विदेशी निवेशकों (FIIs) का रुख इंडियन स्टॉक मार्केट (Indian Stock Markets) को लेकर बदल गया है। पिछले कुछ दिनों में उन्होंने घरेलू बाजार में अच्छी खरीदारी की है। ब्रोकरेज फर्मों का कहना है कि कई हफ्तों तक लगातार गिरावट के बाद कई सेक्टर में शेयरों की कीमतें सही लेवल पर आ गई हैं। मौजूदा वैल्यूएशंस पर विदेशी निवेशक खरीदारी में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी के डेटा के मुताबिक, 28 मार्च से 10 अप्रैल के दौरान विदेशी निवेशकों ने घरेलू बाजार में करीब 82 अरब रुपये (1 अरब डॉलर) की खरीदारी की है।
विदेशी निवेशकों का रुख बदला
NSE के प्रोविजनल डेटा के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने सिर्फ 11 अप्रैल को 342.84 करोड़ रुपये की खरीदारी की है। हालांकि, इस साल अब तक उन्होंने घरेलू बाजार में शुद्ध रूप से 2.74 अरब डॉलर की बिकवाली की है। साल 2022 में उन्होंने 13.41 अरब डॉलर की बिकवाली की थी।
Sensex और Nifty में लगातार सातवें दिन तेजी रही। प्रमुख सूचकांक एक महीना के हाई लेवल पर पहुंच गए हैं। 28 मार्च से अब तक Sensex और Nifty में 4.5 फीसदी तेजी आई है। BSE Midcap और Smallcap में भी तेजी देखने को मिली है। बीएसई मिडकैप 4.7 फीसदी चढ़ा है, जबकि स्मॉलकैप 6.8 फीसदी चढ़ा है। इस साल अब तक सेंसेक्स 1.1 फीसदी गिरा है, जबकि निफ्टी में 2.12 फीसदी कमजोरी आई है। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप में से दोनों में 3 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई है।
वैल्यूएशंस अट्रैक्टिव लेवल पर
विदेशी ब्रोकरेज फर्मों Jefferies और Goldman Sachs ने कहा है कि इंडियन मार्केट में हाल में आई गिरावट के बाद शेयरों की वैल्यूएशंस अट्रैक्टिव हो गई हैं। एनालिस्ट्स का कहना है कि ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता की वजह से आने वाले हफ्तों में बाजार में उतार-चढ़ाव दिख सकता है। शेयरों में आने वाली गिरावट को खरीदारी के मौके के रूप में देखना चाहिए। इनवेस्टर्स अभी दांव लगाकर मीडियम टर्म में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
ब्लूमबर्ग के डेटा के मुताबिक, बीएसई Sensex में अभी एक साल के ब्लेंडेड फॉरवर्ड अर्निंग्स के मुकाबले 19.05 गुना पर कारोबार हो रहा है। यह सेंसेक्स के 10 साल के 20.48 गुना के औसत के मुकाबले करीब 140 बेसिस प्वाइंट्स का डिस्काउंट है। Nifty 50 में एक साल के फॉरवर्ड अर्निंग्स के 18 गुना पर कारोबार हो रहा है। यह इसके 10 साल के 19.93 गुना के औसत के मुकाबले कम है।
MSCI India में 19 गुना के फॉरवर्ड पी/ई रेशियो पर कारोबार हो रहा है। यह इसके लंबी अवधि के औसत के मुकाबले 13 फीसदी ज्यादा है। हालांकि, यह करीब डेढ़ साल पहले के इसके पीक मल्टीपल के मुकाबले करीब 20 फीसदी कम है।