मार्केट रेगुलेटर सेबी को पहली बार एक महिला बॉस मिली हैं। आज से माधवी पुरी बुच (Madhabi Puri Buch) सेबी के चेयरपर्सन अजय त्यागी की जगह ले रही हैं। सेबी के करीब 34 साल के इतिहास में कभी महिला को इसका प्रमुख नहीं बनाया गया था। बुच का कार्यकाल 3 साल का होगा। बुच को सेबी के चेयरमैन अजय त्यागी (Ajay Tyagi) की जगह नियुक्त किया गया है। आइए जानते हैं कौन हैं माधवी पुरी बुच।
बुच को सरकारी और प्राइवेट फाइेंशियल वर्ल्ड का व्यापक अनुभव है। वह सेबी की होल-टाइम मेंबर रह चुकी हैं। इस अनुभव का उन्हें बहुत फायदा मिलेगा। वह अप्रैल 2017 में सेबी का होल-टाइम मेंबर बनी थीं। वह पिछले साल अक्टूबर तक इस पद पर रहीं। इस दौरान उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं। इनमें डिविजन फॉर कलेक्टिव इनवेस्टमेंट स्कीम्स सर्विलांस एंड इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट शामिल है। इसके तहत म्यूचुअल फंड्स और अल्टरनेटिव इनवेस्टमेंट फंड्स आते हैं।
सेबी की नई चीफ ने अपना करियर ICICI बैंक से शुरू किया था। उन्हें बतौर प्रोजेक्ट फाइनेंस एनालिस्ट इस बैंक को ज्वाइन किया था। कई बड़ी जिम्मेदारियां निभाने के बाद वह इस बैंक की एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर बनीं। फिर, वह आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ बनी। इसे ब्रोकरेज फील्ड की सबसे बड़ी कंपनी बनाने के बाद 2011 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया। वह आईसीआईसीआई बैंक के पूर्व सीईओ के वी कामत की कोर टीम की हिस्सा थीं।
विदेश में काम करने का अनुभव
ICICI सिक्योरिटीज से इस्तीफा देने के बाद बुच सिंगापुर चली गईं। वहां वह प्राइवेट इक्विटी फर्म ग्रेटर पैसिफिक कैपिटल की बिजनेस डेवलपमेंट हेड बनीं। फिर, उन्होंने बतौर कंसल्टेंट शंघाई स्थित न्यू डेवलपमेंट बैंक को भी सेवाएं दीं। वह सिंगापुर स्थित एगोरा एडवायजरी की फाउंडर-डायरेक्टर भी हैं। वह कई कंपनियों की नॉन-एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर रह चुकी हैं। इनमें जेनसार टेक्नोलॉजी, इनोवेन कैपिटल इंडिया, आइडिया सेलुलर, मैक्स हेल्थेकयर शामिल हैं।
IIM अहमदाबाद से MBA की पढ़ाई
बुच ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित कॉलेज सेंट स्टीफंस से ग्रेजुएशन किया। फिर उन्होंने IIM अहमदाबाद से एमबीए किया। इसके बाद उन्होंने आईसीआईसीआई बैंक से अपना करियर शुरू किया। वह इस बैंक से करीब 20 साल तक जुड़ी रहीं। उन्हें प्राइवेट सेक्टर में काम करने का व्यापक अनुभव है। वह ऐसे वक्त कैपिटल और कमोडिटी मार्केट के रेगुलेटर के चीफ की जिम्मेदारी संभाल रही हैं, जब सेबी इनवेस्टर्स के लिए कई बड़े बदलाव कर रहा है। टी प्लस 1 सेटलमेंट इसका एक उदाहरण है।