क्रूड में उबाल और ग्लोबल सेटीमेंट क्या बाजार में फिर मचाएगा तबाही, जानें गिफ्ट निफ्टी क्या दे रहा संकेत
GIFT Nifty indicator: AI पर भारी खर्च को लेकर फिर से चिंताएं बढ़ गई हैं, जिससे वैश्विक टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली शुरू हो गई है। इसके अलावा, ईरान के खिलाफ अमेरिका द्वारा नई सैन्य कार्रवाई की आशंकाओं के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भी बाजार की धारणा पर दबाव डाल सकता है। ये कमजोर वैश्विक संकेत ऐसे समय में आए हैं, जब पिछले सत्र में भारतीय शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली थी
GIFT Nifty indicator: शुक्रवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के कमजोर शुरुआत करने के आसार हैं।
GIFT Nifty indicator: शुक्रवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के कमजोर शुरुआत करने के आसार हैं। एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली और वॉल स्ट्रीट में रात भर हुई गिरावट के बीच, GIFT निफ्टी भी मामूली नुकसान के साथ कारोबार कर रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर भारी खर्च को लेकर फिर से चिंताएं बढ़ गई हैं, जिससे वैश्विक टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली शुरू हो गई है। इसके अलावा, ईरान के खिलाफ अमेरिका द्वारा नई सैन्य कार्रवाई की आशंकाओं के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भी बाजार की धारणा पर दबाव डाल सकता है। ये कमजोर वैश्विक संकेत ऐसे समय में आए हैं, जब पिछले सत्र में भारतीय शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली थी।
सुबह लगभग 7:55 बजे, GIFT निफ्टी 38 अंक या 0.16 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,005 पर कारोबार कर रहा था। गुरुवार को भारतीय बाजारों में तेजी रही; सेंसेक्स 905.01 अंक (1.24 प्रतिशत) उछलकर 74,151.04 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 237.90 अंक (1.05 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 22,936.75 पर बंद हुआ। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार दो दिनों तक खरीदारी करने के बाद बिकवाली की और 943 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार दूसरे सत्र में खरीदारी जारी रखी और 1,924 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
एशियाई बाजारों में गिरावट
शुक्रवार को एशियाई बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिली। टेक्नोलॉजी कंपनियों के निराशाजनक नतीजों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में किए जा रहे भारी निवेश को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं, जिसके चलते निवेशक AI से जुड़े शेयरों से दूरी बना रहे हैं।
दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) सूचकांक लगभग 5 प्रतिशत गिर गया, जिसमें सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और SK हाइनिक्स जैसी बड़ी सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में आई गिरावट का बड़ा हाथ रहा। जापान का निक्केई (Nikkei) 2.7 प्रतिशत, शंघाई कंपोजिट 0.8 प्रतिशत नीचे आया, जबकि ताइवान के बाजारों में भी भारी बिकवाली का दबाव देखा गया।
AI पर खर्च और महंगाई की चिंताओं के बीच वॉल स्ट्रीट में गिरावट
गुरुवार को अमेरिकी बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। निवेशकों ने प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर किए जा रहे खर्च के पैमाने का फिर से आकलन किया, जबकि महंगाई के नए आंकड़ों ने कीमतों के लगातार ऊंचे बने रहने की चिंताओं को और गहरा कर दिया है। नैस्डैक कंपोजिट 365.13 अंक या 1.37 प्रतिशत गिरकर 26,184.72 पर आ गया, जो प्रमुख सूचकांकों में सबसे बड़ी गिरावट रही। S&P 500 में 23.59 अंक या 0.30 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 7,720.39 पर आ गया, जबकि डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 132.54 अंक या 0.25 प्रतिशत गिरकर 52,342.56 पर बंद हुआ।
ब्रेंट क्रूड 117 डॉलर के पार पहुंचा
शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया। इसके पीछे यह संकेत थे कि अमेरिका ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य हमले शुरू कर सकता है, जिससे मध्य पूर्व से ऊर्जा आपूर्ति में नई बाधाओं की चिंता बढ़ गई है। दिसंबर सेटलमेंट के लिए ब्रेंट क्रूड 2.4 प्रतिशत बढ़कर 117.61 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि दिसंबर डिलीवरी के लिए वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 2.7 प्रतिशत बढ़कर 104.77 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
इंडेक्स पर क्या है रणनीति
एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार दबाव में रह सकते हैं। इसका कारण बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिम, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और कमजोर वैश्विक संकेत हैं, जो निवेशकों की धारणा पर असर डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि घरेलू कंपनियों के नतीजों का मौजूदा दौर (अर्निंग सीजन) कुछ खास शेयरों में हलचल पैदा कर सकता है, भले ही व्यापक बाजार बाहरी घटनाओं के प्रति संवेदनशील बना रहे।
चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड के टेक्निकल रिसर्च VP सचिन गुप्ता ने कहा कि 73,200–73,500 का स्तर तत्काल सपोर्ट जोन है, जबकि रेजिस्टेंस (बाधा) 74,400–74,700 के आसपास है। व्यापक ट्रेडिंग रेंज 73,200–74,700 के बीच है, जिसमें रुझान 'साइडवेज' (स्थिर) से 'बुलिश' (तेजी की ओर) शिफ्ट हो रहा है। रिकवरी को बनाए रखना और रेजिस्टेंस जोन को पार करना आगे और तेजी के रास्ते खोल सकता है, जबकि सकारात्मक मोमेंटम बनाए रखने के लिए सपोर्ट जोन के ऊपर बने रहना महत्वपूर्ण होगा।
गुप्ता ने कहा, "आगे चलकर, मजबूत खरीदारी, डेली चार्ट पर बुलिश कैंडल और बेहतर होते RSI मोमेंटम के दम पर, सेंसेक्स का आउटलुक 'साइडवेज से बुलिश' (sideways to bullish) हो गया है। रिकवरी को बनाए रखने के लिए सेंसेक्स का 73,200–73,500 के स्तर के ऊपर टिके रहना बहुत जरूरी होगा, जबकि 74,400–74,700 के स्तर को पार करने पर इसमें और तेजी आ सकती है। हालांकि, मूविंग-एवरेज और ऑप्शंस से जुड़े रेजिस्टेंस को देखते हुए, 74,150–74,200 का जोन काफी अहम है, जिस पर नजर रखनी होगी। ट्रेडर्स को रैली के अगले चरण की उम्मीद करने से पहले यह देखना चाहिए कि क्या इंडेक्स इन स्तरों के ऊपर टिक पाता है या नहीं।"
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