शेयरों से निकाले ₹88180 करोड़; किन वजहों से हैं सेलर

FPI's Selling in March: हालिया सेलिंग के साथ 2026 में अब तक FPI भारतीय शेयर बाजार से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक निकाल चुके हैं। जनवरी में FPI ने 35,962 करोड़ रुपये, दिसंबर 2025 में 22,611 करोड़ रुपये और नवंबर 2025 में 3,765 करोड़ रुपये निकाले थे

अपडेटेड Mar 22, 2026 पर 12:36 PM
Story continues below Advertisement
फरवरी में FPI ने भारतीय शेयरों में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो 17 महीनों का हाई था।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने मार्च में अब तक भारतीय शेयर बाजार से 88,180 करोड़ रुपये (लगभग 9.6 अरब डॉलर) निकाले हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कमजोर होते रुपये और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का भारत की वृद्धि और कंपनियों की कमाई पर असर पड़ने का डर है। इसके चलते FPI बिकवाली कर रहे हैं। NSDL के आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले फरवरी में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो 17 महीनों का हाई था।

हालिया सेलिंग के साथ 2026 में अब तक FPI भारतीय शेयर बाजार से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक निकाल चुके हैं। 20 मार्च तक FPI हर कारोबारी सत्र में नेट सेलर रहे। उन्होंने इस दौरान 88,180 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, यह निकासी अक्टूबर 2024 की 94,017 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड निकासी से कम है। जनवरी में FPI ने 35,962 करोड़ रुपये, दिसंबर 2025 में 22,611 करोड़ रुपये और नवंबर 2025 में 3,765 करोड़ रुपये निकाले थे।

एनालिस्ट्स की राय


न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, एंजल वन के सीनियर फंडामेंटल एनालिस्ट वकारजावेद खान का कहना है कि FPI की निकासी की मुख्य वजह पश्चिम एशिया तनाव है। इसके अलावा महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से कच्चे तेल का दाम 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया है। इससे FPI जोखिम लेने से बच रहे हैं। वहीं रुपया भी 92 प्रति डॉलर के आसपास है। मॉर्निंगस्टार इनवेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिसिंपल मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि अमेरिकी बॉन्ड पर बढ़ती यील्ड FPI की सेलिंग की एक और बड़ी वजह है। ज्यादा यील्ड ने डॉलर वाली संपत्तियों का आकर्षण बढ़ाया है, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों से FPI पैसे निकाल रहे हैं।

टॉप 10 कंपनियों में से 5 का M-Cap ₹1 लाख करोड़ घटा, एक बैंक को सबसे ज्यादा नुकसान

इसी तरह की चिंता जताते हुए जियोजीत इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष ने FPI की बिकवाली को तेज कर दिया है। वैश्विक बाजारों में कमजोरी, रुपये में लगातार गिरावट और भारत की ग्रोथ व कंपनियों की कमाई पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर पड़ने की आशंका ने निवेशक धारणा को प्रभावित किया है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।