अडानी ग्रुप के स्टॉक्स में 7 अरब डॉलर लगाने वाले मॉरीशस के चार फंड्स पर पहले भी लगे हैं आरोप

इन फंड्स ने पहले ऐसी कंपनियों में निवेश किया है जिनके फाउंडर्स फ्रॉड करके देश से फरार हैं

अपडेटेड Jul 28, 2021 पर 6:28 PM
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अडानी ग्रुप की कंपनियों में भारी निवेश करने के कारण सुर्खियों में आए मॉरीशस के चार फंड्स का रिकॉर्ड डिफॉल्ट या गड़बड़ियों के लिए जांच का सामना करने वाली कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदने का रहा है। इन फंड्स ने अपने कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट का लगभग 90 प्रतिशत अडानी ग्रुप की कंपनियों में लगाया है।

इससे पहले इन फंड्स - Elara India Opportunities Fund, Cresta Fund, Albula Investment Fund और  APMS Investment Fund के पास ऐसी दो कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी थी जिनके फाउंडर्स फ्रॉड करने के बाद देश से फरार हो गए थे।

इन फाउंडर्स के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आरोपों में जांच चल रही है। इसके अलावा इन फंड्स के इनवेस्टमेंट वाली एक कंपनी बैंकरप्ट हो गई थी और एक अन्य को इथोपिया सरकार के साथ विवाद के बाद बेच दिया गया था।

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इन फंड्स का रजिस्ट्रेशन टैक्स के लिहाज से उदार नियम रखने वाले मॉरीशस में होने के कारण इनके मालिकाना हक के बारे में सही जानकारी उपलब्ध नहीं है।

कुछ सांसदों ने अब यह जांच करने की मांग उठाई है कि क्या मॉरीशस के इन फंड्स का इस्तेमाल अडानी के अपने फंड को छिपाने के लिए किया जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद और पूर्व इनवेस्टमेंट बैंकर महुआ मोइत्रा ने पिछले सप्ताह संसद में इन फंड्स के मालिकाना हक पर सवाल उठाया था।


उनका कहना था कि इस बारे में जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए क्योंकि अडानी ग्रुप के पास देश में एयरपोर्ट्स, पोर्ट्स और पावर प्लांट्स जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर में हिस्सेदारी है।

मित्रा ने कहा, "हम जानना चाहते हैं कि यह किसकी रकम है। अगर यह अडानी की रकम है, तो माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स के साथ धोखा किया जा रहा है। अगर यह नहीं है तो कौन सी विदेशी फर्मों की हमारे महत्वपूर्ण एसेट्स में इतनी हिस्सेदारी है।"

इस बारे में वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने एक लिखित उत्तर में बताया था कि अडानी ग्रुप की कंपनियों और  इन फंड्स की एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट की ओर से जांच नहीं की जा रही। हालांकि, अडानी ग्रुप की कुछ कंपनियों की कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी जांच कर रहा है। इसके अलावा इम्पोर्ट और एक्सपोर्ट टैक्स को लेकर भी इनमें से कुछ कंपनियों की जांच हो रही है।

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