हाल ही में अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) ने कैलेंडर वर्ष 2024 में ब्याज दरों में 3 बार कटौती किए जाने के संकेत दिए हैं। इस संकेत से घरेलू शेयर बाजारों के साथ-साथ ग्लोबल मार्केट भी खुश हैं और शानदार तेजी दर्ज कर रहे हैं। भारतीय शेयर बाजार में फेडरल रिजर्व के संकेत से इस बात की उम्मीद जगी है कि विदेशी निवेशकों की ओर से निवेश बढ़ेगा। कयास ये हैं कि उनकी वापसी धमाकेदार रहने वाली है। शायद इसकी शुरुआत हो चुकी है क्योंकि 15 दिसंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 9,200 करोड़ रुपये की भारतीय इक्विटी खरीदी, जो इस महीने की अब तक की सबसे बड़ी खरीद है।
पिछले तीन महीनों में FII ने लगभग 75,000 करोड़ रुपये, भारतीय इक्विटी मार्केट से निकाले। दिसंबर में अब तक वह 29,700 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर खरीद चुके हैं। एनालिस्ट्स और फंड मैनेजर्स का मानना है कि डॉलर में नरमी, बॉन्ड यील्ड में कमी और दरों में संभावित कटौती के कारण विदेशी निवेशकों की ओर से अच्छा अमाउंट इनवेस्ट किए जाने को लेकर काफी गुंजाइश है। इसके अलावा, तीन राज्यों के चुनावों में भाजपा की जीत के बाद देश में राजनीतिक अनिश्चितता दूर हो गई है और भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर ताजा आंकड़े मजबूत वृद्धि दर्शा रहे हैं।
जैसे-जैसे FII भारत में आ रहे हैं, सभी की निगाहें लार्ज-कैप पर हैं, खासकर निफ्टी 50 शेयरों पर, जहां बड़ी पूंजी के लिए लिक्विडिटी की कोई समस्या नहीं होगी। मनीकंट्रोल के एनालिसिस के मुताबिक, आईटी, फार्मा और कुछ बैंक स्टॉक ऐसे हैं, जिन्हें विदेशी निवेशकों की ओर से मोटा अमाउंट लगाए जाने पर अच्छा मुनाफा होगा। इसकी वजह है कि ये ही वे सेक्टर हैं, जिनमें 2022 में दर वृद्धि चक्र शुरू होने के बाद से FII की ओर से सबसे ज्यादा झटका मिला है। Wipro, TCS, LTIMindtree और Infosys में FII का निवेश, दर वृद्धि चक्र के दौरान अपने पीक से 2-3 प्रतिशत नीचे आ गया। वहीं Tech Mahindra में तो यह गिरावट 9 प्रतिशत की रही। लेकिन चूंकि अब दर वृद्धि खत्म हो चुकी है तो इन आईटी स्टॉक्स में निवेश फिर से बड़ी मात्रा में होने की उम्मीद है।
पिछले दो दिनों में, जब से फेड ने नरम रुख अपनाया है, लार्ज-कैप आईटी शेयरों में 5-7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। फिडेंट एसेट मैनेजमेंट के फाउंडर ऐश्वर्या दाधीच ने कहा, "इस समय लार्जकैप आईटी शेयरों की वैल्यूएशन बहुत उचित है। ग्रोथ आउटलुक थोड़ा धूमिल है, लेकिन अगली 2-3 तिमाहियों में इसमें बदलाव होना चाहिए। जब ऐसा होगा, तो आईटी शेयरों में गिरावट आएगी।"
फार्मा सेक्टर की बात करें तो दर वृद्धि चक्र के दौरान सिप्ला, डिविस लैबोरेट्रीज जैसे शेयरों में FII हिस्सेदारी में 3-5 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। दूसरी ओर, इसी अवधि में सन फार्मा और डॉ. रेड्डीज में FII हिस्सेदारी में बढ़ोतरी देखी गई है। तीसरे सेक्टर यानि बैंकिंग शेयरों की बात करें तो FII हिस्सेदारी बढ़ने की संभावना है, क्योंकि यह अपने पीक से नीचे आ चुकी है।