गौतम अदाणी ने अमेरिका के सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (Securities and Exchange Commission) के उन आरोपों को निपटाने के लिए 60 लाख डॉलर का भुगतान करने पर सहमति जताई है। इन आरोपों में कहा गया था कि उन्होंने अदाणी ग्रीन एनर्जी (Adani Green Energy) के बारे में झूठे और गुमराह करने वाले बयान देकर US के सिक्योरिटीज नियमों का उल्लंघन किया है। प्रस्तावित समझौते में उनके भतीजे सागर द्वारा 1.2 करोड़ डॉलर का भुगतान करने की सहमति भी शामिल है। यदि यह सौदा अंतिम रूप ले लेता है,तो यह अदाणी समूह के लिए एक बड़ी सौगात साबित होगा,जिसके कारोबार कोयला खनन से लेकर हवाई अड्डों तक फैले हुए हैं।
गौतम अदाणी, अदाणी ग्रुप के चेयरमैन हैं और सागर अदाणी, अदाणी ग्रीन एनर्जी में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। SEC ने न तो इस ग्रुप पर और न ही इसकी किसी कॉर्पोरेट यूनिट पर मुकदमा किया। उस समय कंपनी ने अमेरिका में लगे इन आरोपों से इनकार किया था।
इसके पहले ब्लूमबर्ग न्यूज़ ने बताया था कि अमेरिकी डिपार्टमेंट एक समानांतर आपराधिक मामले में अदाणी के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप हटाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। SEC के साथ समझौते के अलावा,इस तरह के कदम से इस समूह के लिए अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों में वापसी करने और अपनी आक्रामक विस्तार नीति को फिर से शुरू करने का रास्ता साफ हो सकता है।
बता दें कि नवंबर 2024 में,ब्रुकलिन में अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय ने पांच-सूत्रीय आरोप पत्र में दावा किया था कि अदाणी और अन्य प्रतिवादियों ने भारत में सौर-ऊर्जा कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए 25 करोड़ डॉलर की रिश्वत योजना चलाई थी। न्याय विभाग का आरोप था कि उन्होंने भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने का वादा किया और अमेरिकी निवेशकों से धन जुटाते समय इस योजना को छिपाया।
इसके अलावा,एसईसी ने भी अपने समानांतर मुकदमे में आरोप लगाया था कि गौतम अदाणी ने 'अदाणी ग्रीन' द्वारा भारत के सबसे बड़े सौर ऊर्जा संयंत्र परियोजना के अनुबंध प्राप्त करने के लिए अधिकारियों को करोड़ों डॉलर की रिश्वत देने या उसका वादा करने का नेतृत्व किया। हालांकि,अदाणी ग्रुप ने लगातार इन आरोपों का खंडन किया है। मामले में गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर सहित कोई भी प्रतिवादी अब तक अदालत में पेश नहीं हुआ है, जिससे मामला प्रभावी रूप से रुका हुआ था।
इस साल की शुरुआत में,अदाणी के वकीलों ने एसईसी के धोखाधड़ी के मामले को खारिज करने की अपील करते हुए दस्तावेज दाखिल किए थे। उनका तर्क था कि नियामकों के पास इन दोनों व्यक्तियों पर आवश्यक अधिकार क्षेत्र नहीं है और मामले को आधार देने वाले कथित गलत बयान कार्रवाई योग्य नहीं थे।