सेबी ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) ट्रेडिंग में रिटेल इनवेस्टर्स के हित में एक बड़ा कदम उठाया है। उसने एक वर्किंग ग्रुप बनाया है। इसका मकसद इक्विटी डेरिवेटिव में रिटेल इनवेस्टर्स के हितों की सुरक्षा और रिस्क मैनेजमेंट है। वर्किंग ग्रुप के एक सदस्य ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर मनीकंट्रोल को इस बारे में बताया है। इस 15 सदस्यों वाले ग्रुप के प्रमुख जी पद्मनाभन को बनाया गया है। वह आरबीआई के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर रह चुके हैं।
वर्किंग ग्रुप में स्टॉक्स एक्सचेंज के प्रतिनिधि शामिल
इस वर्किंग ग्रुप में स्टॉक एक्सचेंज, ब्रोकरेज फर्म, क्लियरिंग कॉर्पोरेशंस, म्यूचुअल फंड्स, एक बड़ी कंपनी और IIM के प्रतिनिधि शामिल हैं। यह ग्रुप एक्सचेंज-ट्रेडेड डेरिवेटिव (ETD) में इनवेस्टर्स के हितों की सुरक्षा के लिए नियर टर्म और मीडियम टर्म उपायों के बारे में सुझाव देगा। साथ ही वह मार्केट डेवलपमेंट और रेगुलेशन बढ़ाने के लिए ETD के रिस्क मीट्रिक्स और रिस्क आर्किटेक्चर को इम्प्रूव करने की सलाह देगा।
F&O ट्रेडिंग में बढ़ते रिटेल पार्टिसिपेशन पर सरकार चिंतित
पिछले 3-4 साल में इंडिया में डेरिवेटिव मार्केट में रिटेल इनवेस्टर्स की दिलचस्पी काफी बढ़ी है। इसने रेगुलेटर्स और सरकार की चिंता बढ़ाई है। दोनों का मानना है कि अगर मार्केट क्रैश करता है तो रिटेल इनवेस्टर्स को बड़ा लॉस हो सकता है। पिछले हफ्ते केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था कि SEBI और RBI इक्विटी डेरिवेटिव में बढ़ते वॉल्यूम पर करीबी नजर रख रहे हैं। यह देश के नॉमिनल जीडीपी से आगे निकल गया है।
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण भी जता चुकी हैं चिंता
FT19 से FY22 के बीच इंडिया में F&O ट्रेडर्स की संख्या पांच गुनी हो गई है। फ्यूचर्स इंडस्ट्री एसोसिएशन के मुताबिक, अब BSE और NSE डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट की संख्या के लिहाज से दुनिया के दो सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज बन गए हैं। ग्लोबल वॉल्यूम में इनकी हिस्सेदारी करीब 85 फीसदी तक पहुंच गई है। इस साल मई में फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने कहा था कि F&O ट्रेडिंग में रिटेल इनवेस्टर्स के बढ़ते पार्टिसिपेशन का असर इनवेस्टर सेंटिमेंट और परिवारों की वित्तीय सेहत पर पड़ सकता है।
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SEBI दूसरे प्लान पर भी कर रहा विचार
SEBI एफएंडओ में बढ़ते रिटेल पार्टिसिपेशन पर अंकुश लगाने के लिए एक दूसरे प्लान पर भी विचार कर रहा है। इसके तहत डेरिवेटिव सेगमेंट में सिंगल स्टॉक्स में पॉजिशन लेने के लिए कुछ शर्तें तय की जा सकती हैं। सेबी के बोर्ड की अगली बैठक में इस प्रस्ताव पर विचार हो सकता है। सेबी की एक दूसरी समिति इस प्रस्ताव पर पहले ही विचार कर चुकी है। सेबी ने इस बारे में जून की शुरुआत में एक डिस्कशन पेपर पेश किया था।