विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने सितंबर के पहले 15 दिनों में भारतीय शेयर बाजारों से करीब 4,800 करोड़ रुपये निकाले हैं। इसके पीछे कारण अमेरिका में बॉन्ड पर यील्ड बढ़ना, डॉलर की मजूबती और आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंता है। ये चिंताएं प्रमुख रूप से ग्लोबल मैक्रोइकनॉमिक फैक्टर्स से उपजी हैं, जिनमें कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और महंगाई जोखिमों का फिर से उभरना शामिल है। संयुक्त राज्य अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी होने की संभावना और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके संभावित असर को लेकर चिंताओं की वजह से भी निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। हालांकि FPI (Foreign Portfolio Investors) की ओर से भारतीय शेयर बाजारों से पैसे निकालने का शेयर बाजार की चाल पर असर देखने को नहीं मिला।
