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चाइनीज बाजार में घटेगा विदेशी निवेश, भारत सहित दूसरे उभरे बाजारों को मिलेगा इसका फायदा: आनंद टंडन

चीन में स्थितियों में काफी बदलाव हो चुका है। चीन अब केवल साम्यवादी ढांचे के भीतर काम करने वाली पूंजीवादी अर्थव्यवस्था नहीं है। इसके बजाय, यह अब एक ऐसा बाजार बन गया है जहां सरकार आय के पुनर्वितरण पर अधिक नियंत्रण और अधिकार का प्रयोग करती है। इसकी वजह से चीन के बाजारों को लेकर अनिश्चितता की भावना पैदा होती है

Edited By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Jun 16, 2023 पर 3:20 PM
चाइनीज बाजार में घटेगा विदेशी निवेश, भारत सहित दूसरे उभरे बाजारों को मिलेगा इसका फायदा: आनंद टंडन
मेरिका में दरों में बढ़त को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के साथ विदेशी निवेशकों का रुझान उभरते बाजारों की तरफ बढ़ेगा। इसमें भारत को भी अपना उचित हिस्सा मिलेगा

उम्मीद के मुताबिक ही अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने 15 महीने की बढ़ोतरी के बाद ब्याज दरों में बढ़त पर विराम लेने का फैसला लिया है। लेकिन साल के अंत से पहले दो-चौथाई फीसदी की संभावित बढ़ोतरी के ऐलान से बाजार के माथे पर बल पड़ते दिखे हैं। इस बीच, चीन के केंद्रीय बैंक ने 10 महीनों के बाद अपने अहम मीडियम टर्म लेंडिंग रेट में 10 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर दी है। हालांकि, मार्केट एक्सपर्ट आनंद टंडन को चीन के इस कदम से विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के चीनी बाजारों की ओर रुख करने की संभावना नहीं नजर आ रही है। बता दें कि भारतीय इक्विटी बाजार में पिछले तीन महीनों से एफआईआई की तरफ से जोरदार खरीदारी देखने को मिल है। जिसके चलते भारतीय बाजार दुनिया के दूसरे बाजारों की तुलना में काफी अच्छी स्थिति में दिख रहे हैं।

मनीकंट्रोल के साथ एक साक्षात्कार में आनंद टंडन ने कहा कि चीनी बाजार की निवेश क्षमता (investment potential) का आकलन करते समय इसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं पर विचार करना जरूरी है। एक ओर चाइनीज बाजार तुलनात्मक रूप सस्ता दिख है। सरकार और केंद्रीय बैंक द्वारा हाल ही में किया गया रेट कट भी अर्थव्यवस्था के लिए पॉजिटिव आउटलुक का संकेत दे रहा। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या चाइनीज बाजार अभी भी विदेशी निवेशकों के लिए एक आकर्षक निवेश विकल्प है?

चीन में बदल रहे प्रतिमान

चीन में स्थितियों में काफी बदलाव हो चुका है। चीन अब केवल साम्यवादी ढांचे के भीतर काम करने वाली पूंजीवादी अर्थव्यवस्था नहीं है। इसके बजाय, यह अब एक ऐसा बाजार बन गया है जहां सरकार आय के पुनर्वितरण पर अधिक नियंत्रण और अधिकार का प्रयोग करती है। इसकी वजह से चीन के बाजारों को लेकर अनिश्चितता की भावना पैदा होती है। पूरे बाजार पर कब क्या होगा इसका डर छाया रहता है। इसके अलावा वर्तमान जियोपोलिटिकल तनाव ने यूएस-आधारित निवेशकों के मन में चीन की अपील को और कम कर दिया है।

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