क्या स्टॉक मार्केट्स में आई गिरावट ने आपको डरा दिया है? अगर हां तो आपको दिग्गज फंड मैनेजर प्रशांत जैन की बातों पर गौर करना चाहिए। जैन ने मीडियम से लॉन्ग टर्म में इंडियन स्टॉक मार्केट्स के अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जताई है। उनका कहना है कि न सिर्फ स्टॉक मार्केट्स बल्कि आगे कंपनियों की प्रॉफिट ग्रोथ अच्छी रहेगी। साथ ही इंडियन इकोनॉमी के लिए भी आने वाला समय अच्छा है। उन्होंने 3पी इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के तिमाही न्यूजलेटर में ये बातें कही हैं।
जैन की कंपनी का पूरा पैसा मार्केट में लगा है
Prashant Jain ने कहा है कि इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ की अच्छी संभावना को देखते हुए उनकी कंपनी ने वैल्यूएशन (Valuations) थोड़ी ज्यादा होने के बावजूद अपने करीब पूरे कैश को मार्केट में इनवेस्ट किया है। सितंबर के आखिरी हफ्ते से अब तक सेंसेक्स (Sensex) 4,000 से ज्यादा गिर चुका है। इस गिरावट ने कई निवेशकों को चिंतित कर दिया है।
इंडियन मार्केट में निवेश बनाए रखने की कई वजहें
जैन ने कहा कि शेयरों खासकर लॉर्जकैप स्टॉक्स का प्रदर्शन मीडियम से लॉन्ग टर्म में बेहतर रहने की उम्मीद है, जिसकी वजह कंपनियों की अच्छी प्रॉफिट गोथ होगी। उनका मानना है कि इंडियन मार्केट्स में निवेश बनाए रखने की कई वजहें हैं। इसमें सबसे अहम है अच्छी टैक्स पॉलिसी। शेयरों से जुड़े लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस के नियमों की वजह से भी लंबी अवधि के लिए शेयरों में निवेश करना फायदेमंद है। उन्होंने कहा कि उनकी टीम की पॉजिटिव सोच की एक बड़ी वजह इंडियन कंपनियों की लगातार अच्छी ग्रोथ है।
इंडियन इकोनॉमी की तेज ग्रोथ के आसार
दिग्गज फंड मैनेजर ने कहा कि इंडियन इकोनॉमी की अच्छी ग्रोथ की कई वजहें हैं। आबादी में युवाओं की हिस्सेदारी ज्यादा है, लोगों की इनकम बढ़ रही है, प्रीमियम गुड्स और सर्विसेज तक अभी लोगों की पहुंच कम है। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज के लिए अच्छी संभावनाएं हैं। जब दूसरे उभरते देश कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं तब इंडिया के फिजिकल, डिजिटल और रेगुलेटरी इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी से सुधार हो रहा है। उन्होंने इंडियन इकोनॉमी की कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 7 फीसदी रहने की संभावना जताई। इससे इंडिया में प्रति व्यक्ति आय बढ़ेगी। साथ ही ग्लोबल इकोनॉमी में इंडिया की हिस्सेदारी में इजाफा होगा।
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शॉर्ट टर्म में इकोनॉमी के सामने कुछ चुनौतियां
उन्होंने कहा कि लॉन्ग टर्म में आउटलुक पॉजिटिव है, लेकिन शॉर्ट टर्म में इंडियन इकोनॉमी को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें कंजम्प्शन और निर्यात में सुस्ती शामिल हैं। इसकी वजह वैश्विक अर्थव्यवस्था में कमजोरी और चीन में जरूरत से ज्यादा क्षमता हो सकती है। चीन की इकोनॉमी में पिछले कुछ सालों से सुस्ती दिख रही है। इसका असर डिमांड पर पड़ा है। घरेलू इकोनॉमी में डिमांड कम होने से चीन विदेश में कम कीमत पर चीजों की सप्लाई कर रहा है।