FPI Selling: विदेशी निवेशकों की अंधाधुंध बिकवाली जारी, अक्टूबर में ₹48056 करोड़ निकाले

FPI Selling: विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर में अब तक भारतीय शेयर बाजार से ₹48,056 करोड़ निकाल लिए हैं। 2026 में कुल निकासी ₹3.08 लाख करोड़ पहुंच गई है। कच्चे तेल की महंगाई और वैश्विक तनाव के बीच क्या बिकवाली का दबाव अब कम होगा?

अपडेटेड Oct 25, 2026 पर 5:42 PM
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Choice Wealth के धीरज गौर के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और मिडिल ईस्ट का तनाव बिकवाली की बड़ी वजह हैं।

FPI Selling: विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। अक्टूबर में अब तक उन्होंने ₹48,056 करोड़ की बिकवाली की है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, मिडिल ईस्ट में तनाव, महंगाई की चिंता और कंपनियों के कमजोर नतीजे इसकी बड़ी वजह हैं। हालांकि, पिछले हफ्ते बिकवाली का दबाव कुछ कम हुआ। विदेशी निवेशक दो कारोबारी दिनों में शुद्ध खरीदार भी बने।

2026 में निकासी ₹3 लाख करोड़ के पार

सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयरों से ₹35,861 करोड़ निकाले थे। इससे पहले जुलाई में ₹20,200 करोड़ और अगस्त में ₹29,631 करोड़ का निवेश किया था। अक्टूबर की निकासी के बाद 2026 में अब तक कुल निकासी ₹3.08 लाख करोड़ पहुंच गई है। यह पूरे 2025 में निकाले गए ₹1.66 लाख करोड़ से काफी ज्यादा है।


कच्चे तेल और महंगाई की चिंता

Choice Wealth के धीरज गौर के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और मिडिल ईस्ट का तनाव बिकवाली की बड़ी वजह हैं। तेल की कीमत करीब 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। कंपनियों के नतीजों और महंगाई को लेकर चिंता भी बनी हुई है। इसके अलावा, ₹30,213 करोड़ के Jio Platforms IPO ने बाजार की नकदी को कुछ समय के लिए अपनी ओर खींचा।

MIRA Money के आनंद के. राठी ने कहा कि तेल और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत आने वाली तिमाहियों में कंपनियों की कमाई पर दबाव डाल सकती है। अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें भी विदेशी निवेशकों को वहां निवेश के लिए आकर्षित कर रही हैं। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों और SIP के निवेश से बाजार को सहारा मिल रहा है।

पिछले हफ्ते बिकवाली में कमी

Geojit Investments के वीके विजयकुमार के मुताबिक, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट, रुपये में मजबूती और बड़े शेयरों के आकर्षक वैल्यूएशन से बिकवाली कम हुई। अमेरिका की 10 साल की बॉन्ड यील्ड 5.36% से घटकर करीब 5% रह गई।

आने वाले हफ्ते में अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान के ब्याज दर संबंधी फैसले अहम होंगे। अमेरिका की GDP, ब्रेंट क्रूड की कीमतें, वैश्विक संघर्ष और कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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