स्टेलर वेल्थ पार्टनर्स इंडिया फंड (Stellar Wealth Partners India Fund) के फाउंडर गौतम बैद (Gautam Baid) को लगता है कि भारतीय बाजार में नए सिरे से बुल रन देखने को मिल है। इस बुल रन की लीडरशिप स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों के हाथ में है। 20 जून को CNBC TV18 के साथ एक साक्षात्कार में बैद ने कहा कि NBFC,प्राइवेट बैंक, माइक्रोफाइनेंस कंपनियां और अफोर्डेबल हाउसिंग जैसे सेक्टर मजबूत बढ़त दिखा रहे हैं। इसके अलावा कैपिटल गुड्स, केबल और तार और हॉस्पिटल, कैपिटल गुड्स और मैन्यूफैक्चरिंग से जुड़े स्टॉक में भी आगे अच्छी तेजी आने की संभावना दिख रही है।
स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में एक नए बुल रन की शुरुआत
इस बातचीत में गौतम बैद ने आगे कहा कि तेल की कीमतों और डॉलर में गिरावट के साथ अनुकूल ग्लोबल मैक्रो इकोनॉमिक स्थितियां भारतीय बाजार में तेजी लाने में योगदान दे रही हैं। भारत 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद से सभी बुल मार्केट का लीडर रहा है। एक नया बुल मार्केट तब माना जाता है जब इंडेक्स अपने पिछले ऑलटाइम हाई को पार करता है। निफ्टी अपने पिछले रिकॉर्ड स्तर को तोड़ने के कगार पर है। तकनीकी रूप से देखें तो ऐसा होने पर बाजार में नए बुल मार्केट की शुरुआत होगी।
लेकिन हम स्पष्ट रूप से देख सकते हैं कि स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में एक नए बुल रन की शुरुआत हो गई है। इस तेजी को मार्च तिमाही के नतीजों के बाद आई कॉर्पोरेट इंडिया की मजबूत कमेंट्री से सपोर्ट मिला है। बहुत सारी कंपनियों ने नई निवेश योजनाओं की घोषणा की है और मजबूत गाइडेंस दिया है। इससे बाजार पर पॉजिटिव असर पड़ा है।
एनबीएफसी, निजी बैंक और माइक्रोफाइनेंस कंपनियों में जोरदार तेजी
गौतम बैद का कहना है कि बाजार में कुछ ऐसे पॉकेट हैं, जो इस समय बेहद तेजी के मूड में दिख रहे हैं। विशेष रूप से, एनबीएफसी, निजी क्षेत्र के बैंकों, माइक्रोफाइनेंस कंपनियों और अफोर्डेबल हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों में जोरदार तेजी के संकेत दिख रहे हैं। इसके अलावा कैपिटल गुड्स, केबल और वायर, हॉस्पिटल सेक्टर के साथ-साथ एवरग्रीन कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग थीम वाले स्टॉक्स भी काफी उम्मीद से भरे दिख रहे हैं।
एफआईआई निवेश में देखने को मिलेगी बढ़त
एफआईआई की खरीदारी पर बात करते हुए गौतम बैद ने कहा कि तीन बड़े कारक हैं जो शॉर्ट टर्म में एफआईआई के प्रवाह का निर्धारण करते हैं। इनमें से पहला है यूएस डॉलर इंडेक्स, दूसरा है फेडरल रिजर्व का ब्याज दर पर रुख और तीसरा है कच्चे तेल की कीमतें। चूंकि भारत कच्चे तेल का शुद्ध आयातक है, इसलिए यह कच्चे तेल के कीमतों के झटकों के प्रति बहुत संवेदनशील है।
डॉलर इंडेक्स में नरमी आई है इसके साथ ही कच्चा तेल अपने हाई से काफी नीचे है। ऐसे लगता है कि ये तीनों बड़े मैक्रो कारक इस समय भारत के पक्ष में हैं। यही कारण है कि भारत ग्लोबल स्तर पर विदेशी निवेशकों के लिए पसंदीदा निवेश डेस्टिनेशन बन गया है।
बाजार पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि जब आप किसी सेक्टोरल बुल मार्केट में भाग लेना चाहते हैं तो आपको उस सेक्टर विशेष में सबसे तेजी से ग्रोथ करते शेयरों पर दांव लगाना होगा। उदाहरण के लिए, आरबीआई ने पिछले साल माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के लिए नियमों में बदलाव किया था। इस बदलाव के चलते इस सेक्टर की सभी प्रमुख कंपनियों की ग्रोथ रेट पूरी तरह से बदल गई। सेक्टर की अधिकांश बड़ी कंपनियां 30-40 फीसदी की दर से ग्रोथ करती दिखी हैं।
रेसीडेंसियल रियल एस्टेट पर बुलिश
गौतम बैद ने बताया कि वे रेसीडेंसियल रियल एस्टेट पर बुलिश हैं। लेकिन स्टेलर वेल्थ पार्टनर्स इस समय रियल एस्टेट डेवलपर्स में सीधे निवेश न करके रियल एस्टेट की तेजी का फायदा उठाने के लिए स्मॉलकैप स्पेस की एक लीडिंग पेंट्स कंपनी Sirca paints पर दांव लगा रही है। इसी तरह स्टेलर वेल्थ पार्टनर्स एक तेजी से ग्रोथ करती लैमिनेक्स कंपनी पर भी बुलिश है।
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