F&O में कई साल बाद घाटा हुआ कम लेकिन, SEBI की रिपोर्ट में रिटेलर्स को परेशान करने वाली बातें आई सामने

F&O, Rupees Printing Machine or Destroyer: 1 का 10 बनाने में कई रिटेलर्स का जीरो बन गया, फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में कई रिटेलर्स की यही कहानी है। वित्त वर्ष 2026 में कुल घाटा कई वर्षों बाद कम तो हुआ लेकिन औसत घाटा बढ़ा। साथ ही रिटेलर्स के सामने अब और कड़े प्रतिद्वंद्वी आ गए हैं। डिटेल्स में पढ़ें और जानिए सेबी की रिपोर्ट में क्या-क्या बातें सामने आई हैं

अपडेटेड Aug 23, 2026 पर 9:08 AM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
वित्त वर्ष 2026 में F&O में एक्टिव इंडिविजुअल ट्रेडर्स की संख्या 18% घटकर 87.5 लाख और कुल नेट नुकसान 18% घटकर ₹91,685 करोड़ रहा तो नुकसान में रहने वाले ट्रेडर्स का अनुपात भी 90.9% से घटकर 87.7% रह गया। हालांकि नुकसान में रहने वाले ट्रेडर का औसत नुकसान बढ़कर लगभग ₹1.17 लाख हो गया।

F&O, Rupees Printing Machine or Destroyer: इक्विटी डेरिवेटिव्स मार्केट में वित्त वर्ष 2026 के दौरान कई वर्षों बाद पहली बार बड़ी गिरावट देखने को मिली। हालांकि बाजार नियामक सेबी (SEBI) की ताजा ट्रेडर स्कोरकार्ड रिपोर्ट के मुताबिक मूल समस्या अभी भी बनी हुई है कि अधिकतर रिटेल ट्रेडर्स F&O (Futures & Options) को एक व्यवस्थित ट्रेडिंग प्रक्रिया की बजाय किस्मत आजमाने जैसा मानते हैं। एफएंडओ में कुल नुकसान और ट्रेडर्स की संख्या दोनों कम तो हुई, लेकिन 10 में से करीब 9 रिटेल ट्रेडर्स अब भी घाटे में रहे। सेबी के आंकड़ों से सामने आया है कि वित्त वर्ष 2026 में जो सुधार दिखा भी है, वह स्ट्रैटेजी यानी रणनीति के चलते नहीं बल्कि ट्रेडर्स की संख्या घटने से आया।

क्या हैं आंकड़े

वित्त वर्ष 2026 में F&O में एक्टिव इंडिविजुअल ट्रेडर्स की संख्या 18% घटकर 87.5 लाख और कुल नेट नुकसान 18% घटकर ₹91,685 करोड़ रहा तो नुकसान में रहने वाले ट्रेडर्स का अनुपात भी 90.9% से घटकर 87.7% रह गया। हालांकि नुकसान में रहने वाले ट्रेडर का औसत नुकसान बढ़कर लगभग ₹1.17 लाख हो गया। इस प्रकार वित्त वर्ष 2026 में कम लोगों ने ट्रेडिंग की, लेकिन जो ट्रेडिंग में बने रहे, उन्होंने अभी काफी बड़ा रिस्क लिया और भारी नुकसान उठाया।


Options Buying अब भी रिटेलर्स की पहली पसंद

सेबी के बिहैवरियल एनालिसिस के मुताबिक करीब 99.3% इंडिविजुअल ट्रेडर्स ने कम से कम एक बार ऑप्शंस में ट्रेड किया, तो 93% ट्रेडर्स ने सिर्फ ऑप्शंस में ट्रेडिंग की और फ्यूचर्स में उनकी हिस्सेदारी बहुत सीमित रही। इसके अलावा सेबी के के स्ट्रैटेजी-वाइज स्टडी में सामने आया कि ऑप्शंस बायर्स को 90% नुकसान हुआ और रिटेलर्स को सबसे बड़ा झटका इसी ने दिया। इससे फटाफट पैसा बनाने की कोशिश, एक्सपायरी के दिन ट्रेडिंग, बिना ठोस रणनीति के डायरेक्शन बेट्स और जरूरत से ज्यादा बड़ी पोजिशंस लेना।

रिटेलर्स के लिए बढ़ी लड़ाई

सेबी की रिपोर्ट के मुताबिक रिटेल ट्रेडर्स का मुकाबला अब सिर्फ दूसरे इंडिविजुअल्स से नहीं है। मार्केट पर अब बड़े इंस्टीट्यूशंस, प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग फर्म्स और एल्गोरिदम से चलने वाले उन ट्रेडर्स का दबदबा बढ़ रहा है जो एडवांस्ड एग्जीक्यूशन सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ये टेक्नोलॉजी, रिस्क मॉडल्स, ऑटोमोटेड एग्जीक्यूशन और डिसिपलिन्ड पोजिशन साइजिंग का इस्तेमाल करते हैं। वित्त वर्ष 2026 प्रोप्रॉयटरी ट्रेडर्स ने लगभग ₹44,000 करोड़ और FPIs ने करीब ₹14,000 करोड़ की कमाई की। इन दोनों की कमाई का करीब 99% हिस्सा एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग एंटिटीज से आया। एक तरह कई रिटेलर्स भावनाओं, सोशल मीडिया टिप्स और एक्सपायरी के दिन ट्रे़डिंग पर पर निर्भर हैं तो प्रोफेशनल ट्रेडर्स पहले से तय रणनीतियों, टेक्नोलॉजी और रिस्क मैनेजमेंट के के आधार पर ट्रेड कर रहे।

और भी खास बातें आई सामने

सेबी की रिपोर्ट में एक बात का खंडन हुआ कि अधिक अनुभव का मतलब घाटा कम होना है। जिन ट्रेडर्स ने लगातार चार या उससे अधिक वर्षों तक ट्रेडिंग की, उनमें भी नुकसान की दर बहुत अधिक रही यानी कि बार-बार एक ही गलती करने से ट्रेडिंग स्किल अपने आप नहीं बढ़ती। इसी तरह जिन ट्रेडर्स को लगातार दो साल नुकसान हुआ, उनमें से लगभग 90% ने ट्रेडिंग जारी रखी और फिर से नुकसान उठाया।

सेबी की रिपोर्ट में एक और परेशान करने वाली बात सामने आई कि अधिक ट्रेडिंग से नुकसान भी बड़ा हुआ। सबसे अधिक एक्टिव 42% ट्रेडर्स की कुल घाटे में 87% और टर्नओवर में 94% हिस्सेदारी रही। यह समस्या खासतौर से युवाओं और कम आय वाले ट्रेडर्स में अधिक दिखाई दी।

सेबी की रिपोर्ट में कम कैपिटल और अधिक रिस्क की बात सामने आई। लगभग 35% डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स के पास कोई इक्विटी पोर्टफोलियो नहीं था, तो 78% के पास ₹1 लाख से कम की इक्विटी होल्डिंग थी। पोर्टफोलियो का साइज बढ़ने के साथ नुकसान की संभावना लगातार कम होती गई। बहुत कम या बिना इक्विटी होल्डिंग वाले ट्रेडर्स के लिए नुकसान की संभावना 93% रही तो ₹10 करोड़ से अधिक के पोर्टफोलियो वाले ट्रेडर्स के लिए यह लगभग 58% रही। इससे संकेत मिलता है कि बड़ी पूंजी वाले ट्रेडर्स आमतौर पर एक लिमिट में एक्सपोजर लेते हैं, जबकि कई छोटे ट्रेडर्स अपनी पूंजी के मुकाबले बहुत अधिक लेवरेज इस्तेमाल करते हैं।

Bonds में निवेश पर रिटर्न की गांरटी! ऐसे ऐड पर लगेगी रोक, SEBI ने लाया प्रस्ताव

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

 

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।