GIFT Nifty Trend : रेपो रेट में बढ़ोतरी और तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद GIFT निफ्टी से मिल रहे बाजार के पॉजिटिव शुरुआत के संकेत

GIFT Nifty Trend :बुधवार को RBI के फैसलों के कारण आई गिरावट के बाद,GIFT Nifty भारतीय इक्विटी मार्केट में फ्लैट या हल्की बढ़त के साथ शुरुआत के संकेत दे रहा है। हालांकि कल आई सख्त मॉनेटरी पॉलिसी,एशियाई बाजारों में कमजोरी,कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें,ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और FII की लगातार बिकवाली जैसे फैक्टर बाजार के सेंटीमेंट पर दबाव बना सकते हैं

अपडेटेड Oct 08, 2026 पर 8:53 AM
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GIFT Nifty Trend :पोनमुडी आर के मुताबिक निफ्टी के लिए 22,750-22,800 का लेवल तत्काल रेजिस्टेंस ज़ोन है। अगर निफ्टी लगातार 22,800 के ऊपर बना रहता है तो यह 23,000 की ओर रिकवरी में मदद कर सकता है

GIFT Nifty Trend : गुरुवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के फ्लैट या हल्की बढ़त के साथ खुलने की उम्मीद है। RBI द्वारा फरवरी 2023 के बाद पहली बार ब्याज दरें बढ़ाने के बाद GIFT निफ्टी में मामूली बढ़त नजर आ रही। RBI ने रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है और अपना रुख बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग'(सोच-समझकर सख्ती) कर लिया है। कमजोर एशियाई और अमेरिकी बाजार,कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें,अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी,महंगाई, बढ़ता कर्ज और FII की लगातार बिकवाली बाजार के सेंटीमेंट पर दबाव डाल सकते हैं।

सुबह करीब 8:10 बजे GIFT निफ्टी 28 अंक या 0.12 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,620 पर ट्रेड कर रहा था। बुधवार को उतार-चढ़ाव भरे सेशन में भारतीय इक्विटी इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए,जिससे उनकी लगातार दो दिनों की बढ़त का सिलसिला टूट गया। सेंसेक्स 429.11 अंक यानी 0.59 प्रतिशत गिरकर 72,638.70 पर बंद हुआ। जबकि निफ्टी 173.05 अंक यानी 0.76 प्रतिशत गिरकर 22,603.05 पर बंद हुआ। बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 6,100 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे। जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब 4,500 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

एशियाई बाजार


ग्लोबल बॉन्ड मार्केट के दबाव के कारण एशियाई बाजारों में गिरावट आई है। गुरुवार को एशियाई इक्विटी बाजार में गिरावट देखने को मिल रही। सॉवरेन बॉन्ड मार्केट में फिर से दबाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों के मूड पर असर डाला है। बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों द्वारा अरबों डॉलर का कर्ज जुटाने की कोशिशों की खबरों ने फंडिंग के लिए कॉम्पिटिशन और कर्ज लेने की लागत को लेकर चिंताएं और बढ़ा दीं हैं।

जापान का निक्केई 0.9 प्रतिशत गिरा है। जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.6 प्रतिशत नीचे आया है। जापान को छोड़कर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स 0.1 प्रतिशत गिर गया है। US इक्विटी फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है। S&P 500 और नैस्डैक फ्यूचर्स दोनों ही लगभग सपाट स्तर पर ट्रेड कर रहे हैं।

ट्रेजरी यील्ड बढ़ने से वॉल स्ट्रीट में गिरावट

बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। इससे पहले S&P 500 और नैस्डैक ने पिछले सेशन में रिकॉर्ड क्लोजिंग हाई छुआ था। लेकिन लंबी अवधि की ट्रेजरी यील्ड में फिर से बढ़ोतरी शुरू होने से महंगाई और बढ़ते कर्ज को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गईं हैं।

डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 341.11 अंक यानी 0.66 प्रतिशत गिरकर 51,180.17 पर आ गया,जबकि S&P 500 इंडेक्स 0.22 प्रतिशत गिरकर 7,801.75 पर बंद हुआ। नैस्डैक कम्पोजिट में भी 0.22 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 27,538.69 पर आ गया। इन गिरावटों के साथ डाओ और S&P 500 की लगातार चार सत्रों की बढ़त का सिलसिला टूट गया,जबकि नैस्डैक में छह सत्रों में पहली बार गिरावट दर्ज की गई।

ब्रेंट क्रूड $101 के पार

मिडिल ईस्ट से सप्लाई को लेकर बनी चिंता के बीच ब्रेंट क्रूड $101 के पार पहुंच गया है। गुरुवार को तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में जहाजों पर बढ़ते हमलों ने मिडिल ईस्ट से सप्लाई को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.33% बढ़कर $101.53 प्रति बैरल हो गया है। जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 1.26% बढ़कर $89.39 प्रति बैरल पर पहुंच गया है।

RBI की सख्ती और FII की बिकवाली से बाज़ार में सावधानी का माहौल

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि भारतीय इक्विटी बाजार को लेकर नजरिया सतर्क बना हुआ है। RBI द्वारा रेपो रेट बढ़ाने से घरेलू वित्तीय हालात कड़े हो गए हैं और यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब ग्लोबल बाजार पहले से ही ट्रेज़री यील्ड में बढ़ोतरी और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि दिसंबर तक रेपो रेट के 6 प्रतिशत तक पहुंचने की बाजार की उम्मीदों और महंगाई बढ़ने की आशंकाओं का असर खास तौर पर उन सेक्टरों पर पड़ सकता है जो ब्याज दरों में बदलाव से प्रभावित होते हैं। साथ ही,इससे इक्विटी मार्केट में लगातार सुधार की गुंजाइश भी सीमित हो सकती है। लगातार हो रही विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी चिंता का विषय बनी हुई है।

पोनमुडी के मुताबिक जब तक FII का निवेश स्थिर नहीं हो जाता या US ट्रेजरी यील्ड कम नहीं हो जाती,तब तक घरेलू इक्विटी में और बिकवाली का जोखिम बना रह सकता है। उन्हें उम्मीद है कि जब तक महंगाई और ब्याज दरों की चाल को लेकर अधिक स्पष्टता नहीं आती,तब तक निवेशक सोच-समझकर निवेश करेंगे।

निफ्टी का टेक्निकल आउटलुक

पोनमुडी के मुताबिक निफ्टी के लिए 22,750-22,800 का लेवल तत्काल रेजिस्टेंस ज़ोन है। अगर निफ्टी लगातार 22,800 के ऊपर बना रहता है तो यह 23,000 की ओर रिकवरी में मदद कर सकता है। नीचे की तरफ 22,500 तत्काल सपोर्ट लेवल है। अगर यह लेवल टूटता है तो इंडेक्स 22,400-22,200 तक जा सकता है। जब तक निफ्टी 22,800 के नीचे ट्रेड कर रहा है, तब तक शॉर्ट-टर्म टेक्निकल आउटलुक में सावधानी बरतने की ज़रूरत है।

 

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