विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने सितंबर के पहले 15 दिनों में भारतीय शेयर बाजारों से करीब 4,800 करोड़ रुपये निकाले हैं। इसके पीछे कारण अमेरिका में बॉन्ड पर यील्ड बढ़ना, डॉलर की मजूबती और आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंता है। ये चिंताएं प्रमुख रूप से ग्लोबल मैक्रोइकनॉमिक फैक्टर्स से उपजी हैं, जिनमें कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और महंगाई जोखिमों का फिर से उभरना शामिल है। संयुक्त राज्य अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी होने की संभावना और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके संभावित असर को लेकर चिंताओं की वजह से भी निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। हालांकि FPI (Foreign Portfolio Investors) की ओर से भारतीय शेयर बाजारों से पैसे निकालने का शेयर बाजार की चाल पर असर देखने को नहीं मिला।
इससे पहले FPI मार्च से अगस्त 2023 तक लगातार छह माह भारतीय शेयरों में शुद्ध लिवाल रहे थे। इस दौरान उन्होंने 1.74 लाख करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि एफपीआई की ओर से भारतीय बाजारों से पैसे निकाला जाना आने वाले दिनों में जारी रह सकता है। इसके पीछे अहम वजह मार्केट और वैल्युएशंस का रिकॉर्ड हाई पर होना बताया जा रहा है। डिपॉजिटरीज के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इस महीने अब तक (15 सितंबर तक) शेयरों से शुद्ध रूप से 4,768 करोड़ रुपये निकाले हैं। इस आंकड़े में बल्क डील्स और प्राइमरी मार्केट के माध्यम से निवेश शामिल है।
डेट मार्केट में लगाए 2000 करोड़
सितंबर के पहले 15 दिनों में FPI ने भारत के डेट मार्केट में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया। इसके साथ ही इस साल FPI का अब तक इक्विटी में कुल निवेश 1.3 लाख करोड़ रुपये और डेट मार्केट में 30,200 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। सेक्टर्स की बात करें तो एफपीआई लगातार पूंजीगत सामान और बिजली खरीद रहे हैं। इससे पहले अगस्त में शेयरों में एफपीआई की ओर से निवेश चार माह के निचले स्तर 12,262 करोड़ रुपये पर आ गया था।